JP Morgan का बड़ा दावा: टैक्स सुधारों का ऐसा हो रहा है शेयर बाजार पर असर, जानिए क्यों डटे रहे भारतीय निवेशक
Domestic Investment in Share Market: जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के मुताबिक, टैक्स सुधारों और सरकारी नीतियों के कारण भारतीय परिवारों का भरोसा शेयर बाजार पर बहुत बढ़ा है। घरेलू पैसे के दम पर बाजार मजबूत है।
- Written By: प्रिया जैस
शेयर बाजार (कंसेप्ट फोटो IANS)
JP Morgan Indian Equity Report: जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के मुताबिक, टैक्स सुधारों और सरकारी नीतियों के कारण भारतीय परिवारों का भरोसा शेयर बाजार पर बहुत बढ़ा है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बाद भी घरेलू पैसे के दम पर बाजार मजबूत है। वैश्विक निवेश बैंक जेपी मॉर्गन की एक नई रिपोर्ट में भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) को लेकर बेहद दिलचस्प बातें सामने आई हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में सरकार द्वारा किए गए टैक्स सुधारों और नीतिगत फैसलों ने भारत में शेयर बाजार (इक्विटी) में निवेश को पहले से कहीं ज्यादा आकर्षक बना दिया है। यही वजह है कि पिछले दो साल में बाजार से बहुत धमाकेदार रिटर्न न मिलने के बावजूद, आम भारतीय परिवारों का पैसा लगातार शेयर बाजार में आ रहा है और घरेलू निवेश का प्रवाह मजबूत बना हुआ है।
इक्विटी की तरफ क्यों बढ़ रहा है आम जनता का झुकाव?
जेपी मॉर्गन ने अपनी रिपोर्ट में समझाया है कि लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG), डेट म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पर टैक्स से जुड़े जो नए बदलाव हुए हैं, उन्होंने निवेशकों का रुख बदल दिया है। अब लोग अपनी बचत को ट्रेडिशनल तरीकों से हटाकर फाइनेंशियल एसेट्स यानी शेयर बाजार की तरफ ला रहे हैं।
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फिलहाल शेयर बाजार में निवेश पर 12.5 प्रतिशत का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। वहीं दूसरी तरफ, डेट म्यूचुअल फंड के लिए स्लैब-रेट टैक्स, इंडेक्सेशन बेनिफिट्स का हटना और कुछ खास इंश्योरेंस पॉलिसियों से मिलने वाली रकम पर टैक्स लगने जैसे फैसलों ने समीकरण बदल दिए हैं। अब लोगों को बाकी जगहों के मुकाबले इक्विटी में पैसा लगाना ज्यादा फायदेमंद लग रहा है।
विदेशी निवेशक पीछे हटे, पर भारतीय डटे रहे
रिपोर्ट में एक बेहद हैरान करने वाला आंकड़ा सामने आया है। वित्त वर्ष 2025 और 2026 के दौरान जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार से अपना पैसा निकाला और निवेश कम किया, तब भी भारतीय घरेलू निवेशक घबराए नहीं और बाजार में मजबूती से डटे रहे।
इस दौरान भले ही बेंचमार्क इंडेक्स से निवेशकों को बहुत मामूली या कम रिटर्न मिला, लेकिन आम रिटेल निवेशकों ने सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए अपना निवेश लगातार जारी रखा। जेपी मॉर्गन का कहना है कि यह कोई शॉर्ट-टर्म ट्रेंड नहीं है, बल्कि भारतीयों के निवेश करने के तौर-तरीकों में आया एक बड़ा बुनियादी बदलाव है।
ग्लोबल मार्केट के झटकों से बचा रहा है घरेलू पैसा
आज के समय में घरेलू निवेशकों की यह लगातार बढ़ती भागीदारी भारतीय शेयर बाजार के लिए एक सुरक्षा कवच बन चुकी है। जेपी मॉर्गन के अनुसार, जब भी वैश्विक स्तर पर कोई संकट आता है या विदेशी फंड भारत से पैसा निकालते हैं, तो बाजार में जो भारी उतार-चढ़ाव आ सकता था, उसे यह घरेलू पैसा संभाल लेता है। एसआईपी के जरिए आ रहा यह पैसा बाजार को स्थिरता दे रहा है।
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आईटी सेक्टर को लेकर जेपी मॉर्गन की चेतावनी
एक तरफ जहां जेपी मॉर्गन भारतीय शेयर बाजार को लेकर काफी सकारात्मक है, वहीं दूसरी तरफ उसने भारत के आईटी (IT) सेक्टर को लेकर थोड़ा सावधानी बरतने की सलाह दी है। रिपोर्ट का मानना है कि देश की सूचना प्रौद्योगिकी इंडस्ट्री को आने वाले समय में लंबे समय तक धीमी ग्रोथ यानी सुस्ती का सामना करना पड़ सकता है।
इसकी सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से आ रहे तेजी से बदलाव और दुनिया भर में चल रही भू-राजनीतिक अनिश्चितता है, जिसका सीधा असर नई डिमांड पर पड़ रहा है। टेक्नोलॉजी और बिजनेस साइकिल की इन चुनौतियों के कारण आईटी कंपनियों के सामने आने वाले समय में अनिश्चितता बनी रह सकती है।
