

US Court Gautam Adani Case Dismissed: अमेरिकी अदालत ने भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के आरोपों को आगे न बढ़ाने के फैसले के बाद ब्रुकलिन कोर्ट ने यह ऐतिहासिक राहत दी है।
अदालत का यह ऐतिहासिक फैसला आने के तुरंत बाद गौतम अडाणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने अपनी पोस्ट में अमेरिकी न्यायपालिका के प्रति गहरा आभार प्रकट किया। अडाणी ने लिखा, “मैं पूरी न्यायिक प्रक्रिया के प्रति अपनी विनम्रता और गहरे सम्मान के साथ अमेरिकी अदालत के इस फैसले का स्वागत करता हूं।”
उनकी इस प्रतिक्रिया से साफ है कि अडाणी और उनका ग्रुप इस अदालती लड़ाई को लेकर काफी आश्वस्त थे। इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच अडाणी ग्रुप की साख को मजबूती प्रदान की है।
ब्रुकलिन के डिस्ट्रिक्ट जज निकोलस गैराफिस ने संघीय अभियोजकों की अपील पर अडानी के खिलाफ मामला खारिज किया। अदालत द्वारा पूछे जाने पर अमेरिकी न्याय विभाग और अडानी के वकीलों ने स्पष्ट किया कि केस खत्म करने के बदले कोई सौदा नहीं हुआ। हालांकि, जज ने विभाग से मामले को बंद करने की वजह भी पूछी थी।
अडानी ने 15 जुलाई को दाखिल अपने शपथ पत्र में स्पष्ट किया कि उन्होंने अमेरिका में 10 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया था। लेकिन उन्होंने साफ किया कि इस निवेश का इस मामले को बंद करने के किसी समझौते से संबंध नहीं था। इसके बाद ही अदालत ने औपचारिक रूप से मामला खारिज किया।
पूरे विवाद की शुरुआत साल 2024 में हुई थी, जब अमेरिकी अभियोजकों ने गौतम अडानी और उनके सहयोगियों पर आरोप लगाए थे। उन पर आरोप था कि उन्होंने भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने पर अपनी सहमति जताई थी, ताकि अडाणी ग्रुप की एक सहायक कंपनी को भारत में एक सोलर एनर्जी प्लांट विकसित करने का ठेका मिल सके। अडाणी ग्रुप ने इन आरोपों से लगातार इनकार किया था। वे लगातार अदालती लड़ाई में अपनी बेगुनाही साबित करने में जुटे हुए थे, जिसमें अब उन्हें बड़ी सफलता मिली है।
अमेरिकी न्याय विभाग ने 18 मई को आधिकारिक घोषणा की थी कि वह इस हाई-प्रोफाइल मामले को आगे नहीं बढ़ाएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान बड़े मामलों को छोड़ने की यह एक और नई मिसाल बनकर सामने आई है। न्याय विभाग ने बताया कि यह मामला साबित करना काफी कठिन था।
विभाग के अधिकारी ट्रेंट मैककॉटर ने बताया कि यह मामला मुख्य रूप से विदेशी था और यह विभाग की वर्तमान प्राथमिकताओं के अनुकूल नहीं था। कोर्ट के इस फैसले से अब अडानी समूह को अमेरिकी बाजारों में बड़ी राहत मिलेगी। अब वे बिना किसी अड़चन के अमेरिका में अपना प्रस्तावित निवेश कर सकेंगे।
बहुत से लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि जब कथित रिश्वत का मामला और सोलर पावर का ठेका भारत का था, तो फिर अमेरिकी अदालत में यह केस कैसे दर्ज हुआ? इसका मुख्य कारण अमेरिकी निवेशकों का इस परियोजना में लगा पैसा था। दरअसल, अदाणी ग्रीन एनर्जी ने सितंबर 2021 में 75 करोड़ डॉलर के बॉन्ड जारी किए थे। इसमें से लगभग 17.5 करोड़ डॉलर का निवेश अमेरिकी निवेशकों द्वारा किया गया था।
अमेरिकी जांच के मुताबिक, निवेशकों को कंपनी की रिश्वत रोकने की व्यवस्था और इसके जोखिमों की सही जानकारी नहीं दी गई। इसी वजह से मामला अमेरिकी निवेशकों तक पहुंचा और वहां धोखाधड़ी के आरोप लगे। अमेरिकी अभियोजकों ने विदेशी अधिकारियों को रिश्वत देने, निवेशकों से धोखाधड़ी और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से धोखाधड़ी के तहत आरोप लगाए थे। साथ ही, अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग ने भी कार्रवाई की थी।
गौतम अडाणी की यह कानूनी जीत उनके जीवन के संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक सफर की तरह ही ऐतिहासिक है। साल 1988 में गुजरात में महज 16 साल की उम्र में स्कूल छोड़ने के बाद अडाणी ने बहुत ही साधारण स्तर पर कमोडिटी ट्रेडिंग के साथ अपने व्यावसायिक करियर की शुरुआत की थी। अपनी कड़ी मेहनत और दूरदर्शी सोच के बल पर उन्होंने धीरे-धीरे अपने व्यापार का विस्तार किया। पिछले कुछ दशकों में उन्होंने अपने ग्रुप को देश के सबसे बड़े कारोबारी घरानों में शामिल कर लिया। आज अडाणी ग्रुप का साम्राज्य पोर्ट्स, एयरपोर्ट्स, माइनिंग, बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ है। अमेरिकी अदालत का यह फैसला उनके इस विशाल औद्योगिक साम्राज्य की साख को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत करेगा।