

पहचान छिपाने अजंता मेंडिस के नाम का किया इस्तेमाल।
फर्जी पासपोर्ट के जरिए ओमान में किया था एंट्री।
इंडोनेशियाई पासपोर्ट में फोटो सौरभ चन्द्राकर की तस्वीर लगी थी।
इसी पासपोर्ट के आधार पर ओमान में पकड़ाया।
Mahadev Satta App Promoter Sourabh Chandrakar Fake Passport: महादेव ऑनलाइन सट्टा किंग आरोपी सौरभ चंद्राकर ने अपनी पहचान छिपाने के लिए अजंता मेंडिस के नाम का इस्तेमाल किया। पुलिस ने सौरभ के पास से इंडोनेशिया में जारी फर्जी पासपोर्ट बरामद किया है। आरोपी ने अंग्रेजी के एच अक्षर में हेराफेरी कर इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में एंट्री किया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, सौरभ ने इस फर्जी पहचान के जरिए अपनी असली पहचान छिपाकर विदेश में रहने की कोशिश की थी। इसी पासपोर्ट के आधार पर जुलाई में ओमान में उसे हिरासत में लिया गया था।
महादेव सट्टा ऐप का संचालक सौरभ चन्द्राकर अंग्रेजी के एच अक्षर में हेराफेरी कर इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में एंट्री करते पकड़ा गया। उसके पास बरामद पासपोर्ट में फोटो और नाम के साथ ही जन्मतिथियों में अलग-अलग जानकारियां मिली है। बताया जाता है कि उसके इंडोनेशियाई पासपोर्ट में फोटो सौरभ चन्द्राकर की तस्वीर लगी थी। लेकिन उसमें श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर अजन्ता मेंडिस (Ajantha Mendis) के स्थान पर एच अक्षर हटाकर (Ajanta Mendis) किया गया है, इसमें (सौरभ की फोटो वाले) 21 जून 2024 को जारी किया गया पासपोर्ट क्रमांक E3387986 21 जून 2034 तक 10 साल के लिए वैलिड दिखाया गया है।
CBI के मुताबिक, महादेव सट्टा नेटवर्क की जांच शुरू होने के बाद से ही सौरभ चंद्राकर फरार था। वह 2023 से दुबई में रह रहा था और उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी था। करीब 116 दिन के बाद सीबीआई को सफलता मिली। आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने कथित तौर पर फर्जी पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और UAE से ओमान पहुंच गया।
खुफिया जानकारी और रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर 8 जुलाई 2026 को ओमान की रॉयल पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। इसके बाद CBI और ED ने भारत सरकार के जरिए ओमान को प्रत्यर्पण का औपचारिक प्रस्ताव भेजा और सबूत सौंपे। भारत सरकार की एजेंसियों, इंटरपोल और ओमान के अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद प्रत्यर्पण को मंजूरी मिली। इसके बाद CBI की टीम मस्कट पहुंची और 1 नवंबर को उसे भारत लेकर आई।
सीबीआई के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर के खिलाफ जारी रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर ओमान की रॉयल पुलिस ने उसे खोजकर हिरासत में लिया था। इसके बाद सीबीआई और ईडी ने ओमान सरकार के समक्ष औपचारिक प्रत्यर्पण प्रस्ताव प्रस्तुत किए। भारतीय एजेंसियों ने आरोपी के खिलाफ जुटाए गए साक्ष्य भी वहां के अधिकारियों के साथ साझा किए।
भारत सरकार की विभिन्न एजेंसियों, इंटरपोल के नेशनल सेंट्रल ब्यूरो और ओमान के संबंधित अधिकारियों के बीच समन्वय के बाद प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी हुई। इसके पश्चात सीबीआई की विशेष टीम ओमान पहुंची और सौरभ चंद्राकर को भारत लेकर आई।
जांच एजेंसी के अनुसार, छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े मामलों की जांच अपने हाथ में ली थी। जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क भारत से बाहर संचालित होने वाले बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट में शामिल था।
इस नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेल और अन्य आयोजनों पर अवैध सट्टेबाजी कराई जाती थी। इसके लिए देशभर में फ्रेंचाइजी पैनल और शाखाओं का नेटवर्क फैलाया गया था, जिसके माध्यम से उपयोगकर्ताओं को जोड़ा जाता और उनसे सट्टे की रकम एकत्र की जाती थी।