अखिलेश यादव (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Women’s Reservation Bill Debate: सपा प्रमुख और कन्नौज से लोकसभा सांसद अखिलेश यादव ने बिल पर चर्चा के दौरान सरकार पर जल्दबाजी का भी आरोप लगाया। उन्होनें कहा कि अगर जनगणना कराई जाए और जाति गणना भी सामने आए, तो उसके आधार पर आरक्षण की मांग भी उठेगी इसलिए सरकार इससे बचना चाह रही है। इस दौरान यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर सवाल दागते हुए कहा कि क्या मुस्लिम महिलाएं आधी आबादी का हिस्सा नहीं हैं। इस पर गृहमंत्री अमित शाह ने तंज कसा और कहा कि समाजवादी पार्टी चाहे तो सभी टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है, इसमें उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
सांसद अखिलेश यादव ने अपने एक्स हैडल पर पोस्ट में कहा कि, सच तो ये है कि भाजपा जनगणना को टालना चाहती है क्योंकि जनगणना होगी तो जातिगत जनगणना की भी बात उठेगी और फिर आरक्षण की भी। जो भाजपा और उनके संगी साथी कभी भी देना नहीं चाहते हैं। भाजपा को ये भी अच्छी तरह याद है कि पीडीए में ए का मतलब आधी आबादी अर्थात् महिला भी है। ये बिल पीडीए का हक अधिकार मारने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा है।
इस दौरान अखिलेश यादव ने भाजपा पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि, एक बड़ा चुनावी सच ये भी है कि भाजपा की चुनावी घपलेबाजी का अब पूरी तरह से भंडाफोड़ हो गया है। पीडीए प्रहरी एक विचार की तरह हर प्रदेश और हर दल ने स्वीकार कर लिया है। भाजपा पर चौकन्नी नजर रखी जा रही है। इसीलिए अब भाजपा को चुनावी हेराफेरी का कोई और मौका आसानी से नहीं मिलेगा और सच्चे वोट ही चुनाव का सच्चा नतीजा तय करेंगे। अब हर तरह से भाजपा की कलई खुल गयी है। इसीलिए उसके समर्थक और वोटरों का अकाल पड़ गया है। भाजपा निराशा के इस दौर से उबरने के लिए ये बिल ला रही है।
महिलाओं की स्थिति पर बात करते हुए सपा प्रमुख ने बताया कि, भाजपा की यही राजनीतिक चाल रहती है। जब पुराने लोग ये समझ जाते हैं कि भाजपा किसी की सगी नहीं है तो हर बार भाजपा कुछ नये लोगों को अपने लुभावने जुमलों में फँसाती है। इस बार भाजपा महिलाओं को लेकर ये पुरानी चाल चल रही है लेकिन सफल नहीं होगी क्योंकि भाजपा राज में सबसे ज्यादा दुखी तो महिलाएं ही हैं। भाजपा की कमीशनखोरी व चंदा वसूली की वजह से जो महंगाई बढ़ी है उससे उनकी रसोई सूनी हो गयी है। रही सही कसर सिलेंडर की बेतहाशा बढ़ती कीमतों ने पूरी कर दी है।
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हर महिला अपने बच्चों को पढ़ाना चाहती है लेकिन भाजपा की शिक्षा विरोधी सोच तो सरकारी स्कूल तक बंद करवा दे रही है। महिलाओं का दर्द क्या होता है ये मेरठ के दुकानदारों के परिवार की महिलाओं की आँखों में आए आँसू भी बयां कर रहे हैं और नोएडा की मजदूर और मेड के रूँधे गले के बयान भी। अगर ये बिल इतना ही सही है तो इसे मेरठ नोएडा की पारिवारिक और कामगार महिलाओं के बीच बैठकर घोषित किया जाए।