SEBI Buyback Rules: सेबी ने बायबैक नियमों में किया बड़ा बदलाव, 1 अगस्त से कंपनियों को मिलेगी मंजूरी
SEBI Buyback Rules: मार्केट रेगुलेटर सेबी ने कॉर्पोरेट जगत को बड़ी राहत देते हुए 1 अगस्त से ओपन मार्केट बायबैक को फिर से मंजूरी दे दी है। इसके अलावा म्यूचुअल फंड व AIF नियमों में भी अहम बदलाव हुए हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
सेबी बायबैक नियम (सोर्स-सोशल मीडिया)
New SEBI Buyback Rules: सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानी सेबी ने शुक्रवार को कॉर्पोरेट जगत के लिए एक बहुत अहम फैसला लिया है। सेबी ने स्टॉक एक्सचेंज के जरिए शेयर बायबैक को फिर से शुरू करने की अपनी बड़ी और अहम मंजूरी दे दी है। इस नए और बड़े फैसले के बाद अब सभी लिस्टेड कंपनियां आगामी 1 अगस्त से ओपन मार्केट में अपने शेयर वापस खरीद सकेंगी। इसके लिए बाजार नियामक की तरफ से 66 वर्किंग डेज यानी कार्य दिवसों की एक नई समय-सीमा भी तय कर दी गई है।
सेबी के इस बड़े कदम से कंपनियां बिना किसी खास बायबैक विंडो के रेगुलर ट्रेडिंग सिस्टम के जरिए शेयर खरीद पाएंगी। इससे पूरी प्रक्रिया पहले से काफी आसान हो जाएगी और कंपनियों का भारी पेपरवर्क भी बहुत कम हो जाएगा। सेबी ने वर्ष 2025 में ओपन मार्केट बायबैक को धीरे-धीरे बंद कर दिया था जिसे अब दोबारा से शुरू किया गया है। इससे लिस्टेड कंपनियों के लिए कैपिटल एलोकेशन टूल के तौर पर यह बायबैक और भी ज्यादा आकर्षक बन सकता है।
बायबैक प्रक्रिया के फायदे
जब कोई भी कंपनी अपने ही शेयर बाजार से वापस खरीदती है तो इस पूरी प्रक्रिया को शेयर बायबैक कहा जाता है। इसके बाद बाजार में उस कंपनी के कुल शेयरों की संख्या काफी कम हो जाती है जिससे ईपीएस में भारी सुधार होता है। कंपनी ऐसा तब करती है जब उसके पास अतिरिक्त कैश हो या उसे लगता हो कि उसके शेयर की कीमत बहुत कम आंकी जा रही है। बायबैक से शेयर बाजार में आम निवेशकों का भरोसा तेजी से बढ़ता है और शेयर की कीमत को भी बहुत सपोर्ट मिलता है।
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म्यूचुअल फंड नियमों में ढील
म्यूचुअल फंड नियम 2026 में हुए बड़े बदलाव के बाद अब म्यूचुअल फंड्स को इंट्रा-डे उधार लेने की खास इजाजत भी मिलेगी। इससे विदेशी मुद्रा से जुड़ी देनदारियों और डेरिवेटिव पोजीशन पर पेमेंट से जुड़े टाइमिंग मिसमैच को आसानी से दूर किया जा सकेगा। सेबी प्रमुख तुहिन कांत पांडे ने बताया कि इसका मकसद फंड मैनेजरों को रोजाना की लिक्विडिटी मिसमैच मैनेज करने में मदद करना है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि इस तरह का कोई भी इंट्रा-डे उधार दिन खत्म होने से पहले ही पूरी तरह चुका दिया जाए।
सिक्योरिटीज ट्रांसफर हुआ आसान
बोर्ड ने किसी भी निवेशक की मौत के बाद सिक्योरिटीज ट्रांसफर की प्रक्रिया को भी बहुत आसान बनाने के उपायों को मंजूरी दी है। नॉमिनी और कानूनी वारिसों के लिए अब किसी भी फाइनेंशियल एसेट्स पर अपना दावा करना पहले से ज्यादा आसान हो जाएगा। रेगुलेटर ने कम वैल्यू वाले दावों के लिए 10,000 और 30,000 रुपये वाली क्विक ट्रांसमिशन प्रोसेसिंग की एक नई कैटेगरी शुरू की है। इसके अलावा आसान डॉक्यूमेंटेशन से फिजिकल होल्डिंग्स के लिए सीमा 10 लाख रुपये और डीमैट के लिए 30 लाख रुपये कर दी गई है।
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एआईएफ सेक्टर को मिला बूस्ट
बोर्ड ने गरुड़ नाम के एक नए ग्रीन-चैनल मैकेनिज्म को भी मंजूरी दी है जिससे एआईएफ स्कीम लॉन्च करने की प्रक्रिया बहुत तेज होगी। इस फ्रेमवर्क के तहत योग्य एआईएफ स्कीम मेमोरेंडम फाइल करने के 10 वर्किंग डेज के भीतर ही अपना फंड जुटाना शुरू कर सकेंगी। पहले इसके लिए 30 दिन तक इंतजार करना पड़ता था लेकिन अब पूंजी का इस्तेमाल तेजी और कुशलता से हो सकेगा। 31 मार्च 2026 तक देश में रजिस्टर्ड एआईएफ की संख्या 1,849 थी जबकि कुल कमिटमेंट 15.74 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका था।
