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दिल्ली के बाजारों में दिवाली की खरीदारी के आंकड़ों ने राजनीतिक और आर्थिक बहस को जन्म दिया है।
धनतेरस और दिवाली से पहले बीजेपी से जुड़े व्यापारिक संगठन लगातार बिजनेस पर असर की आशंका जता रहे थे।
अब व्यापारिक संगठन CAT ने दिल्ली में दिवाली कारोबार एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचने का आंकडा जारी किया है।
Delhi Diwali Business Record: दिल्ली के बाजारों में दिवाली की रौनक, ग्राहकों की भीड़ और खरीदारी के आंकड़ों ने इस बार एक दिलचस्प राजनीतिक और आर्थिक बहस को जन्म दिया है। धनतेरस और दिवाली से पहले जहां बीजेपी से जुड़े व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) लगातार यह आशंका जता रहा था कि राहुल गांधी और विपक्ष के वोट चोरी के मुद्दे पर होने वाले प्रदर्शनों से त्योहारी सीजन में व्यापारियों को भारी नुकसान हो सकता है।
वहीं अब व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAT) ने दिल्ली में दिवाली कारोबार एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचने का आंकडा जारी किया है।
सबसे अहम बात यह है कि व्यापारिक संगठनों की ओर से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल दिल्ली में धनतेरस और दिवाली के दौरान लगभग 80 हजार करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था, जबकि इस बार यह आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। यानी पिछले साल के मुकाबले करीब 20 हजार करोड़ रुपये अधिक का व्यापार।
यह आंकड़ा केवल बाजारों में हुई खरीदारी का आर्थिक आकलन नहीं है, बल्कि इसके साथ कई राजनीतिक सवाल भी जुड़ गए हैं। जिस समय व्यापारिक संगठन राजनीतिक प्रदर्शनों को लेकर चिंता जाहिर कर रहे थे, उसी समय दिल्ली के व्यापारियों और ग्राहकों के बीच त्योहार की खरीदारी का उत्साह भी दिखाई दे रहा था। अब रिकॉर्ड कारोबार के दावे ने इस पूरी बहस को एक नया मोड़ दे दिया है।
दिवाली से पहले दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं। राहुल गांधी और कांग्रेस सहित विपक्षी दलों की ओर से वोट चोरी के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और रैली की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान बीजेपी के करीबी माने जाने वाले व्यापारिक संगठन CTI ने लगातार पत्र लिखकर त्योहारी सीजन में विरोध प्रदर्शनों को लेकर चिंता जताई थी।
CTI का तर्क था कि दिवाली दिल्ली के व्यापारियों के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी समय होता है। इस दौरान दिल्ली के बाजारों में न केवल दिल्ली बल्कि एनसीआर और आसपास के राज्यों से भी बड़ी संख्या में ग्राहक खरीदारी के लिए पहुंचते हैं।
ऐसे में यदि बाजारों के आसपास रैलियां, धरने और प्रदर्शन होते हैं, तो ट्रैफिक जाम, रास्तों की बंदी, पुलिस प्रतिबंध और आवाजाही में बाधा के कारण ग्राहकों का बाजारों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। संगठन ने आशंका जताई थी कि इससे दुकानदारों, छोटे व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी वालों और बाजारों से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
इसी चिंता को लेकर CTI ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी को भी पत्र लिखकर अपील की थी कि दिवाली जैसे बड़े त्योहार के दौरान राजनीतिक प्रदर्शन न किए जाएं। संगठन ने यहां तक सुझाव दिया था कि यदि राजनीतिक दलों को आंदोलन और प्रदर्शन करना है तो वे भाई दूज के बाद ऐसा करें, ताकि त्योहारों के दौरान व्यापारिक गतिविधियां बाधित न हों।
