ब्लैक मंडे: जब एक ही दिन में 22.6 फीसदी क्रैश हुआ शेयर बाजार, जानें क्यों दुनिया भर में मच गई थी खलबली

Black Monday 1987: 19 अक्टूबर 1987 को ब्लैक मंडे के दिन अमेरिकी शेयर बाजार में ऐतिहासिक गिरावट आई। जानिए डाउ जोन्स क्रैश के कारण, कंप्यूटर ट्रेडिंग की भूमिका और बाजार की रिकवरी।
Dow Jones Stock Market Crash 1987
एक झटके में गिर गया था अमेरिकी शेयर बाजार(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Highlights:

  • 19 अक्टूबर 1987 को डाउ जोन्स इंडेक्स एक दिन में 22.6% गिरा

  • कंप्यूटर ट्रेडिंग और पोर्टफोलियो इंश्योरेंस ने बिकवाली का दबाव बढ़ाया

  • फेडरल रिजर्व के कदमों से बाजार को उबरने में मदद मिली

Dow Jones Stock Market Crash 1987: शेयर बाजार में गिरावट और तेजी का दौर आम बात है लेकिन इतिहास में कुछ ऐसे दिन भी दर्ज हैं जिन्होंने पूरी दुनिया के निवेशकों को हिलाकर रख दिया। ऐसा ही एक दिन था 19 अक्टूबर 1987 जिसे ब्लैक मंडे के नाम से जाना जाता है। इस दिन अमेरिका का प्रमुख शेयर बाजार डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज एक ही कारोबारी सत्र में 22.6 फीसदी टूट गया। यह आज भी इस इंडेक्स की एक दिन में प्रतिशत के लिहाज से सबसे बड़ी गिरावट है। इस भारी गिरावट ने दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में खलबली मचा दी और निवेशकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया।

कैसे शुरू हुई बाजार में गिरावट

ब्लैक मंडे की कहानी अचानक आई गिरावट से शुरू नहीं होती। अक्टूबर 1987 के शुरुआती दिनों से ही अमेरिकी शेयर बाजार पर दबाव बढ़ने लगा था। इससे पहले कई वर्षों तक बाजार में तेजी का माहौल रहा था। निवेशकों को उम्मीद थी कि कंपनियों के शेयरों की कीमतें आगे भी बढ़ती रहेंगी। लेकिन आर्थिक अनिश्चितताओं और नीतिगत चिंताओं ने इस भरोसे को कमजोर करना शुरू कर दिया था।

अमेरिका का बढ़ता व्यापार घाटा डॉलर की कमजोरी ब्याज दरों को लेकर चिंताएं और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक तनाव बाजार के माहौल को प्रभावित कर रहे थे। अक्टूबर के मध्य तक शेयर बाजार में गिरावट तेज होने लगी। 16 अक्टूबर 1987 को शुक्रवार के कारोबारी सत्र में डाउ जोन्स करीब 4.6 फीसदी गिर गया। इसके बाद सप्ताहांत के दौरान बनी अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी।

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एक दिन में 22.6% गिरा बाजार(सोर्स- सोशल मीडिया)

19 अक्टूबर को क्यों मचा हाहाकार

सोमवार 19 अक्टूबर को जब अमेरिकी बाजार खुला तो निवेशकों के बीच शेयर बेचने की होड़ मच गई। एशिया और यूरोप के बाजारों में पहले से जारी गिरावट का असर भी अमेरिकी निवेशकों की धारणा पर पड़ा। बड़ी संख्या में निवेशक अपने शेयर बेचकर नुकसान से बचना चाहते थे लेकिन बाजार में इतनी बड़ी मात्रा में बिकवाली के मुकाबले खरीदार कम पड़ गए।

