महाराष्ट्र में महंगी हुई शराब लेकिन घटे बियर और वाइन के दाम, रॉकेट की रफ्तार से उछले सुला वाइनयार्ड्स के शेयर
10 जून के दिन महाराष्ट्र सरकार ने शराब पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का फैसला लिया है। जिसके बाद से राज्य में शराब की कीमतों में बढ़त होने वाली है और साथ ही बीयर और वाइन की कीमतों को इस टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
शराब (सौ. सोशल मीडिया )
महाराष्ट्र सरकार ने शराब पर एक्साइज ड्यूटी में बढ़त करने का फैसला लिया है, जिसके चलते राज्य के शराबियों को तगड़ा झटका लगा है। इतना ही नहीं इस कारण शराब बनाने वाली कंपनियों के शेयरों पर भी इसका सीधा असर हुआ है। हालांकि एक राहत की खबर ये है कि बियर और वाइन बनाने वाली कंपनियों को इसका फायदा हुआ है।
राज्य सरकार ने बियर और वाइन को इस कटौती से बाहर रखकर कंपनियों और वाइन के शौकिनों को बड़ी राहत दी है। जिससे ये बात साफ हो गई है कि बियर और वाइन की कीमतों में किसी भी प्रकार की कोई बढ़त नहीं होने वाली हैं। यही कारण है कि इन दोनों लिकर बनाने वाली कंपनियों के शेयरों को रॉकेट की रफ्तार मिल गई है।
बियर और वाइन के नहीं बढ़ेगें दाम
महाराष्ट्र सरकार बियर और वाइन दोनों को एक्साइज ड्यूटी से बाहर रखने के फैसले के बाद से ही सुला वाइनयार्ड्स लिमिटेड, जीएम ब्रुअरीज लिमिटेड के शेयरों में भारी उछाल देखने के लिए मिल रहा है। सुला वाइनयार्ड्स के शेयरों में 13 प्रतिशत और जीएम ब्रुअरीज के शेयरों में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़त हासिल की गई है।
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आपको बता दें कि एक्साइज ड्यूटी में बढ़त होने के बाद रिटेल शॉप्स के साथ ही रेस्टॉरेंट और बार दोनों में ही शराब महंगी हो जाएगी। हालांकि, बीयर और वाइन को इस टैक्स कैटेगरी से दूर रखा गया हैं। बीयर में हार्ड लिकर के मुकाबले में अल्कोहल की क्वांटिटी कम होती है, यही कारण है कि इसे छूट मिली है।
इतनी महंगी होगी शराब
दूसरी ओर भारत में बनने वाली विदेशी शराब पर एक्साइज ड्यूटी लगने के बाद इसकी कीमत और भी ज्यादा बढ़ जाएंगी। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बनने वाली विदेशी शराब पर टैक्स कॉस्ट की तुलना में 3 गुना से बढ़ाकर 4.5 गुना किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में तैयार की गई विदेशी शराब के लिए अधिकतम सीमा 260 रुपये प्रति बल्क तय की गई है। वहीं दूसरी ओर देसी कंपनी की शराब पर टैक्स को 180 रुपये से बढ़कर 205 रुपये प्रति बल्क लीटर तक कर दिया गया है।
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कमाई पर पड़ेगा असर
आपको बता दें कि इस इंडस्ट्री के वॉल्यूम में महाराष्ट्र का योगदान 10 से 12 प्रतिशत का है। देश की सबसे बड़ी लीकर यूनाइटेड स्पिरिट्स की टोटल सेल्स में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 20 से 22 प्रतिशत तक की है। वहीं दूसरी ओर रेडिको खेतान की टोटल सेल्स में महाराष्ट्र का योगदान 7 से 8 प्रतिशत तक देखने के लिए मिलता है। बताया जा रहा है कि टैक्स बढ़ने के कारण कंपनियों के ईपीएस पर प्रेशर देखने के लिए मिल सकता है। एक्सपर्ट्स की मानी जाए, तो यूनाइटेड स्पिरिट्स के ईपीएस पर 6 से 8 प्रतिशत का प्रेशर देखने के लिए मिलता है। साथ ही रेडिको खेतान के ईपीएस पर 2 से 3 प्रतिशत का असर देखने के लिए मिल सकता है।
