कर्जदारों के लिए बड़ी खुशखबरी! 5% तक आ सकता है रेपो रेट, नए साल में घटेगा EMI का बोझ!

RBI MPC: आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026 के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को संशोधित करके 7.3% कर दिया है, क्योंकि घरेलू सुधार, जैसे आयकर में बदलाव और जीएसटी से अर्थव्यवस्था में वृद्धि की संभावना है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की एमपीसी मीटिंग में आज रेपो रेट में कटौती का ऐलान किया है। जिसके बाद ये उम्मीद की जा रही है कि रिटेल इंफ्लेशन में और भी ज्यादा गिरावट आ सकती हैं।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा (सौ. सोशल मीडिया )
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Repo Rate Cut: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) फरवरी में होने वाली अपनी अगली मौद्रिक नीति बैठक (एमपीसी) में रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट घटाकर 5 प्रतिशत कर सकता है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूबीआई) की एक नई रिपोर्ट में यह बात कही गई है। यूबीआई ने इस रिपोर्ट में कहा है कि आरबीआई ने महंगाई कम होने और कीमतों पर दबाव कम रहने की बार-बार बात की है, इसलिए फरवरी या अप्रैल 2026 में यह आखिरी कट संभव है।

रिपोर्ट के अनुसार, अगर सोने की वजह से महंगाई में 50 बेसिस पॉइंट का असर कम कर दें, तो कीमतों का दबाव और भी कम दिखता है। बैंक की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है है कि हमें लगता है कि फरवरी या अप्रैल 2026 में अंतिम 25 बेसिस पॉइंट की रेट कटौती की संभावना है।

अगली बैठक में बड़े ऐलान की संभावना

नरम नीतिगत संकेतों को देखते हुए फरवरी 2026 की बैठक में रेपो रेट में कटौती कर 5 प्रतिशत तक किए जाने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता, हालांकि अंतिम ब्याज दर कटौती का समय तय करना आमतौर पर मुश्किल होता है। बैंक ने कहा कि समय निश्चित नहीं है क्योंकि फरवरी 2026 में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) और जीडीपी के आधार वर्ष में बदलाव होने वाले हैं। इन कारणों से मौद्रिक नीति समिति वेट-एंड-वॉच की रणनीति अपना सकती है और संशोधित आंकड़े आने के बाद महंगाई और विकास के रुझानों का फिर से मूल्यांकन कर सकती है।  आरबीआई की एमपीसी ने दिसंबर में रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट घटाकर 5.25 प्रतिशत किया है और अगली बैठक 4 से 6 फरवरी 2026 को निर्धारित है।

इकोनॉमिक ग्रोथ के अनुमान में बदलाव

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026 के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को संशोधित करके 7.3 प्रतिशत कर दिया है, क्योंकि घरेलू सुधार, जैसे आयकर में बदलाव, आसान मौद्रिक नीति और जीएसटी सुधार से बढ़ावा मिलने के कारण वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में अर्थव्यवस्था में वृद्धि की संभावना है।

खाने-पीने के चीजों की कीमतों पर नजर

वहीं, यस बैंक की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यदि खाद्य कीमतों में गिरावट बनी रहती है तो आगे और कटौती का मौका कम हो सकता है, जब तक कि अर्थव्यवस्था में बड़ी कमजोरी नहीं आती। आरबीआई की कोशिश है कि बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी बनी रहे और रेपो रेट को आधार बनाकर मौद्रिक नीति लागू की जाए।

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