

Laxmi Mittal Birthday Special: देश के जाने-माने कारोबारी लक्ष्मी मित्तल आज अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। 15 जून, 1950 को राजस्थान के चुरू जिले के एक गांव में उनका जन्म हुआ था। लक्ष्मी मित्तल को आज 'स्टील किंग' के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि स्टील उद्योग में भारत के बाहर भी उनका कारोबार काफी सफल रहा है। वे दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी स्टील बनाने वाली कंपनी आर्सेलर मित्तल के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं। इसके साथ ही स्टेनलेस स्टील बनाने वाली कंपनी एपराम के चेयरमैन भी हैं।
लक्ष्मी मित्तल के पास आर्सेलर मित्तल की 38 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) टीम राजस्थान रॉयल्स में भी वह 75 प्रतिशत के हस्सेदार हैं। इसके अलावा ईएफएल चैम्पियनशिप फुटबॉल क्लब क्वींस पार्क रेंजर्स में तीन प्रतिशत के मालिक हैं। मित्तल फिलहाल स्विट्जरलैंड और संयुक्त अरब अमीरात में रहते हैं। इससे पहले वह 1995 से 2025 तक यूनाइटेड किंगडम में रह रहे थे।
साल 2005 में फोर्ब्स ने मित्तल को दुनिया का तीसरा सबसे अमीर व्यक्ति घोषित किया था, जिससे वे दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सालाना लिस्ट में टॉप-10 में जगह बनाने वाले पहले भारतीय बन गए। 2011 में फोर्ब्स ने उन्हें दुनिया का छठा सबसे अमीर व्यक्ति बताया था, लेकिन मार्च 2015 में वे 82वें स्थान पर आ गए। नेटवर्थ में आई गिरावट की वजह से अक्टूबर 2024 तक वह 130वें स्थान पर रहें। उनकी बेटी वनिशा मित्तल की शादी (जो 2005 में हुई थी) रिकॉर्डेड इतिहास की छठी सबसे महंगी शादी थी।
स्टील किंग के नाम से मशहूर लक्ष्मी मित्तल की गिनती दुनिया के उन अमीर लोगों में होती है, जिन्होंने सबसे महंगे बंगले खरीदे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मित्तल के पास कई आलीशान बंगले, जेट, एक याट, 20 से अधिक महंगी कारें, एक लग्जरी वैनिटी वैन है। हालांकि, मित्तल के जीवन में एक ऐसा समय भी था, जब उनका जीवन बड़े अभाव में बिता था। लक्ष्मी मित्तल के जन्म के दौरान उनके पिता मोहनलाल मित्तल की आर्थिक हालात ठीक नहीं था। आर्थिक तंगी से उभरने के लिए मित्तल के जन्म के दो साल बाद उनके पिता फैमिली सहित कोलकाता चले गए थे। उन्होंने चितपुर रोड पर एक अपार्टमेंट में घर किराए पर लिया था।
कोलकाता में मोहनलाल ने एक फैक्ट्री में नौकरी शुरू की थी। हालांकि, यहां भी उनके हालातों में सुधार नहीं हुआ था। पैसों की तंगी के कारण समय पर फैमिली को खाना नसीब नहीं हो पाता था। परिवार को पालने के लिए मोहनलाल ने ज्यादा मेहनत करनी शुरू की। जब हालातों में कुछ सुधार हुआ तो उन्होंने खुद का बिजनेस शुरू करने की सोची और निप्पन डेनरो इस्पात नाम से बिजनेस शुरू किया। मित्तल का बचपन और पढ़ाई कोलकाता में ही हुई।
दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2007 में जब लक्ष्मी मित्तल परिवार के साथ अपने जन्मस्थान राजस्थान में एक सामुदायिक केंद्र का उद्घाटन करने आए थे। इस दौरान उनके पिता मोहनलाल मित्तल ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा था कि वे अपने गरीबी के दिन नहीं भूले हैं। इस दौरान उन्होंने ये भी बताया था कि उनकी घर की माली हालत इतनी खराब थी कि समय पर खाना तक नहीं मिल पाता था।