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FPI की कैपिटल गेन टैक्स से जुड़ी चिंताओं पर सरकार विचार करेगी।
मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने इसका संकेत दिया है।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि FII की निकासी से चिंताएं और बढ़ गई हैं।
Nirmala Sitharaman On LTCG: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि सरकार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की कैपिटल गेन टैक्स लेकर चिंताओं को सुनेगी और उसके बाद ही कोई फैसला लेगी। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में फाइनेंशियल एक्सप्रेस लीडरशिप अवार्ड्स में बोलते हुए सीतारमण ने कहा कि बाजार में बदले माहौल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने कर ढांचे में बदलाव को मांगों को तेज कर दिया है।
हालांकि, वित्त मंत्री सीतारमण ने बताया कि मौजूदा कर ढांचा 2023 में भी वही था, जब भारत में रिकॉर्ड विदेशी निवेश आया था। उन्होंने कहा कि 2023 में भी जब निवेश का फ्लो रिकॉर्ड स्तर पर था, तब भी टैक्स का ढांचा वैसा ही था जैसा आज है।
कार्यक्रम में बोलते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आज हालात बदल गए हैं। एफआईआई की निकासी हुई है और चिंताएं भी बढ़ गई हैं। मैं इन सब बातों पर विचार करूंगी। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार मौजूदा टैक्स व्यवस्था में कोई भी बदलाव करने से पहले कई पहलुओं पर विचार करेगी और साथ ही वैश्विक निवेशकों द्वारा जताई गई चिंताओं को भी ध्यान में रखेगी।
इसके अलावा वित्त मंत्री ने भरोसा जताया कि टाटा समूह के भीतर चल रहे मुद्दे- जिनमें चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति को लेकर मतभेद और टाटा संस की प्रस्तावित लिस्टिंग शामिल हैं, आपसी बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिए जाएंगे।
वित्त मंत्री सीतारमण ने इस मामले को एक संवेदनशील मुद्दा बताया, जिसमें महत्वपूर्ण व्यावसायिक और कारोबारी पहलू शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इसे सार्वजनिक रूप से विवाद करने के बजाय संबंधित पक्षों को आपस में सुलझा लेना चाहिए।
भारतीय अर्थव्यवस्था में टाटा समूह के महत्व को रेखांकित करते हुए, उन्होंने समूह की वैश्विक ब्रांड वैल्यू, इसे खड़ा करने में पारसी समुदाय के योगदान और उन विभिन्न क्षेत्रों का जिक्र किया जिनमें टाटा की कंपनियां काम करती हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि मैं टाटा की ब्रांड वैल्यू और इसे एक बड़ा वैश्विक ब्रांड बनाने में पारसी समुदाय के योगदान को जानती हूं। मुझे यह भी पता है कि टाटा ग्रुप किन-किन क्षेत्रों में सक्रिय है। इसलिए, यह भारतीय अर्थव्यवस्था का एक बहुत ही अहम हिस्सा है और इसे दोनों पक्षों को आपसी सहमति से सुलझा लेना चाहिए।
वित्त मंत्री ने सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करने और जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इतने बड़े संस्थान के लिए लंबे समय तक सार्वजनिक विवाद चलना बिल्कुल भी ठीक नहीं है।