

गोबरा नवापारा में दो नोटिस के बाद भी निर्माण जारी।
स्वीकृत नक्शे के विपरीत अवैध भवन निर्माण का लगा आरोप।
स्थानीय लोगों ने स्कूल की जमीन पर बताया अवैध कब्जा।
सीएमओ को सूचना देने के बाद भी कार्रवाई का इंतजार।
राजनीतिक प्रभाव के कारण प्रशासनिक लापरवाही की चर्चा गरम है।
Gobra Navapara School Land Encroachment Controversy Notice : गोबरा नवापारा के वार्ड क्रमांक बीस के शीतलापारा में अवैध निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। नगर पालिका ने दो बार नोटिस जारी किया लेकिन निर्माण कार्य नहीं रुका है।
आरोप है कि यह जमीन स्कूल की है और इस पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि राजनीतिक प्रभाव के कारण प्रशासन कार्रवाई से बच रहा है। सीएमओ को जानकारी मिलने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
गोबरा नवापारा के वार्ड क्रमांक बीस के शीतलापारा में चल रहा भवन निर्माण विवादों में घिर गया है। नगर पालिका परिषद ने इस मामले में दो बार नोटिस जारी किया है। इसके बावजूद निर्माण कार्य लगातार आगे बढ़ रहा है।
स्वीकृत नक्शे और नियमों के खिलाफ हो रहे इस निर्माण ने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर पालिका ने योगिता सिन्हा और खेलावन राम सिन्हा को दूसरा नोटिस भेजा है। इसमें सात दिन के भीतर दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्थानीय स्तर पर यह गंभीर आरोप लगाया जा रहा है कि यह जमीन स्कूल की है। स्कूल की जमीन पर अवैध कब्जे की चर्चा पूरे इलाके में तेजी से फैल रही है।
हालांकि, इस बात की आधिकारिक पुष्टि राजस्व अभिलेखों की जांच के बाद ही संभव है। यदि जमीन वाकई स्कूल की है, तो बड़ा सवाल यह है कि निर्माण किसकी अनुमति से हो रहा है।
चर्चा है कि निर्माण करने वाले लोग राजनीतिक रूप से काफी प्रभावशाली हैं। निर्माणकर्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े बताए जा रहे हैं। उनकी पत्नी भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी की सदस्य हैं।
इस राजनीतिक कनेक्शन के कारण प्रशासन पर कार्रवाई न करने का दबाव होने का अंदेशा जताया जा रहा है। हालांकि, इन बातों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन को इस मामले में अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए।
नगर पालिका सीएमओ लवकेश पैकरा को इस मामले की पूरी जानकारी दी गई थी। इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई जमीन पर नजर नहीं आई है।
पहले सीएमओ ने राजस्व निरीक्षक निखिल चंद्राकर को मौके पर भेजा था। आरआई ने निरीक्षण के दौरान काम बंद होने की बात कही थी। सवाल यह है कि काम बंद होने के बाद दीवारें कैसे खड़ी हो गईं।
अब सिर्फ नोटिस देने से काम नहीं चलेगा बल्कि उसका कड़ाई से पालन होना जरूरी है। यदि निर्माण नियमों के खिलाफ है तो उसे तुरंत रोका जाना चाहिए।
प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर भूमि के असली मालिक की सच्चाई सामने लानी चाहिए। जनता चाहती है कि स्कूल की जमीन को सुरक्षित बचाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं।