

डॉ. राकेश गुप्ता ने मंत्रालय में हुई 100 बैठकों को लेकर किया सवाल।
RDA की नगर विकास योजनाओं पर विवाद।
सुनवाई से पहले डॉ. गुप्ता ने मांगा जवाब।
Raipur RDA Plot Dispute: रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) की लाभांडी, कचना और सद्दू नगर विकास योजनाओं में अंतिम भूखंडों के आवंटन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ईएनटी विशेषज्ञ एवं समाजसेवी डॉ. राकेश गुप्ता ने आरोप लगाया है कि कुछ भू-स्वामियों को उनकी मूल भूमि से दूर प्रीमियम प्लॉट आवंटित किए गए हैं। उन्होंने दावा-आपत्तियों की सुनवाई से पहले इन आवंटनों का कानूनी आधार और संबंधित विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।
डॉ. गुप्ता के अनुसार, छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 50(3)(ii)(f) और 50(3)(ii)(g) के प्रावधान इस विवाद के केंद्र में हैं। उनका कहना है कि अंग्रेजी पाठ में ‘Adjoining Lands’ यानी लगी हुई या सटी हुई भूमि पर अंतिम भूखंड देने का प्रावधान है, जबकि हिंदी पाठ में ‘आस-पास के किसी भूखंड’ शब्दों का उल्लेख है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अंतर की आड़ में मूल भूमि से दूर भूखंड आवंटित किए गए।
डॉ. गुप्ता ने प्रभावशाली मंत्री की पत्नी की कंपनी को बलौदाबाजार रोड के व्यावसायिक क्षेत्र के पास प्रस्तावित अंतिम भूखंड क्रमांक 25 सहित प्लॉट नंबर 26, 31, 63 और 69 के आवंटन पर सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, कुछ भूखंड मूल भूमि से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित हैं। उन्होंने पूछा कि 4.5 किलोमीटर लंबी योजना में इतनी दूरी को किस आधार पर ‘आस-पास’ माना गया।
डॉ. गुप्ता ने संविधान के अनुच्छेद 14 का हवाला देते हुए कहा कि सभी भू-स्वामियों के साथ समान मानदंड अपनाए जाने चाहिए। उन्होंने मंत्रालय में कथित तौर पर हुई लंबी बैठकों के संबंध में भी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि उन्होंने स्वयं भी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने RDA से मांग की कि सुनवाई से पहले बताया जाए कि मूल भूमि से दूर कितने भूखंड आवंटित किए गए, किनके निर्देश पर और किस कानूनी आधार पर ऐसा किया गया। उनका कहना है कि सुनवाई महज औपचारिकता न बने, बल्कि सभी सवालों के जवाब अभिलेखों के आधार पर दिए जाएं। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने योजना निरस्त करने की मांग की है।