

बिलासपुर में हवाई सुविधाओं की मांग को लेकर आंदोलन के 7 साल पूरे।
हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति ने निकाला अनोखा उल्टा मार्च।
राघवेंद्र राव सभा भवन स्थित महाधरना स्थल से कलेक्ट्रेट तक निकाली रैली।
बिलासपुर एयरपोर्ट के पूर्ण विकास और महानगरों के लिए सीधी उड़ानों की मांग।
Protest For Air Connectivity In Bilaspur: छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में हवाई सुविधाओं के विस्तार की मांग को लेकर हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति ने सोमवार को उल्टा मार्च निकाला। आंदोलन के सात साल पूरे होने पर समिति के सदस्यों ने राघवेंद्र राव सभा भवन स्थित महाधरना स्थल से कलेक्टोरेट तक उल्टा मार्च कर सरकार और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की। इस दौरान प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर बिलासपुर एयरपोर्ट को पूर्ण विकसित करने और महानगरों के लिए सीधी उड़ानें शुरू करने की मांग की गई।
समिति का कहना है कि सात साल के लंबे संघर्ष के बाद भी बिलासपुर को अपेक्षित हवाई सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। आंदोलनकारियों ने एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में विकसित करने, रनवे का विस्तार करने और दिल्ली सहित देश के चार प्रमुख महानगरों से सीधी हवाई कनेक्टिविटी देने की मांग दोहराई।
समिति के सदस्यों के मुताबिक, बिलासपुर एयरपोर्ट का मौजूदा रनवे करीब 1,500 मीटर का है। इसे बढ़ाकर लगभग 2,200 से 2,400 मीटर करने की जरूरत है, ताकि बड़े विमानों के संचालन की संभावनाएं बढ़ सकें। समिति का कहना है कि रनवे विस्तार और जरूरी बुनियादी सुविधाएं विकसित होने के बाद ही एयरपोर्ट को 4C श्रेणी का लाइसेंस मिल सकेगा।
समिति के सदस्य रणजीत सिंह कनुजा ने कहा कि बिलासपुर में हवाई सुविधाओं के विस्तार के लिए लंबे समय से आंदोलन किया जा रहा है, लेकिन अब तक मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि बिलासपुर की उपेक्षा की जा रही है। उनके मुताबिक, राज्य सरकार और उड्डयन विभाग इच्छाशक्ति दिखाएं तो एयरपोर्ट के विकास के लिए जरूरी बजट उपलब्ध कराया जा सकता है।
समिति ने बिलासपुर से संचालित हवाई सेवाओं को लेकर भी चिंता जताई। उसका दावा है कि दिल्ली की उड़ान पहले सप्ताह में सात दिन संचालित होती थी, जो अब चार दिन रह गई है। वहीं, प्रयागराज की उड़ान भी सप्ताह में चार दिन से घटकर एक दिन होने की बात कही गई है। समिति ने जबलपुर, भोपाल और इंदौर की उड़ानें बंद होने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि नई उड़ानें शुरू करने के बजाय उपलब्ध सेवाओं में कटौती से यात्रियों को परेशानी हो रही है।
समिति के सदस्यों ने कोलकाता उड़ान का उदाहरण देते हुए कहा कि बिलासपुर से इस रूट पर यात्रियों को अच्छा प्रतिसाद मिलने के बावजूद सेवा के संचालन में बदलाव किए गए। समिति ने हवाई सेवाओं की स्थिति की समीक्षा कर नियमित और उपयोगी उड़ानें उपलब्ध कराने की मांग की।
समिति के अनुसार, पिछले सात वर्षों में जिले और संभाग के करीब 400 संगठनों ने अलग-अलग समय पर आंदोलन में भागीदारी की है। इससे पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी दो बार धरना दिया जा चुका है। समिति के सदस्यों ने बताया कि केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात और प्रधानमंत्री को ज्ञापन देने के बाद अब आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। समिति ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के घेराव सहित गांधीवादी तरीके से विरोध प्रदर्शन करने की योजना भी बनाई जा सकती है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि बिलासपुर को केवल नाम की न्यायधानी नहीं, बल्कि बेहतर हवाई कनेक्टिविटी और आधुनिक एयरपोर्ट की सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। समिति ने स्पष्ट किया कि जब तक रनवे विस्तार, 4C लाइसेंस और महानगरों के लिए सीधी उड़ानों जैसी प्रमुख मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।