CTI ने केवल राजनीतिक नेताओं को ही पत्र नहीं लिखा था, बल्कि दिल्ली पुलिस को भी पत्र लिखकर त्योहारी सीजन के दौरान प्रस्तावित प्रदर्शनों को अनुमति नहीं देने की अपील की थी। संगठन की दलील थी कि दिल्ली के प्रमुख बाजारों में पहले ही त्योहारों के कारण भारी भीड़ रहती है। ऐसे में यदि राजनीतिक प्रदर्शन और रैलियां भी आयोजित होती हैं तो कानून-व्यवस्था संभालने के साथ-साथ ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
CTI की ओर से यह भी कहा गया था कि व्यापारियों को पूरे साल दिवाली के सीजन का इंतजार रहता है। दुकानदार इस अवधि के लिए महीनों पहले से माल मंगाते हैं, अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था करते हैं और अपनी पूंजी बाजार में लगाते हैं। ऐसे में ऐन त्योहार के समय व्यापारिक गतिविधियों पर किसी भी प्रकार की बाधा कारोबार को प्रभावित कर सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम में एक तरफ विपक्ष का राजनीतिक आंदोलन था तो दूसरी तरफ व्यापारिक संगठनों की ओर से बाजारों को प्रदर्शन से दूर रखने की अपील। लेकिन अब दिवाली कारोबार के जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने इस बहस में एक नया पहलू जोड़ दिया है।
CAT की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, दिल्ली में इस बार दिवाली से संबंधित कारोबार एक लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है। वहीं पिछले साल यह कारोबार लगभग 80 हजार करोड़ रुपये बताया गया था। इस लिहाज से दिल्ली के व्यापार में करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का दावा किया जा रहा है।
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझने की जरूरत है। CTI ने जहां संभावित नुकसान की आशंका जताई थी, वहीं CAT अब वास्तविक त्योहारी खरीदारी के आधार पर कारोबार में बढ़ोतरी का दावा कर रहा है। दोनों संगठनों के आकलन का समय और संदर्भ अलग-अलग हैं। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रदर्शनों का व्यापार पर कोई असर ही नहीं पड़ा। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि राजनीतिक प्रदर्शनों से भारी नुकसान की आशंका के बीच दिल्ली के बाजारों में कुल कारोबार पिछले साल से अधिक रहा है।
यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू है। क्या दिल्ली के ग्राहकों ने राजनीतिक गतिविधियों से अलग रखी अपनी खरीदारी? दिवाली के दौरान दिल्ली के बाजारों में उमड़ी भीड़ को लेकर CAT ने व्यापारियों की ओर से नागरिकों का आभार जताया है। संगठन का कहना है कि दिल्लीवासियों ने त्योहारों की खरीदारी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और बाजारों में पहुंचकर व्यापारियों का मनोबल बढ़ाया।
CAT के राष्ट्रीय महामंत्री एवं सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने इसे 'धन्यवाद दिल्ली' का नाम दिया है।उनका कहना है कि दिल्ली के लोगों ने यह साबित किया है कि त्योहारों की खुशियां, व्यापारिक गतिविधियां और रोजगार किसी राजनीतिक व्यवधान के कारण रुकने नहीं चाहिए।
CAT ने अपने बयान में राहुल गांधी की 1 नवंबर की रैली और पिछले एक महीने से दिल्ली में चल रहे धरनों, प्रदर्शनों तथा आंदोलनों का भी उल्लेख किया है। संगठन का कहना है कि इन गतिविधियों के कारण व्यापारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन दिवाली की खरीदारी ने बाजारों में नई ऊर्जा पैदा की है।
