

बस्तर में बाढ़ के बाद मुआवजे का मुद्दा अब बड़ा आंदोलन बन चुका है।
प्रभावित परिवार फसल बर्बादी, टूटे मकान और कर्ज से काफी परेशान हैं।
तीन दिनों से जगदलपुर में लगातार राजनीतिक और किसान प्रदर्शन हो रहे हैं।
प्रदर्शनकारी फसल नुकसान के सही आकलन और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
किसानों ने 65,100 रुपये प्रति एकड़ मुआवजे के लिए कलेक्ट्रेट घेरा।
Bastar Farmer Protest KCC Loan Waiver : छत्तीसगढ़ के बस्तर में बाढ़ से भारी तबाही मची है। खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी हैं। कई परिवारों के मकान बाढ़ के पानी में ढह गए हैं।
ग्रामीणों पर बैंक और समितियों का पुराना कर्ज भी बना हुआ है। सरकार से उचित राहत न मिलने से लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर साफ दिख रहा है।
चार नवंबर को बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी ने बड़ा प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एनएच-30 पर चक्काजाम कर दिया। आमागुड़ा चौक पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं।
नेताओं ने सरकार पर बाढ़ पीड़ितों की अनदेखी का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने केसीसी कर्ज माफ करने की मांग रखी। प्रशासन द्वारा दी जा रही सहायता राशि को नाकाफी बताया गया।
अगले दिन जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने मोर्चा संभाला। जेसीसी कार्यकर्ताओं ने चौपाटी से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च किया। उन्होंने भाजपा विधायक कार्यालय में ज्ञापन भी सौंपा।
बस्तर के लिए एक हजार करोड़ रुपये का विशेष राहत पैकेज मांगा गया। संगठन ने सरकार को मांगें पूरी करने के लिए तीस दिन का समय दिया है।
छह नवंबर को किसान खुद सीधे सड़कों पर उतर आए। बीकेयू (BKU – Bharatiya Kisan Union) के नेतृत्व में भारी ट्रैक्टर रैली निकाली गई। किसानों ने जगदलपुर कलेक्ट्रेट का जोरदार घेराव किया।
वे प्रति एकड़ 65,100 मुआवजे की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि नुकसान की भरपाई सही समर्थन मूल्य के आधार पर होनी चाहिए। साथ ही सभी सहकारी बैंकों के कृषि कर्ज माफ किए जाएं।
बाढ़ आए हुए एक महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है। इसके बावजूद राहत न मिलने से जनआक्रोश लगातार तेजी से बढ़ रहा है। तीनों बड़े प्रदर्शनों में नुकसान का उचित आकलन ही मुख्य मांग रही है।
अब देखना यह होगा कि शासन और प्रशासन इन मांगों पर क्या कदम उठाता है। किसानों की मांगें पूरी न होने पर यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है।