

Chhattisgarh Flood Relief Amount Demand : छत्तीसगढ़ में भारी बारिश से कई इलाकों में बाढ़ आ गई है। घरों और खेतों में पानी भरने से भारी नुकसान हुआ है। बस्तर के पीड़ितों को 10 हजार रुपये राहत की घोषणा हुई है। पूर्व मंत्री धनेन्द्र साहू ने अन्य जिलों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूरे राज्य के लिए समान राहत पैकेज की मांग की है।
छत्तीसगढ़ में मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। कई नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ गया है। बांधों से पानी छोड़े जाने से हालात बेकाबू हो गए हैं। कई जिलों के दर्जनों गांव पानी में डूब चुके हैं।
घरों के भीतर पानी घुसने से लोग परेशान हैं। अनाज और कपड़े पूरी तरह खराब हो चुके हैं। जरूरी कागजात भी पानी की भेंट चढ़ गए हैं। जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर चुका है।
लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। बुनियादी सुविधाओं के लिए मारामारी मची हुई है। संकट की इस घड़ी में मदद की दरकार है।
बस्तर में अतिवृष्टि प्रभावितों के लिए आर्थिक मदद की घोषणा हुई है। राज्य सरकार ने प्रत्येक परिवार को 10 हजार रुपये देने को कहा है। इस घोषणा के बाद राजनीति भी शुरू हो गई है। पूर्व मंत्री धनेन्द्र साहू ने सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि बाकी जिलों के पीड़ितों के लिए क्या योजना है?
धनेन्द्र साहू ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सीधा जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि आपदा में जिलों के बीच फर्क नहीं होना चाहिए। पूरे छत्तीसगढ़ के बाढ़ पीड़ितों को समान राहत मिलनी चाहिए। हर पात्र परिवार को तत्काल 10 हजार रुपये मिलने चाहिए।
नदियों के किनारे बसे गांवों में ज्यादा तबाही हुई है। खेतों में कई फीट तक पानी भर चुका है। धान की तैयार फसलें पानी में डूब गई हैं। किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया है। उन्होंने कर्ज लेकर खेतों में पूंजी लगाई थी। अब उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा है।
केवल खोखले आश्वासनों से किसानों का पेट नहीं भरेगा। उन्हें वास्तविक नुकसान के आधार पर आर्थिक मुआवजा चाहिए। फसल नुकसान का सटीक आकलन होना बेहद जरूरी है। इसके बिना कोई भी राहत अधूरी साबित होगी।
धनेन्द्र साहू ने पारदर्शी सर्वे कराने की पुरजोर मांग की है। यह सर्वे केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम बनाई जानी चाहिए। यह टीम हर प्रभावित गांव का दौरा करे।
अधिकारी हर घर और खेत का हिसाब दर्ज करें। किसी भी पीड़ित का नाम सूची से छूटना नहीं चाहिए। मकान, सामान और फसल के नुकसान का अलग लेखा-जोखा बने। प्रचलित नियमों के तहत तुरंत मुआवजा राशि जारी की जाए।
प्राकृतिक आपदा किसी जिले की सीमा देखकर नहीं आती है। नुकसान जब पूरे प्रदेश में हुआ है तो राहत भी समान हो। धनेन्द्र साहू ने सरकार से चार प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, सभी पात्र परिवारों को तुरंत 10 हजार रुपये दिए जाएं।
दूसरी, मकान और घरेलू सामान के नुकसान का तत्काल सर्वे हो। तीसरी, कृषि और राजस्व विभाग का संयुक्त सर्वे हो। चौथी, फसल बर्बादी पर किसानों को उचित क्षतिपूर्ति मिले। राहत वितरण की प्रक्रिया में कोई भी पीड़ित छूटने न पाए।
आपदा प्रबंधन का काम कागजी कार्यवाहियों से नहीं चलता। पीड़ितों तक सीधी आर्थिक मदद समय पर पहुंचनी चाहिए। सरकार को बिना देरी किए स्पष्ट कार्ययोजना घोषित करनी चाहिए। तभी प्रभावित परिवारों को इस संकट से उबारा जा सकेगा।