काम करने का बदला तरीका, लिंक्डइन ने वर्क नेचर को लेकर की स्टडी

प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म लिंक्डइन की एक स्टडी में भारत के 82 प्रतिशत बिजनेस टायकून इस बात से सहमत हैं कि कामकाज में बदलाव की रफ्तार तेज होने की बात को स्वीकारा है।
LinkedIN Study on Change in nature of work
लिंक्डइन (सौजन्य : सोशल मीडिया)
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नई दिल्ली : ऑफिस में रोजगार के परदृश्य में असमान रुप से बदलाव होता दिखायी दे रहा है। अह हालत ये है कि इस साल ग्लोबल लेवल पर नियुक्त किया गया हर दसवां कर्मचारी ऐसे पद पर काम कर रहा है, जिसका साल 2000 में कोई नामों निशान भी नहीं था। इस नए युग में समय के हिसाब से पैदा हुई इन जॉब्स में सस्टेनेबिलिटी मैनेजर, एआई इंजीनियर और सोशल मीडिया मैनेजर जैसे पदों का भी समावेश हैं।

प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म लिंक्डइन की तरफ से वर्क नेचर में बदलाव पर किए गए स्टडी से यह जानकारी सामने आई है। इसके मुताबिक, अब ऑफिस स्पेस पर सस्टेनेबिलिटी मैनेजर, एआई इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट, सोशल मीडिया मैनेजर और कस्टमर सक्सेस मैनेजर जैसी भूमिकाएं बहुत कॉमन हो गई हैं।

नई टेक्नोलॉजी का उदय

कृत्रिम मेधा यानी एआई जैसी नई टेक्नोलॉजी का उदय और टिकाऊ प्रवृत्ति पर बढ़ता ध्यान नई रोजगार भूमिकाओं की डिमांड के पीछे प्रमुख कारण हैं। यह स्टडी दुनिया भर के 5,000 से ज्यादा बिजनेस टायकून के बीच कराए गए सर्वे पर आधारित है।

लिंक्डइन की स्टडी

लिंक्डइन ने इस स्टडी में पाया है कि भारत के 82 प्रतिशत बिजनेस टायकून इस बात से सहमत हैं कि कामकाज में बदलाव की रफ्तार तेज हो रही है। इसकी वजह यह है कि नई भूमिकाओं, स्कील्स और टेक्नोलॉजी की डिमांड बढ़ रही है।

एआई की ट्रांसफॉर्मेटिव क्षमता को स्वीकारा

ग्लोबल बिजनेस टायकून ने जनरेटिव एआई की ट्रांसफॉर्मेटिव क्षमता को स्वीकार किया है। 10 में से 7 बिजनेस टायकून ने साल 2025 में एआई टूल को अपने ऑपरेशन में अपनाने को में सबसे ज्यादा प्राथमिकता बताया है।

सिर्फ रफ्तार से संबंधित नहीं

लिंक्डइन टैलेंट सॉल्यूशंस की भारत प्रमुख रुचि आनंद ने कहा है कि कंपनियां 2025 में एआई को तेजी से अपनाने पर जोर दे रही हैं। वे अपने कर्मचारियों को बेहतर बनाने और उन्हें फिर से स्किल्ड बनाने में भी सार्थक इंवेस्टमेंट कर रही हैं। एआई को अपनाना सिर्फ रफ्तार से संबंधित नहीं है, यह टीमों को सशक्त बनाने, इनोवेशन को बढ़ावा देने और सफल होने के लिए तैयार लचीले वर्कफोर्स बनाने के बारे में भी है।

एआई को अपनाने की क्षमता

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 69 प्रतिशत मानव संसाधन पेशेवरों को लगता है कि काम पर उनसे अपेक्षाएं पहले से अधिक हो चुकी हैं। वहीं 60 प्रतिशत पेशेवरों का कहना है कि सिर्फ अनुभव अब प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए पर्याप्त नहीं है और करियर में आगे बढ़ना काफी कुछ एआई को अपनाने की क्षमता पर निर्भर करता है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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