प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों को मिला कानूनी अधिकार, शिफ्ट खत्म होने पर इग्नोर कर सकते है बॉस का कॉल

ऑस्ट्रेलिया में प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए एक नया कानून लाया गया है, जिसमें उनके पास ये अधिकार हो सकता है। इस कानूनी अधिकार के अंतर्गत कर्मचारी शिफ्ट खत्म होने के बाद अपने बॉस का कॉल या ईमेल इग्नोर कर सकते हैं।
Private Sector employees gets right to ignore boss call after shift end
प्राइवेट सेक्टर ( सौजन्य : सोशल मीडिया )
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नई दिल्ली : अक्सर हमने प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को वर्कलोड की शिकायत करते हुए सुना है। कभी- कभी तो उन्हें अपने काम के तय घंटों से भी ज्यादा काम करना पड़ता है। साथ ही इस सेक्टर से जुड़े कर्मचारियों की ये भी शिकायत रहती है कि उन्हें शिफ्ट खत्म होने के बाद भी उनके बॉस कॉल करके परेशान करते है।

अगर आप भी इस समस्या से परेशान है, तो हम आपको एक राहत भरी खबर सुनाते है। इस खबर को सुनकर आप खुश हो सकते है, क्योंकि अब प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के पास शिफ्ट खत्म होने के बाद बॉस का कॉल इग्नोर करने का कानूनी अधिकार है।

ऑस्ट्रेलिया में लागू हुआ कानून

आपको बता दें कि ऑस्ट्रेलिया में प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को ये कानूनी अधिकार मिल गया है, जिसके तहत वो शिफ्ट खत्म होने के बाद ऑफिस के बॉस और सीनियर्स का कॉल व ईमेल इग्नोर कर सकते है। अब अगर आप शिफ्ट खत्म होने के बाद अपने बॉस का कॉल या ईमेल इग्नोर करते है, तो आपको वो इसके लिए प्रताड़ित नहीं कर सकते है।

कानून लागू होने के बाद छिड़ी बहस

ऑस्ट्रेलिया में इस कानून की एंट्री के बाद से ही नई बहस शुरू हो गई है। जहां कानून के समर्थक इसे अच्छा बता रहे है, तो इस कानून के आलोचकों की भी कोई कमी नहीं है। जो लोग इस कानून के खिलाफ है, उनका कहना है कि इस कानून के लागू होने के बाद प्रोडक्टिविटी पर इसका दुष्प्रभाव हो सकता है। साथ ही इस कानून के पक्ष में जो लोग है, वो इसका समर्थन करते हुए कह रहे है कि इसके लागू होने के बाद कर्मचारी अपनी वर्क लाइफ और पर्सनल लाइफ आराम से बैलेंस कर सकते हैं। कोरोना काल के बाद से ही इस सेक्टर के कर्मचारियों की वर्कलाइफ काफी प्रभावित हुई थी। कर्मचारियों को शिफ्ट खत्म होने के बाद भी काम करना पड़ता था।

इससे पहले भी हुए है कई बदलाव

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि कर्मचारियों के वर्क लाइफ को बैलेंस करने के लिए कानूनी कदम उठाया गया है। इससे पहले भी कर्मचारियों के काम का समय तय नहीं था, लेकिन श्रम संगठनों की डिमांड तेज होने के बाद सारे देशों में इसको लेकर कानून बताया गया है और इस कानून के तहत ही काम करने के घंटें तय किए गए थे।

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