नतीजा यह हुआ कि शेयरों की कीमतें तेजी से नीचे आने लगीं। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 508.32 अंक गिरकर बंद हुआ। उस समय के हिसाब से यह करीब 22.6 फीसदी की गिरावट थी। बाजार में कारोबार की मात्रा भी असाधारण रूप से बढ़ गई थी। इस गिरावट ने 1929 के शेयर बाजार संकट के बाद से अमेरिकी बाजार में आई सबसे बड़ी एक दिवसीय उथल पुथल को जन्म दिया।

कंप्यूटर ट्रेडिंग ने कैसे बढ़ाई तबाही

ब्लैक मंडे की सबसे अहम वजहों में से एक थी कंप्यूटर आधारित ट्रेडिंग और पोर्टफोलियो इंश्योरेंस की रणनीति। उस दौर में कई संस्थागत निवेशक ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे थे जिनका उद्देश्य बाजार गिरने पर अपने निवेश को संभावित नुकसान से बचाना था।

लेकिन जब बड़ी संख्या में निवेशकों ने एक साथ शेयर बेचना शुरू किया तो इन रणनीतियों ने गिरावट को और तेज कर दिया। शेयरों की कीमतें नीचे जातीं तो कुछ प्रणालियां और बिकवाली के संकेत देतीं। इससे बाजार में दबाव और बढ़ता और कीमतें फिर गिरने लगतीं। इस तरह बिकवाली और गिरावट का एक ऐसा चक्र बन गया जिसने संकट को गंभीर बना दिया।

हालांकि विशेषज्ञ आज भी इस बात पर जोर देते हैं कि ब्लैक मंडे की कोई एक वजह नहीं थी। आर्थिक चिंताओं निवेशकों के व्यवहार कंप्यूटर ट्रेडिंग और बाजार की तकनीकी कमजोरियों ने मिलकर इस संकट को इतना बड़ा बनाया।

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कंप्यूटर आधारित ट्रेडिंग से बाजार में गिरावट बढ़ी(सोर्स- सोशल मीडिया)

ब्लैक मंडे से कैसे उबरा बाजार?

ब्लैक मंडे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या शेयर बाजार की यह गिरावट 1929 जैसी महामंदी का संकेत है। बाजार में भारी नुकसान के बावजूद इस बार वैसा आर्थिक संकट पैदा नहीं हुआ। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने वित्तीय व्यवस्था में नकदी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कदम उठाए और बैंकों को सामान्य रूप से कर्ज देने के लिए प्रोत्साहित किया।

इन उपायों से वित्तीय व्यवस्था पर दबाव कम करने में मदद मिली। बाजार ने भी धीरे धीरे सुधार दिखाया। ब्लैक मंडे के बाद केवल दो कारोबारी सत्रों में डाउ जोन्स ने अपनी कुल गिरावट का एक बड़ा हिस्सा वापस हासिल कर लिया। बाद के महीनों में बाजार में सुधार जारी रहा और दो साल से भी कम समय में अमेरिकी शेयर बाजार अपने पुराने उच्च स्तर को पार कर गया।

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शेयर बाजार के इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट(सोर्स- सोशल मीडिया)

ब्लैक मंडे के बाद बाजार में क्या बदला

इस ऐतिहासिक संकट ने दुनिया को यह समझाया कि शेयर बाजार में गिरावट केवल कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर नहीं करती। निवेशकों का डर तकनीकी प्रणालियां और बाजार की संरचना भी संकट को कई गुना बढ़ा सकती हैं।

ब्लैक मंडे के बाद अमेरिकी नियामकों ने बाजार की कार्यप्रणाली और जोखिम प्रबंधन की समीक्षा की। वर्ष 1988 में बाजार में अत्यधिक गिरावट के दौरान कारोबार को अस्थायी रूप से रोकने के लिए सर्किट ब्रेकर व्यवस्था लागू की गई। इसका उद्देश्य बाजार में अचानक आई भारी गिरावट के दौरान निवेशकों और कारोबारियों को स्थिति समझने का समय देना था। 

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