

छत्तीसगढ़ विधानसभा के सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग की गई है।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखा है।
उन्होंने कहा कि सदन में मूलभूत समस्याओं पर पर्याप्त चर्चा होनी चाहिए।
सीमित कार्यदिवस के कारण कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा छूट जाती है।
जनता की आवाज को मजबूती देने के लिए सत्र लंबा होना जरूरी है।
Chhattisgarh Vidhan Sabha Session Extension : छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा मुद्दा गरमाया हुआ है। विधानसभा सत्र की अवधि और बैठकों की संख्या बढ़ाने की मांग जोर पकड़ रही है। नेता प्रतिपक्ष ने इस मामले को लेकर सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र सौंपा है। यह पत्र तीन पन्नों का है। इसमें उन्होंने आगामी विधानसभा सत्रों की अवधि बढ़ाने का आग्रह किया है।
उनका कहना है कि प्रदेश की मूलभूत समस्याओं पर सार्थक संवाद बेहद जरूरी है। इसके लिए सदन को पर्याप्त समय मिलना चाहिए। विधानसभा सिर्फ कानून पास करने का मंच नहीं है।
यह करोड़ों लोगों की उम्मीदों की आवाज है। जनता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए इस सर्वोच्च संस्था की तरफ देखती है।
पत्र में प्रदेश की कई गंभीर चुनौतियों का जिक्र किया गया है। इनमें किसानों की परेशानियां और बिजली संकट शामिल हैं। इसके अलावा बिगड़ती कानून व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया गया है।
जर्जर सड़कें और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक है। शिक्षा सेवाओं की चुनौतियां भी लगातार बढ़ रही हैं। अधोसंरचना विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है।
इन तमाम मुद्दों पर दलगत राजनीति से ऊपर उठना होगा। सभी को मिलकर विस्तृत चर्चा और ठोस निर्णय लेने की आवश्यकता है।
नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक पिछले सत्रों के अनुभव अच्छे नहीं रहे हैं। सत्र की अवधि सीमित होने के कारण कई जरूरी विषय छूट जाते हैं। संवेदनशील विषयों पर पर्याप्त चर्चा का मौका नहीं मिलता है।
विपक्ष को जनसमस्याएं विस्तार से उठाने का अवसर नहीं मिल पाता। ध्यानाकर्षण और शून्यकाल की कई सूचनाएं बिना चर्चा के रह जाती हैं। इससे जनता की आवाज पूरी तरह सदन में नहीं गूंज पाती।
पत्र में एक बड़ी चेतावनी भी दी गई है। जब लोकतांत्रिक मंचों पर बात नहीं सुनी जाती, तो समस्याएं खत्म नहीं होतीं। वे सड़कों पर आंदोलन और धरने का रूप ले लेती हैं।
प्रदेश में स्कूली बच्चे भी अब सड़कों पर उतर रहे हैं। यह स्थिति पूरे छत्तीसगढ़ के लिए चिंता का विषय है। हालांकि विरोध जताना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार भी है।
महंत ने एक बेहतर व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया है। विधानसभा अध्यक्ष और कार्यमंत्रणा समिति के साथ चर्चा की जा सकती है। सभी दलों के नेताओं से विचार विमर्श करके फैसले लिए जाएं।
सत्र लंबा होने से सत्ता पक्ष को भी फायदा मिलेगा। सरकार को जमीनी हालात बेहतर तरीके से समझ में आएंगे। वहीं विपक्ष भी अपने तर्क मजबूत तथ्यों के साथ रख सकेगा।
लोकतंत्र की असली ताकत चुनाव तक सीमित नहीं होती है। निर्वाचित संस्थाओं में नियमित और गंभीर संवाद जरूरी है। इसी से लोकतंत्र की जड़ें मजबूत होती हैं।
मुख्यमंत्री से इस दिशा में सकारात्मक पहल की उम्मीद जताई गई है। अब देखना होगा कि सरकार इस मांग पर क्या कदम उठाती है।