CAT ने राजनीतिक प्रदर्शनों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि लोकतंत्र में विरोध और प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, लेकिन इसकी वजह से आम नागरिकों की आवाजाही और व्यापारियों की आजीविका प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
हालांकि, इस पूरे मामले में एक संतुलित सवाल भी जरूरी है कि क्या बाजारों में कुल कारोबार बढ़ने का मतलब यह है कि किसी भी बाजार या कारोबारी वर्ग को प्रदर्शन के कारण नुकसान नहीं हुआ? ऐसा जरूरी नहीं है। कुल कारोबार का बढ़ना और कुछ इलाकों या दुकानदारों का नुकसान उठाना, दोनों बातें एक साथ संभव हैं।
इस बार दिवाली की खरीदारी में लगभग हर प्रमुख कारोबारी श्रेणी में ग्राहकों का उत्साह देखने का दावा किया गया है। सोना, चांदी और आभूषणों की दुकानों पर ग्राहकों की अच्छी आवाजाही रही। सोने के आभूषण, चांदी के सिक्के, मूर्तियां और हल्के वजन के गहनों की मांग रही।इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों के बाजार में मोबाइल फोन, एलईडी टीवी, रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन, एयर कंडीशनर और अन्य उत्पादों की खरीदारी हुई।
कपड़ों और फैशन से जुड़े बाजारों में साड़ियां, सूट, कुर्ते, रेडीमेड गारमेंट्स, बच्चों के कपड़े और पारंपरिक परिधानों की मांग रही। दिवाली के पारंपरिक बाजार में मिट्टी के दीये, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, पूजा की थालियां, बंदनवार, रंगोली, मोमबत्तियां और सजावटी लाइटिंग की बिक्री ने भी कारोबार को गति दी।
मिठाई, ड्राई फ्रूट्स, नमकीन, चॉकलेट और गिफ्ट पैक की दुकानों पर भी ग्राहकों की आवाजाही रही। इसके अलावा फर्नीचर, किचनवेयर, बर्तन, होम डेकोर, खिलौने, कॉरपोरेट गिफ्ट और हस्तशिल्प उत्पादों की खरीदारी भी हुई।
ऑटोमोबाइल सेक्टर में कारों, स्कूटरों, मोटरसाइकिलों और व्यावसायिक वाहनों की खरीदारी ने भी त्योहारी मांग को सहारा दिया। यानी दिवाली का कारोबार केवल पारंपरिक बाजारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, फैशन, घरेलू साज-सज्जा और सेवा क्षेत्र तक व्यापक आर्थिक गतिविधियां पैदा कीं।
इस बार के कारोबार में एक और महत्वपूर्ण पहलू भारतीय उत्पादों की बढ़ती मांग को बताया जा रहा है। CAT का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल', 'आत्मनिर्भर भारत' और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने के आह्वान का बाजारों में व्यापक प्रभाव दिखाई दे रहा है। भारतीय कारीगरों, छोटे निर्माताओं, स्थानीय उद्यमियों और महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को ग्राहक प्राथमिकता दे रहे हैं।
खादी, हथकरघा, मिट्टी के दीये, हस्तनिर्मित सजावटी सामान, स्थानीय खिलौने और पारंपरिक उपहार सामग्री जैसे उत्पादों को बाजार में समर्थन मिल रहा है। इसका सीधा लाभ उन छोटे उत्पादकों और कारीगरों को मिलता है, जिनके लिए त्योहारों का सीजन सालाना आय का एक बड़ा अवसर होता है।
हालांकि, स्वदेशी उत्पादों की मांग में वास्तविक बढ़ोतरी का आकलन करने के लिए अलग-अलग उत्पाद श्रेणियों के बिक्री आंकड़ों की जरूरत होगी, लेकिन CAT का दावा है कि इस बार बाजारों में भारतीय उत्पादों के प्रति ग्राहकों का रुझान स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है।
दिवाली के दौरान होने वाला कारोबार केवल दुकानों की बिक्री तक सीमित नहीं होता। इसके पीछे एक पूरी आर्थिक व्यवस्था काम करती है। एक दुकान पर बिक्री बढ़ने का मतलब है कि थोक व्यापारियों से अधिक माल खरीदा जाएगा। माल की आवाजाही बढ़ेगी तो ट्रांसपोर्ट कंपनियों को काम मिलेगा। पैकेजिंग उद्योग की मांग बढ़ेगी। गोदामों में काम करने वाले कर्मचारियों, डिलीवरी कर्मियों, लोडिंग-अनलोडिंग करने वाले मजदूरों और छोटे निर्माताओं को भी रोजगार मिलेगा।
