ट्रंप के ‘पीस पॉज’ से ग्लोबल मार्केट में जश्न! कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट; आपकी जेब पर क्या असरट्रंप
Donald Trump: घोषणा के बाद बाजारों ने भी तुरंत प्रतिक्रिया दी। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स लगभग दो प्रतिशत तक बढ़ गए, जिससे पहले की गिरावट की भरपाई हो गई।
- Written By: मनोज आर्या
अमेरिकी राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रंप, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Donald Trump Iran Strike Pause: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान पर हमले टालने के फैसले के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आई और बाजारों में तेजी देखी गई। भारत की नजर इस घटनाक्रम पर बनी हुई है, क्योंकि इसका आर्थिक असर पड़ सकता है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर कहा कि अमेरिका, ईरान के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले पांच दिनों के लिए रोक देगा। उन्होंने तेहरान के साथ संघर्ष खत्म करने को लेकर हुई बातचीत को ‘बहुत अच्छी और सार्थक बातचीत’ बताया।
उन्होंने कहा कि यह रोक चल रही बैठकों और चर्चाओं की सफलता पर निर्भर रहेगी। यह इस बात का संकेत है कि तीन हफ्ते से चल रहे इस युद्ध में कूटनीतिक समाधान की कोई गुंजाइश बन सकती है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह घोषणा फरवरी के अंत से जारी युद्ध के बाद पहली बार उच्च-स्तरीय बातचीत की पुष्टि करती है।
100 डॉलर से नीचे ब्रेंट क्रूड
घोषणा के बाद बाजारों ने भी तुरंत प्रतिक्रिया दी। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स लगभग दो प्रतिशत तक बढ़ गए, जिससे पहले की गिरावट की भरपाई हो गई। वॉशिंगटन पोस्ट ने बताया कि वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर 100 डॉलर से नीचे आ गई। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, यूरोपीय बाजार भी शुरुआती गिरावट के बाद सकारात्मक हो गए, जबकि क्रिप्टोकरेंसी में भी तेजी आई, क्योंकि निवेशकों का भरोसा बेहतर हुआ।
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होर्मुज के लिए अच्छी खबर
विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए ऊर्जा आपूर्ति बहाल करने में मदद कर सकता है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक अहम मार्ग है। हालांकि, अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। ईरान से जुड़े मीडिया ने ट्रंप की घोषणा को पीछे हटना बताया, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि इस बयान से पहले कोई सीधी या मध्यस्थता वाली बातचीत नहीं हुई थी।
उर्जा संकट का दुनियाभर में असर
इस संघर्ष का असर पहले ही वैश्विक ऊर्जा ढांचे पर पड़ा है। ईरानी मिसाइल हमलों में कतर के एक बड़े गैस-टू-लिक्विड्स प्लांट को नुकसान पहुंचा, जिससे उसका एक हिस्सा कम से कम एक साल के लिए बंद हो गया। बढ़ती ईंधन कीमतों का असर अर्थव्यवस्थाओं पर दिखने लगा है। अमेरिका में डीजल की कीमतें एक महीने में 40 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गई हैं, जिससे सप्लाई चेन और उपभोक्ता कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
बॉन्ड बाजारों में उतार-चढ़ाव
सोमवार को तेजी के बावजूद निवेशक सतर्क बने हुए हैं। इस संघर्ष ने बॉन्ड बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ाया है, और बढ़ती महंगाई के जोखिम के बीच ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें भी तेज हो गई हैं। भारत के लिए तेल की कीमतों में गिरावट तुरंत राहत लेकर आई है। दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक होने के कारण, भारत कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति बेहद संवेदनशील है। कम तेल की कीमतें महंगाई को कम कर सकती हैं और सरकार के वित्तीय दबाव को घटा सकती हैं।
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साथ ही, खाड़ी क्षेत्र की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। लाखों भारतीय वहां काम करते हैं, और किसी भी तरह की बढ़ोतरी उनके रोजगार और भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण रेमिटेंस पर असर डाल सकती है।
