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दिवाली के पर्व को लोग निवेश आरंभ करने के लिए सबसे उपयुक्त समय मानते हैं।
इस दिन नए संवत का आरंभ होता है। दिवाली 2026 से संवत 2083 की शुरुआत होगी।
इसी कारण इस दिन को निवेश आरंभ करने के लिए शुभ माना जाता है।
Muhurat Trading 2026: दिवाली के पर्व को लोग निवेश आरंभ करने के लिए सबसे उपयुक्त समय मानते हैं। इस दिन नए संवत का आरंभ होता है। दिवाली 2026 से संवत 2083 की शुरुआत करेगा। इसी कारण इस दिन को निवेश आरंभ करने के लिए शुभ माना जाता है।
जैसा हर साल होता है, इस बार भी भारतीय शेयर बाजार में स्पेशल मुहूर्त ट्रेडिंग का आयोजन किया जाएगा। रविवार, 8 नवंबर को दोपहर 2:20 बजे से 3:30 बजे तक BSE और NSE में यह सांकेतिक ट्रेडिंग होगी।
शेयर बाजार में रविवार को सामान्यतः साप्ताहिक अवकाश होता है, लेकिन मुहूर्त ट्रेडिंग के लिए इस दिन विशेष विंडो खोली जाती है। इस विशेष सत्र में आम कारोबारी दिनों की तुलना में वॉल्यूम भले ही कम होता है, लेकिन इसका प्रतीकात्मक महत्व अत्यधिक होता है। छोटे और रिटेल निवेशकों से लेकर बड़े संस्थागत निवेशक तक इस दौरान खरीदारी कर अपनी समृद्धि की कामना करते हैं।
रविवार, 8 नवंबर को दोपहर 2:20 बजे से 3:30 बजे तक यानी कुल 70 मिनट के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में कारोबार होगा। बाकी समय के लिए बाजार बंद रहेगा।
पिछले 10 वर्षों के ट्रेडिंग सेशन के प्रदर्शन को देखें तो अधिकांश वर्षों में बाजार में तेजी देखी गई है। इन 10 वर्षों में 8 बार निफ्टी हरे निशान पर बंद हुआ है। हालांकि, यह बढ़त अधिक नहीं होती है और आमतौर पर बाजार 1 प्रतिशत से कम की रेंज में बंद होता है। हाल के वर्षों में, 2022 का स्पेशल मुहूर्त ट्रेडिंग सेशन सबसे मजबूत रहा।
इस समय इंडेक्स में 0.88% की बढ़त देखी गई थी। पिछले साल 2025 में 21 अक्टूबर को हुए सत्र में भी बाजार हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ था। वहीं, अगर रिकॉर्ड की बात करें तो 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के समय 28 अक्टूबर को बाजार ने लगभग 6% की ऐतिहासिक बढ़त दर्ज की थी।
संवत 2082 भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। मिडिल ईस्ट में जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गईं, जिसके परिणामस्वरूप मार्च महीने में निफ्टी में 11.3% की गिरावट दर्ज की गई।
रुपये की कमजोरी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और महंगाई पर काबू पाने के लिए रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट को 5.50% तक बढ़ाने जैसे कदमों ने निवेशकों को चिंतित कर दिया था। विदेशी निवेशकों (FPIs) ने 3.3 लाख करोड़ रुपये यानी लगभग 35 अरब डॉलर की ऐतिहासिक बिकवाली की थी।