

Teachers TET Exemption Protest : पश्चिम बंगाल में लंबे समय से सेवा दे रहे करीब 90 हजार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से छूट देने की मांग तेज कर दी है। शिक्षकों के संगठन ने राज्य सरकार से केंद्र के सामने यह मुद्दा उठाने की अपील की है। मांग है कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त किए गए शिक्षकों को TET की अनिवार्य शर्त से छूट दी जाए।
शिक्षकों के अनुसार, इनमें से कई लोग 15 से 20 साल तक सेवा पूरी कर चुके हैं और लंबे समय से अपने पद पर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि इतने वर्षों की सेवा के बाद उन्हें अनिवार्य TET पास करने की शर्त में लाना उनकी नौकरी और सेवा लाभों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। शिक्षकों के संगठन ने इस मामले में पश्चिम बंगाल के स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से समाधान कराने की मांग की है।
TET को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तेज हुआ है। अदालत ने कहा है कि संबंधित स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य है। हालांकि, शिक्षकों को परीक्षा पास करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया गया है। पश्चिम बंगाल के शिक्षकों का कहना है कि कई ऐसे शिक्षक हैं, जिन्होंने TET आधारित भर्ती व्यवस्था लागू होने से पहले नियुक्ति पाई थी।
ऐसे शिक्षकों को अब परीक्षा पास करने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है। इसी मांग को लेकर शिक्षकों का संगठन आंदोलन तेज करने की तैयारी में है। संगठन के महासचिव स्वपन मंडल के मुताबिक, सितंबर से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की योजना है। शिक्षकों का कहना है कि वे राज्य और केंद्र सरकार से इस मामले में स्थायी समाधान चाहते हैं।
TET से छूट का मुद्दा अब केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। तमिलनाडु विधानसभा ने भी 25 अगस्त 2026 को 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से स्थायी छूट देने की मांग वाला प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया था। तमिलनाडु सरकार के अनुसार, राज्य में करीब 3.28 लाख सरकारी शिक्षक इस नियम से प्रभावित हो सकते हैं।
बंगाल के शिक्षक संगठन ने इसी उदाहरण का हवाला देते हुए अपने राज्य में भी ऐसी ही राहत की मांग की है। केंद्र सरकार पहले स्पष्ट कर चुकी है कि शिक्षकों की भर्ती और सेवा संबंधी जानकारी राज्यों के पास होती है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने TET को RTE कानून के तहत निर्धारित न्यूनतम योग्यता माना है। ऐसे में अब पश्चिम बंगाल के शिक्षकों की नजर राज्य और केंद्र सरकार के अगले कदम पर है।