RBI की कटौती से क्या घटेगी एफडी पर ब्याज दर? जानें इसका सीधा जवाब
एक्सपर्ट्स का कहना है कि 1 से 3 सालों की एफडी कराने में ही समझदारी है। अगर बैंक आने वाले दिनों में इंटरेस्ट रेट्स में कमी भी करेंगी, तो सबसे पहले शॉर्ट टर्म की एफडी पर करेंगे।
- Written By: अपूर्वा नायक
फिक्स्ड डिपॉजिट ( सौजन्य : सोशल मीडिया )
नई दिल्ली : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई ने तकरीबन 5 साल के बाद रेपो रेट में 0.25 बेसिक प्वाइंट की कटौती करके इसे 6.25 प्रतिशत तक कर दिया है। इसके बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है, होम लोन, कार लोन सहित सभी लोन सस्ते हो गए हैं। फिक्स्ड डिपॉजिट पर इंटरेस्ट रेट में कटौती हो सकती है। हालांकि, बहुत सारे एक्सपर्ट्स का मानना है कि फौरन तौर पर नहीं होने जा रहा है। एक्सपर्ट्स का ये कहना है कि यदि पिछला ट्रैक रिकॉर्ड देखें, तो बैंकों ने आरबीआई के रेपो रेट में कटौती के बाद भी सस्ते लोन का गिफ्ट देने में काफी समय लगाया। इतना ही नहीं, आरबीआई के द्वारा की गई कटौती का पूरा प्रॉफिट अपने कस्टमर को पास नहीं किया है। इसके चलते अबकी बार इस बात की उम्मीद नहीं की जा सकती है कि बैंक इस कटौती का लाभ तुरंत अपने कस्टमर को दें सकेंगे।
बहुत सारे एक्सपर्ट्स का कहना है कि आरबीआई के प्रयास के बाद भी ज्यादातर बैंक लिक्विडिटी की कमी से जूझ रहे हैं। इसीलिए वो ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे, जिससे लोग एफडी करवाने के मामले में गिरावट लाएं। इसलिए तुरंत फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरों में कमी आने की कोई उम्मीद नहीं है। हां, ये हो सकता है कि अगली पॉलिसी में अगर आरबीआई एक और कटौती करेगा, तो उसके बाद एफडी पर ब्याज दरों में कमी देखने को मिल सकती है। फिक्स्ड डिपॉजिट पर पहले शॉर्ट टाइम के इंटरेस्ट रेट में कटौती होगी। लॉन्ग टर्म की एफडी पर बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलने वाला है।
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शॉर्ट टर्म की एफडी कराने में समझदारी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि 1 से 3 सालों की एफडी कराने में ही समझदारी है। अगर बैंक आने वाले दिनों में इंटरेस्ट रेट्स में कमी भी करेंगी, तो सबसे पहले शॉर्ट टर्म की एफडी पर करेंगे। इसीलिए समय रहते एफडी करा लेना फायदेमंद साबित हो सकता है। इंवेस्टर्स को ध्यान देना चाहिए कि आरबीआई के द्वारा हाल ही में की गई 25 बेसिक प्वाइंट की कटौती पिछले 4 सालो के हाईएस्ट इंटरेस्ट रेट वाले माहौल से अलग होने का इशारा दे रहे हैं। इस अवधि में लगातार इंटरेस्ट रेट्स में बढ़ोतरी देखी गई है, जिसके चलते लोन की दरों में बढ़त हुई है, साथ ही सेविंग करने वाले इंवेस्टर्स के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट से भी ज्यादा आकर्षक हो गए हैं। बढ़ती उधारी लागतों के चलते जमा को आकर्षित करने और लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए, बैंकों को हायर एफडी रेट की पेशकश करनी पड़ी है।