रेहड़ी-पटरी वालों, फूल विक्रेताओं, दीये बनाने वाले कुम्हारों, मिठाई कारोबारियों, दर्जियों, छोटे दुकानदारों और महिला उद्यमियों के लिए भी त्योहारों का सीजन बेहद महत्वपूर्ण होता है।इसलिए दिवाली कारोबार में बढ़ोतरी का असर केवल बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक नहीं पहुंचता, बल्कि इसका लाभ अर्थव्यवस्था के निचले स्तर तक जाता है।
CAT का भी कहना है कि इस बार के त्योहारी कारोबार से छोटे और मझोले व्यापारियों, दिहाड़ी मजदूरों, लघु एवं कुटीर उद्योगों, महिला उद्यमियों, कारीगरों, परिवहन कारोबारियों, लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी सेवाओं से जुड़े लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ हुआ है।
इस पूरे घटनाक्रम को तीन अलग-अलग स्तरों पर समझने की जरूरत है।
पहला
CTI ने दिवाली से पहले राजनीतिक प्रदर्शनों को लेकर व्यापारिक नुकसान की आशंका जताई थी। यह व्यापारियों की एक संभावित चिंता थी, जिसका आधार त्योहारों के दौरान बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर था।
दूसरा
CAT ने दिवाली के बाद कारोबार में रिकॉर्ड बढ़ोतरी का आंकडा जारी किया है। दिल्ली में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक और देशभर में छह लाख करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होने की बात कही गई है।
इन दोनों बातों को एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत मान लेना भी सही नहीं होगा। किसी शहर का कुल कारोबार बढ़ सकता है, लेकिन कुछ बाजारों को प्रदर्शन, ट्रैफिक प्रतिबंध या अन्य कारणों से नुकसान भी हो सकता है। इसी तरह यह भी संभव है कि ग्राहकों ने राजनीतिक गतिविधियों के बावजूद अपनी खरीदारी जारी रखी हो।
इसलिए असली तस्वीर समझने के लिए बाजारवार बिक्री, पिछले साल के मुकाबले वास्तविक वृद्धि, व्यापारिक प्रतिष्ठानों की बिक्री और अलग-अलग कारोबारी क्षेत्रों के आंकड़ों का विश्लेषण जरूरी होगा। फिर भी एक बात साफ है कि दिल्ली के व्यापारिक बाजारों ने इस बार त्योहारों के दौरान अपनी मजबूत कारोबारी क्षमता दिखाई है।
CAT का कहना है कि दिवाली के बाद भी बाजारों में खरीदारी की गतिविधियां जारी रहेंगी। अन्नकूट, भैया दूज, छठ पूजा, तुलसी विवाह और 24 नवंबर को गुरु नानक जयंती तक बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बनी रहने की उम्मीद है।
त्योहारों का यह सिलसिला मिठाई, कपड़े, पूजा सामग्री, उपहार, घरेलू सामान और अन्य उत्पादों की मांग को बनाए रखेगा। संगठन ने दिल्लीवासियों से अपील की है कि वे आने वाले त्योहारों में भी स्थानीय बाजारों से खरीदारी करें और भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दें।
दिल्ली के इस पूरे घटनाक्रम से एक बड़ा संदेश निकलता है। राजनीतिक दलों के लिए विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार हैं, लेकिन व्यापारियों के लिए त्योहारों का सीजन साल भर की कमाई और रोजगार का बड़ा आधार होता है।
CTI ने दिवाली से पहले इसी चिंता को लेकर राहुल गांधी, सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस तक से अपील की थी कि त्योहारों के दौरान बाजारों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखा जाए।
वहीं, CAT ने अब दिवाली कारोबार के एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचने का आंकडा पेश करते हुए दिल्ली की जनता का धन्यवाद किया है। पिछले साल के 80 हजार करोड़ रुपये के मुकाबले इस बार 20 हजार करोड़ रुपये अधिक कारोबार हुआ है।