ट्रंप के राष्ट्रपति बनते ही इस भारतीय का कटा पत्ता, दे दिया इस्तीफा
विवेक रामास्वामी ने डीओजीई पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफा देने के बाद डीओजीई के प्रवक्ता अन्ना केली ने ये कहा है कि विवेक रामास्वामी ने इस विभाग में काफी अहम योगदान दिया था।
- Written By: अपूर्वा नायक
विवेक रामास्वामी (सौ . सोशल मीडिया )
नई दिल्ली : डोनाल्ड ट्रंप ने बीती रात दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति के पद की शपथ ली है। अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ लेते ही डोनाल्ड ट्रंप के सामने एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। बताया जा रहा है कि भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी जिन्हें डोनाल्ड ट्रंप ने सरकारी दक्षता विभाग के लिए चुना था, वो अब डीओजीई का हिस्सा नहीं होगें। इसको लेकर व्हाइट हाउस ने सोमवार को एक जानकारी भी साझा की है, जिसमें बताया गया है कि विवेक रामास्वामी अब सरकारी दक्षता विभाग यानी डीओजीई का हिस्सा नहीं है। आपको बता दें कि अपने मंत्रिमंडल को चुनते समय डोनाल्ड ट्रंप ने विवेक रामास्वामी को एलन मस्क के साथ मिलकर सरकारी दक्षता विभाग यानी डीओजीई का नेतृत्व करने के लिए चुना गया था।
विवेक रामास्वामी ने डीओजीई पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफा देने के बाद डीओजीई के प्रवक्ता अन्ना केली ने ये कहा है कि विवेक रामास्वामी ने इस विभाग में काफी अहम योगदान दिया था, चूंकि अब उन्होंने ओहियो के गवर्नर पद पर चुनाव लड़ने का इरादा बना लिया है, यही कारण है कि उन्हें विभाग से बाहर जाना पड़ रहा है।
इस पद के लिए लड़ना चाहते थे चुनाव
दरअसल बात ये है कि इंडियन-अमेरिकन बिजनेसमैन विवेक रामास्वामी ने सबसे पहले राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने का फैसला लिया था। विवेक रामास्वामी ने भी रिपब्लिकन पार्टी की ओर से उम्मीदवारी पेश की थी। हालांकि अब उन्होंने अपना मन बदल लिया है, अब वो ओहियो के गवर्नर पद के लिए चुनाव लड़ना चाहते हैं। इसीलिए डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद के लिए शपथ ग्रहण करने के कुछ ही घंटों के बाद में विवेक रामास्वामी को सरकारी दक्षता विभाग यानी डीओजीई से इस्तीफा देना पड़ा था।
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विवेक रामास्वामी कौन है?
इंडियन ओरिजिन के विवेक रामास्वामी बायोटेक बिजनेस में जाना माना नाम हैं। रामास्वामी दवाओं को विकसित करने के लिए बायोटेक कंपनी रोइवेंट साइंसेज के द्वारा कारोबार करते हैं। उन्होंने साल 2016 में सबसे बड़ी बायो टेक फर्म मायोवैंट साइंसेज की स्थापना की थी। अप्रैल के महीने में कंपनी बनाने के बाद से उन्होंने प्रोस्टेट कैंसर की दवा और महिला बांझपन की मेडिसिन के लिए टाकेडा फार्मा के साथ एक कॉन्ट्रेक्ट साइन किया था।
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वह बायोफार्मा स्पेस में कई कंपनियों के फाउंडर भी हैं, जिनमें मायोवैंट साइंसेज, एंजीवेंट थेराप्यूटिक्स, अल्टावेंट साइंसेज, यूरोवेंट साइंसेज और स्पिरोवैंट साइंसेज के नाम शामिल हैं। 37 साल के विवेक रामास्वामी ने बेहद ही कम समय में बायोटेक सेक्टर में अपनी अलग पहचान बना ली है। साल 2015 में फोर्ब्स पत्रिका के कवर पर उन्हें फीचर किया गया था। फोर्ब्स मैगजीन के अनुसार, साल 2014 में 30 साल से कम उम्र वाले सबसे अमीर बिजनेसमैन में विवेक 30वें पायदान पर थे। वहीं साल 2016 में वे 40 साल की उम्र वाले सबसे अमीर बिजनेसमैन थे।
