

N Chandrasekaran Resign Tata Sons: दिग्गज कारोबारी समूह टाटा ग्रुप के भीतर एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक घमासान देखने को मिल रहा है। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच गंभीर मतभेद खुलकर सामने आए हैं। बाजार में चंद्रशेखरन के पद छोड़ने की अटकलें भले ही तेज हैं, लेकिन फिलहाल उन्होंने औपचारिक रूप से इस्तीफा नहीं दिया है।
चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के कगार पर है और उनके अगले 5 साल के री-अपॉइंटमेंट पर फैसला होना था। लेकिन हालिया बैठक में इस फैसले को टाल दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने उनके अगले कार्यकाल को लेकर खुलकर आपत्ति जताई है, जिसके बाद से दोनों संस्थाओं के बीच तनाव और बढ़ गया है।
विवाद के केंद्र में एयर इंडिया का सुस्त परफॉर्मेंस और भारी नुकसान है। टाटा समूह द्वारा एयर इंडिया को दोबारा टेकओवर करने के बाद इसके टर्नअराउंड की रफ्तार काफी धीमी रही है। वित्तीय वर्ष 2026 में एयर इंडिया को लगभग ₹20,500 करोड़ का भारी घाटा हुआ है। इतने बड़े नुकसान को लेकर टाटा ट्रस्ट्स की ओर से लगातार गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और एविएशन जैसे नए सेक्टरों में काफी भारी निवेश (कैपिटल एलोकेशन) किया गया। लेकिन इन नए प्रोजेक्ट्स में हो रहे नुकसान को लेकर भी बोर्ड और ट्रस्ट्स के बीच एकराय नहीं बन पा रही है। इसके अलावा शापूरजी पालोनजी (SP Group) की हिस्सेदारी और टाटा संस की आगे की लिस्टिंग रणनीति पर भी मतभेद बने हुए हैं।
टाटा ग्रुप के भीतर पनप रहे इस नए तनाव ने साल 2016 के चर्चित रतन टाटा और साइरस मिस्त्री विवाद की यादें फिर से ताजा कर दी हैं। हालांकि, अभी चंद्रशेखरन का पद से हटना तय नहीं है, लेकिन टाटा ट्रस्ट्स के प्रभाव को देखते हुए उनके भविष्य पर संकट के बादल साफ मंडराते दिख रहे हैं।
आपको बता दें कि टाटा संस के चेयरमैन पद से एन चंद्रशेखरन के अचानक इस्तीफा देने की खबर आते ही भारतीय शेयर बाजार में भारी खलबली मच गई है। बुधवार को कारोबार के दौरान टाटा ग्रुप की कंपनियों के सभी शेयरों में जबरदस्त बिकवाली देखी गई, जिससे ग्रुप को बहुत बड़ा झटका लगा है। इस बड़े इस्तीफे की खबर ने बाजार में मौजूद तमाम छोटे-बड़े निवेशकों के भरोसे को पूरी तरह हिलाकर रख दिया, जिससे टाटा के शेयर ताश के पत्तों की तरह बिखर गए।
एन चंद्रशेखरन के अचानक इस्तीफा देने की खबर जैसे ही आम लोगों के बीच आई, वैसे ही बाजार में टाटा समूह की लिस्टेड कंपनियों के प्रति घबराहट साफ दिखाई देने लगी। इसके चलते टाटा ग्रुप का कुल मार्केट कैप एक ही दिन के भीतर 44,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का नुकसान झेल गया। निवेशकों के लिए यह बुधवार किसी भारी आर्थिक झटके से कम नहीं रहा, क्योंकि उनके निवेश की कुल वैल्यू अचानक बहुत तेजी से नीचे आ गई।