तेज गिरावट या बंपर उछाल...सोमवार को कैसा रहेगा शेयर मार्केट का हाल, ये फैक्टर्स तय करेंगे बाजार की चाल

Share Market: पिछले हफ्ते बिकवाली और वैश्विक चिंताओं के बीच बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ऐसे में निवेशक अगले हफ्ते सावधानी से कारोबार करते नजर आ सकते हैं।
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शेयर मार्केट, (डिजाइन फोटो)
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Share Market Outlook: आने वाले हफ्ते में भारतीय शेयर बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि इस दौरान कई बड़े और अहम घटनाक्रम बाजार को प्रभावित कर सकते हैं, जिनमें यूनियन बजट 2026, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक, कंपनियों के तिमाही नतीजे और ग्लोबल इवेंट्स शामिल हैं।

पिछले हफ्ते बिकवाली और वैश्विक चिंताओं के बीच बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ऐसे में निवेशक अगले हफ्ते सावधानी से कारोबार करते नजर आ सकते हैं और इन बड़े संकेतों का इंतजार करेंगे।

शुक्रवार को गिरावट में बंद हुआ था बाजार

शुक्रवार को बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली, जिससे पूरा हफ्ता कमजोरी के साथ खत्म हुआ। मुनाफावसूली, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और भू-राजनीतिक तनाव की अनिश्चितता ने बाजार पर दबाव बनाया। हफ्ते के अंत में सेंसेक्स 770 अंक यानी 0.94 प्रतिशत गिरकर 81,537.70 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 241 अंक यानी 0.95 प्रतिशत गिरकर 25,048.65 के स्तर पर बंद हुआ।

यूनियन बजट 2026 पर रहेगी नजर

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 25,300 का स्तर इमीडिएट रेजिस्टेंस है। इसके बाद 25,400 और 25,600 के स्तर अहम रहेंगे।वहीं गिरावट की स्थिति में 24,880 और 24,587 के स्तर पर बाजार को सपोर्ट मिल सकता है। अगर निफ्टी 24,350 के नीचे फिसलता है, तो गिरावट और तेज हो सकती है। अगले हफ्ते का सबसे बड़ा घटनाक्रम यूनियन बजट 2026 होगा, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार 1 फरवरी को संसद में पेश करेंगी। बजट में निवेशकों की नजर होने वाले टैक्स से जुड़े ऐलान, सरकारी खर्च, इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने वाले कदमों पर रहेगी। बजट में सरकार की प्राथमिकताएं तय करेंगी कि शेयर बाजार किस दिशा में जाएगा। वैश्विक स्तर पर भी निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर रहेगी, जो 27 से 28 जनवरी के बीच होने वाली है।

फेड रेट भी बाजार के लिए बेहद अहम

विशेषज्ञों का मानना है कि फेड फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि, भविष्य में ब्याज दरों को लेकर फेड अधिकारियों के बयान वैश्विक निवेशकों की सोच और पूंजी प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं। इसके साथ ही कंपनियों के तिमाही नतीजों का सीजन भी जारी रहेगा। कई बड़ी कंपनियां वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के अपने नतीजे पेश करेंगी।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़े घटनाक्रम पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा था कि भारत वैश्विक व्यापार बातचीत में सक्रिय है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर सकारात्मक बयान दिया है।

सोने-चांदी की कीमतों में तेज उछाल

इस बीच सोने और चांदी की कीमतों में तेजी ने भी बाजार का ध्यान खींचा है। भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर अमेरिकी डॉलर की वजह से सोने की कीमतें बढ़कर 5,000 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गईं और 4,967 डॉलर से ऊपर का नया रिकॉर्ड बनाया। वहीं, चांदी की कीमतें भी करीब 100 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गईं।

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