Succes Story: इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ की UPSC तैयारी, पहले IPS फिर बने IAS अधिकारी, जानिए दीपांकर चौधरी की कहानी
जब किसी का लक्ष्य आसमान से भी ऊंचा होता है, तो वह नीचे गिरने से कमी नहीं डरता कुछ ऐसा ही लक्ष्य रखा था आईएएस अधिकारी दीपांकर चौधरी ने। आइए जानते है उनकी सफलता की कहानी।
- Written By: आकाश मसने
आईएएस अधिकारी दीपांकर चौधरी (सोर्स: सोशल मीडिया)
नवभारत डेस्क: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों की संख्या में एस्पिरेंट्स इस परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं। लेकिन कुछ ही उम्मीदवारों को इसमें सफलता मिलती है। जब किसी का लक्ष्य आसमान से भी ऊंचा होता है, तो वह नीचे गिरने से कमी नहीं डरता कुछ ऐसा ही लक्ष्य रखा था आईएएस अधिकारी दीपांकर चौधरी ने, जो पहले आईपीएस बने और फिर कड़ी मेहनत कर आईएएस अफसर बने।
आईएएस दीपांकर की प्रारंभिक शिक्षा झारखंड से हुई। इसके बाद वे दिल्ली आ गए और बाकी की पढ़ाई उन्होंने दिल्ली से की। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद दीपांकर ने वर्ष 2015 में इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की और ग्रेजुएशन पूरा होते ही, उन्होंने नौकरी ज्वाइन कर ली। थोड़े समय नौकरी करने के बाद उन्होंने सिविल सर्विसेज की परीक्षा की तैयारी करने की ठान ली। उन्होंने रात और दिन पढ़ाई कर आखिरकार आईएएस की परीक्षा पास कर ली।
पहले IPS के लिए हुआ था सिलेक्शन
दीपांकर चौधरी ने साल 2016 से सिविल सर्विसेज की परीक्षा की तैयारी शुरू की, लेकिन पहले 2 प्रयास में दीपांकर के हाथ असफलता लगी। उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार, उन्हें 2019 में तीसरे प्रयास में सफलता मिली। इस प्रयास में 166वीं रैंक के साथ उनका आईपीएस के लिए सिलेक्शन हुआ और दीपांकर ने उसे ज्वाइन करने का फैसला किया।
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साथ ही यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी जारी रखी, क्योंकि उनका सपना एक आईएएस अधिकारी बनने का था। उन्होंने 2020 के चौथे प्रयास में अपने सपने को पूरा कर दिखाया और इस बार उन्हें सिविल सर्विसेज की परीक्षा में 42वीं रैंक के साथ आईएएस का पद मिला।
अन्य लोगों को सलाह
आईएएस दीपांकर बताते हैं कि इस परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए आसानी से उपलब्ध होने वाली कुछ बेसिक और फेमस राइटर्स की किताबों से तैयारी करने में मदद ली। करंट अफेयर्स के लिए मंथली मैगजीन और नियमित रूप से अखबार पढ़ते रहे।
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दीपांकर चौधरी ने बताया कि नियमित पढ़ाई के साथ ही रिवीजन करने से उन्हें काफी फायदा हुआ। उनका कहना है कि उम्मीदवार अधिक किताबों के पीछे ना भागें और समय-समय पर टेस्ट सीरीज के जरिए अपनी तैयारी का आकलन करते रहें।
