शेयर बाजार में गिरावट (सोर्स- सोशल मीडिया)
Share Market Highlights: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क बीएसई सेंसेक्स 702.68 अंक यानी 0.91 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,847.57 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी50 207.95 अंक यानी 0.86 प्रतिशत गिरकर 23,842.65 के स्तर पर बंद हुआ।
दिन के कारोबार में सेंसेक्स 1,682 अंक या 2.1 प्रतिशत गिरकर 75,868.32 के निचले स्तर पर पहुंच गया था, जबकि निफ्टी 495 अंक या 2 प्रतिशत गिरकर 23,555.60 के निचले स्तर पर पहुंच गया था। व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.57 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.46 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
वहीं, सेक्टरवार देखें तो निफ्टी ऑटो में 2.09 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी में 1.29 प्रतिशत और निफ्टी आईटी में 1.16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.73 प्रतिशत, निफ्टी बैंक में 0.55 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.63 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया में 0.35 प्रतिशत, निफ्टी फार्मा में 0.29 प्रतिशत और निफ्टी मेटल में 0.22 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
निफ्टी50 में आयशर मोटर्स, मारुति सुजुकी, बजाज फाइनेंस, रिलायंस, इंडिगो, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, एचडीएफसी बैंक, टीसीएस और श्रीराम फाइनेंस के शेयरों में सबसे ज्यादा 5-2 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एचडीएफसी लाइफ, अदाणी इंटरप्राइजेज, आईसीआईसीआई बैंक, एनटीपीसी, टीएमपीवी, कोल इंडिया और ओएनजीसी के शेयरों में तेजी देखने को मिली।
घरेलू बाजार में यह गिरावट अमेरिका-ईरान युद्धविराम वार्ता के विफल होने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण आई, जिससे यह चिंता बढ़ गई है कि मध्य पूर्व संघर्ष अनुमान से अधिक समय तक खिंच सकता है। इस्लामाबाद में सप्ताह के अंत में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, जिससे दो सप्ताह के नाजुक संघर्ष विराम पर संदेह पैदा हो गया है।
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बाजार अब रिकवरी फेज से निकलकर एक अधिक सतर्क और जोखिम-संवेदनशील स्थिति में प्रवेश कर रहा है। बढ़ती अस्थिरता और लगभग सभी सेक्टरों में दबाव यह दिखाता है कि निवेशक अब मैक्रो जोखिमों को गंभीरता से लेने लगे हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, रुपये की कमजोरी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण कंपनियों की कमाई और मार्जिन को लेकर चिंता बढ़ गई है।
यह भी पढ़ें: बाजार में मचेगी तबाही! होर्मुज में US की नाकेबंदी से दुनिया में हलचल तेज, जानें भारत पर क्या पड़ेगा असर?
बाजार के जानकारों का कहना है कि मोमेंटम इंडिकेटर्स अभी भी हल्का सकारात्मक रुझान दिखा रहे हैं। आरएसआई करीब 52 के आसपास है, जो न्यूट्रल से ऊपर है और संकेत देता है कि निचले स्तरों पर खरीदारी हो रही है। हालांकि, मजबूत तेजी तभी मानी जाएगी जब इंडेक्स 24,000 के ऊपर टिकेगा। तब तक बाजार सीमित दायरे में नकारात्मक झुकाव के साथ कारोबार कर सकता है।