

Slice Small Finance Bank MD Rajan Bajaj: भारत में रिवोल्यूट और नुबैंक जैसे वैश्विक डिजिटल बैंकों की तर्ज पर बैंकिंग मॉडल किसी फिनटेक कंपनी की बजाय लाइसेंस प्राप्त बैंक के भीतर विकसित होगा। स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक (Slice Small Finance Bank) के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजन बजाज का मानना है कि केवल दूसरे बैंकों के उत्पाद वितरित करने वाला फिनटेक मॉडल इस तरह के बैंक का विकल्प नहीं बन सकता।
बजाज के मुताबिक, भारत में रिवोल्यूट या नुबैंक जैसा संस्थान खड़ा करने के लिए बैंकिंग लाइसेंस जरूरी है। उपभोक्ता ऋण देने वाले उनके स्टार्टअप स्लाइस का अक्टूबर 2024 में नॉर्थ ईस्ट स्मॉल फाइनेंस बैंक के साथ विलय हुआ था। इसके बाद स्लाइस बैंकिंग कारोबार में आया। अब कंपनी भुगतान, बचत और कर्ज, तीनों जरूरतों के लिए ग्राहकों का प्राथमिक बैंक बनना चाहती है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्लाइस तकनीक के सहारे ग्राहक जोड़ने, सेवा देने और उनकी ऋण चुकाने की क्षमता का आकलन करने पर जोर दे रहा है। कंपनी की योजना मौजूदा ग्राहकों को अधिक उत्पाद उपलब्ध कराने की भी है। इससे परिचालन लागत घटाने और प्रति ग्राहक आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है, जिससे बेहतर ब्याज दरों और रिवार्ड की पेशकश की गुंजाइश बनेगी।
बजाज के अनुसार, कंपनी की प्रतिस्पर्धा का केंद्र बैंकिंग व्यवस्था में मौजूद अक्षमताओं को दूर करना है। शाखाओं का संचालन, ग्राहक जुटाना और उन्हें सेवाएं देना महंगा पड़ता है। इसके अलावा, कर्ज लेने वालों की भुगतान क्षमता का सही आकलन करना भी एक बड़ी चुनौती है।
तकनीक पर नियंत्रण इस रणनीति का अहम हिस्सा है। बजाज ने बताया कि स्लाइस ने अपना कोर बैंकिंग सिस्टम विकसित करने में तीन साल लगाए। इससे उत्पादों में तेजी से बदलाव करना संभव हुआ है और बाहरी विक्रेताओं पर निर्भरता घटी है। कंपनी ने वीडियो आधारित ग्राहक पहचान यानी केवाईसी प्रणाली भी खुद विकसित की है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एजेंट संभावित म्यूल खातों के आवेदनों की पहचान करते हैं। ऐसे खाते दूसरों के धन के लेन-देन के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। बजाज के मुताबिक, स्लाइस अब हर महीने करीब 5 लाख खाते खोल रहा है।
कंपनी उन इलाकों में अपनी भौतिक मौजूदगी बनाए रखेगी, जहां ग्राहकों को शाखा की जरूरत है। वहीं, अन्य जगहों पर शाखाओं से जुड़ी अनावश्यक लागत से बचने की कोशिश होगी।
फिनटेक से बैंक बनने के सफर में जमा राशि बढ़ाना स्लाइस के लिए अहम रहा है। मार्च 2026 के अंत तक बैंक की कुल जमा राशि बढ़कर 5,132.6 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले 2,418.4 करोड़ रुपये थी। इस दौरान बैंक की उधारी 1,139.5 करोड़ रुपये से घटकर 822 करोड़ रुपये रह गई।
वित्त वर्ष 2025-26 में बचत खातों में जमा राशि लगभग चार गुना बढ़कर 1,871.5 करोड़ रुपये पहुंच गई। मार्च 2026 के अंत में चालू और बचत खातों (CASA) की कुल जमा में हिस्सेदारी 39.9 प्रतिशत रही।
स्लाइस बचत खातों पर सालाना 5.5 प्रतिशत ब्याज दे रहा है। यह दर भारतीय रिजर्व बैंक की मौजूदा रेपो दर के बराबर है और ब्याज रोजाना खाते में जमा किया जाता है। इस पेशकश के जरिए बैंक ग्राहकों को आकर्षित करने और खुदरा जमा आधार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
बजाज ने कहा कि कुछ बैंक बचत खातों पर ऊंची ब्याज दर का प्रचार करते हैं, लेकिन वह दर ग्राहक की पूरी जमा राशि पर लागू नहीं होती। उदाहरण के लिए, सात प्रतिशत ब्याज का दावा करने वाला बैंक पहले पांच लाख रुपये पर केवल 2.5 प्रतिशत ब्याज दे सकता है और सात प्रतिशत की दर इससे अधिक की राशि पर लागू हो सकती है। ऐसे में छह लाख रुपये जमा रखने वाले ग्राहक को सात प्रतिशत ब्याज केवल एक लाख रुपये पर मिलेगा।
ग्राहकों की जमा राशि का इस्तेमाल अब स्लाइस कर्ज देने के लिए कर रहा है, जिससे उधारी पर निर्भरता कम हुई है। हालांकि, वित्त वर्ष 2025-26 में जमा की औसत राशि के अनुपात में ब्याज खर्च यानी जमा की लागत 7.12 प्रतिशत पर लगभग स्थिर रही।
कासा जमा बढ़ने के बावजूद लागत में कमी नहीं आने की वजह बताते हुए बजाज ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट स्मॉल फाइनेंस बैंक के साथ विलय के बाद स्लाइस को अपने पुराने ऋण कारोबार से महंगा कर्ज विरासत में मिला था। इससे लागत पर दबाव पड़ा। उन्होंने कहा कि अब जमा की लागत कम हुई है, हालांकि इसके सटीक आंकड़े साझा नहीं किए।
