

महादेव ऐप सरगना सौरभ चंद्राकर भारत लाया गया।
ओमान से प्रत्यर्पण के बाद रायपुर में पेशी।
6 हजार करोड़ के सट्टा सिंडिकेट का पर्दाफाश।
ओमान कोर्ट ने यूएई की अर्जी खारिज की।
रायपुर कोर्ट में पेशी से खुलेंगे कई राज।
Mahadev Betting App Case Saurabh Chandrakar Extradition : महादेव सट्टा ऐप मामले में बड़ी कामयाबी मिली है। जांच एजेंसियों की पकड़ से दूर सौरभ चंद्राकर भारत आ गया है। ओमान से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। 1 नवंबर को उसे भारतीय अधिकारियों को सौंपा गया था।
अब इस मामले का केंद्र छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर है। सौरभ चंद्राकर को आज रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। उसकी पेशी से इस हाईप्रोफाइल मामले में कई नए मोड़ आ सकते हैं। इस नेटवर्क ने देश भर में बड़ी हलचल मचाई थी।
यह पूरा मामला करीब 6 हजार करोड़ रुपये का माना जा रहा है। जांच एजेंसियों ने कई अहम दस्तावेज जुटाए हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) दो आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी अपनी शिकायत दर्ज की है।
सौरभ की भारत वापसी जांच के लिए बेहद जरूरी थी। अब भारतीय एजेंसियां उससे सीधे पूछताछ कर सकेंगी। उसकी गिरफ्तारी के बाद जांच की दिशा में नए तथ्य सामने आ सकते हैं।
सौरभ चंद्राकर को भारत लाना आसान काम नहीं था। भारत के अलावा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी मांग की थी। ओमान की मस्कट कोर्ट ऑफ अपील ने 8 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाया। अदालत ने भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध को प्राथमिकता दी। अदालत के फैसले में कई बातें साफ हुईं। भारत ने 12 जुलाई को प्रत्यर्पण की याचिका दाखिल की थी।
यूएई की याचिका 14 जुलाई को ओमान पहुंची थी। भारतीय दूतावास ने 30 अगस्त को उसकी नागरिकता की पुष्टि की थी। सौरभ ने वानुअतु की नागरिकता लेने का दावा किया था। लेकिन अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया।
भारत ने ओमान को कानूनी आश्वासन दिए थे। सौरभ पर पुराने मामलों में मुकदमा नहीं चलेगा। ओमान की अनुमति के बिना उसे किसी तीसरे देश को नहीं सौंपा जाएगा। उसे निष्पक्ष सुनवाई का पूरा अवसर मिलेगा।
यूएई की तरफ से जरूरी आश्वासन नहीं दिए गए थे। इसलिए ओमान की अदालत ने भारत के पक्ष में फैसला दिया। ओमान में फर्जी दस्तावेजों के मामले के कारण थोड़ी देरी हुई। इसके बाद 1 नवंबर को उसे भारत लाया गया।
सौरभ की वापसी के बाद कई अनसुलझे सवाल सामने हैं। महादेव सट्टा ऐप का पूरा नेटवर्क कैसे चलता था ? इस कारोबार में कौन-कौन लोग शामिल थे? पैसों का लेन-देन किस रास्ते से होता था? विदेशों में बनी कंपनियों की क्या भूमिका थी? इस सिंडिकेट को किन लोगों का संरक्षण मिला था? आज रायपुर कोर्ट में सीबीआई (CBI) रिमांड की मांग कर सकती है। आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।