स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक ने नवंबर 2025 में कारोबारियों के लिए अपना बिजनेस ऐप शुरू किया था। इसके जरिए चालू खाते, क्यूआर कोड, साउंडबॉक्स और बिना जमानत के 10 लाख रुपये तक का कर्ज उपलब्ध कराया जाता है। बैंक की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, ऐप शुरू होने से मार्च 2026 तक कारोबारियों ने इसके जरिए 6,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया। मार्च में कारोबारियों को दिए गए कर्ज का मासिक वितरण 162 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
बजाज के अनुसार, कारोबारी बेहतर सेवाएं या कम शुल्क देने वाले बैंक के बजाय अक्सर नजदीकी शाखा को प्राथमिकता देते हैं। यह उपभोक्ता बैंकिंग की तुलना में कारोबारी बैंकिंग में सीमित प्रतिस्पर्धा को दिखाता है। स्लाइस कारोबारियों को अपने भुगतान प्लेटफॉर्म और चालू खातों से जोड़ना चाहता है। इसके बाद लेन-देन के रिकॉर्ड और उपलब्ध वस्तु एवं सेवा कर (GST) संबंधी आंकड़ों के आधार पर उनकी ऋण चुकाने की क्षमता का आकलन कर कर्ज देने की योजना है।
कर्ज और भुगतान सेवाओं से आगे बढ़ते हुए स्लाइस संपत्ति प्रबंधन से जुड़े उत्पाद और बीमा वितरण सेवाएं भी शुरू करना चाहता है। इससे शुल्क आधारित आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। बजाज के मुताबिक, बैंक की आय में गैर-ब्याज आय की हिस्सेदारी करीब 42 प्रतिशत है। उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह आंकड़ा किस अवधि का है। उनका कहना है कि शुल्क आधारित उत्पादों का दायरा बढ़ने के साथ उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने वाली सेवाएं भी बढ़ेंगी और आगे चलकर ये उत्पाद कारोबारियों के लिए भी उपलब्ध होंगे।
वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही में स्लाइस की ब्याज आय बढ़कर 291.5 करोड़ रुपये रही, जबकि इससे पिछली मार्च तिमाही में यह 275.4 करोड़ रुपये थी। शुल्क, कमीशन और बट्टे खाते में डाले गए कर्ज की वसूली सहित अन्य आय 124.3 करोड़ रुपये से घटकर 122.3 करोड़ रुपये रह गई। इससे पता चलता है कि तिमाही आधार पर आय में वृद्धि मुख्य रूप से ब्याज से हुई कमाई के कारण रही, न कि गैर-ब्याज आय के चलते।
स्लाइस ने वित्त वर्ष 2025-26 में 48.4 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया। इससे पिछले वित्त वर्ष में बैंक को 216.7 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। इस दौरान कुल आय 603.8 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,402.7 करोड़ रुपये हो गई। हालांकि, दोनों वित्त वर्षों के आंकड़ों की तुलना सावधानी से करनी होगी। वित्त वर्ष 2025-26 में विलय किए गए कारोबार का पूरे साल का प्रदर्शन शामिल है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में इसे केवल 27 अक्टूबर 2024 से शामिल किया गया था।
बजाज का कहना है कि तकनीक पर शुरुआती निवेश से बैंक अधिक ग्राहकों को सेवा दे सकेगा, जबकि लागत में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं होगी। कारोबार बढ़ने के साथ परिचालन दक्षता का लाभ भी मिलेगा। उनके मुताबिक, मुनाफा बैंक की स्थिरता को लेकर ग्राहकों का भरोसा मजबूत करने में मदद करता है।
वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही में बैंक का शुद्ध लाभ दोगुने से अधिक बढ़कर 50.9 करोड़ रुपये हो गया, जो वित्त वर्ष 2025-26 की मार्च तिमाही में 20.4 करोड़ रुपये था। इस दौरान परिचालन खर्च 249.1 करोड़ रुपये से घटकर 226.1 करोड़ रुपये रह गया।
हालांकि, कर्ज कारोबार बढ़ने के साथ खराब ऋणों पर नियंत्रण बनाए रखना भी बैंक के सामने चुनौती है। जून तिमाही के अंत में सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) अनुपात मार्च तिमाही के 4.8 प्रतिशत से घटकर 4.4 प्रतिशत रहा। इसके बावजूद सकल खराब कर्ज की राशि 217.8 करोड़ रुपये से बढ़कर 222.5 करोड़ रुपये हो गई। वित्त वर्ष 2025-26 में स्लाइस ने 104.9 करोड़ रुपये के खराब कर्ज को तकनीकी रूप से बट्टे खाते में डाला और पहले बट्टे खाते में डाले गए खातों से 33.3 करोड़ रुपये की वसूली की।
बजाज ने कहा कि स्लाइस 2028 तक आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने की तैयारी में है और योजना के मुताबिक आगे बढ़ रहा है। कंपनी का दीर्घकालिक लक्ष्य ग्राहकों का प्राथमिक बैंक बनना है।