बिजनेसमैन ही नहीं कमाल के पायलट भी थे JRD Tata, जानें कैसे शुरू की पहली एयरलाइन
आज देश के सबसे बड़े बिजनेस ग्रुप टाटा ग्रुप के जेआरडी टाटा की 121वीं जयंती है। जेआरडी टाटा का पूरा नाम जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा था। लेकिन क्या आप जानतें है कि उनसे जुड़े कई अनूठे किस्सें भी हैं?
- Written By: अपूर्वा नायक
जेआरडी टाटा (सौ. सोशल मीडिया )
JRD Tata Birthday Special: इंडियन इंजीनियरिंग के मामले में एविएशन के दिग्गज और भारत के सबसे बड़े बिजनेस ग्रुप टाटा ग्रुप के पूर्व अध्यक्ष जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा की आज 121वीं जयंती मनायी जा रही है। जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा को सभी जेआरडी टाटा के नाम से भी जानते हैं। वे टाटा संस ग्रुप के सबसे युवा चेयरमैन थे।
जेआरडी टाटा मशहूर बिजनेसमैन रतनजी दादाभाई टाटा और उनकी फ्रांसीसी पत्नी सुजैन ब्रिएरे के बेटे थे। उनकी मां के फ्रांस से होने के कारण, उनका अधिकतर बचपन फ्रांस में ही बीता था। हालांकि उन्होंने पढ़ाई के मामले में लंदन, जापान, फ्रांस और भारत जैसे देशों से शिक्षा हासिल की थी।
कब और कैसे हुआ था जे आर डी टाटा का जन्म?
जेआरडी टाटा का जन्म 29 जुलाई, 1904 को फ्रांस के पेरिस शहर में हुआ था। वे उस समय के सबसे बड़ी बिजनेस फैमिली में से एक टाटा परिवार में जन्मे थे। टाटा ग्रुप का नाम क्वालिटी, इनोवेशन और सोशल वर्क के लिए जाना जाता है। इस साल जेआरडी टाटा की 121 वीं जयंती मनायी जाने वाली हैं। आइए जेआरडी टाटा के जीवन से जुड़े कुछ अनकहे और अनसुने किस्सों के बारे में जानते हैं।
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कैसे जेआरडी टाटा बने देश के पहले लाइसेंस हासिल करने वाले पायलट?
15 अक्टूबर, 1932 की सुबह 06:35 बजे कराची के एयरपोर्ट पर सिंगल इंजन वाले हैवीलैंड पस मॉथ प्लेन को एक पायलट ने रनवे पर दौड़ाया और 10 सेकेंड के अंदर ही वो हवाई जहाज हवा से बातें करने लगा। कुछ देर बाद वो प्लेन अहमदाबाद में रुका, जहां बैलगाड़ी पर लादकर प्लेन का फ्यूल लाया गया था। भारत में पैसेंजर फ्लाइट की शुरुआत यहीं से हुई और इस फ्लाइट को उड़ाने वाले शख्स कोई और नहीं बल्कि जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा थे। ये कारनामा करने के बाद वे भारत के पहले कमर्शियल पायलट, पहली एयरलाइंस शुरु करने वाले शख्स, टाटा ग्रुप को 680 करोड़ से 34,000 करोड़ तक पहुंचाने वाले शख्स थे। साथ ही वे देश का पहला कैंसर हॉस्पिटल बनवाने वाले व्यक्ति भी बने थे।
टाटा ग्रुप में कैसे हुई एंट्री?
जेआरडी टाटा ने साल 1925 में बतौर इंटर्न टाटा एंड संस में काम शुरू किया। कड़ी मेहनत, दूरदृष्टि और लगन से साल 1938 में वे भारत के सबसे बड़े इंडस्ट्रियल ग्रुप टाटा एंड के अध्यक्ष बने थे। उन्होंने 14 इंडस्ट्री के साथ ग्रुप के नेतृत्व की शुरूआत की थी और जब 26 जुलाई 1988 को उन्होंने अध्यक्ष पद छोड़ा तब तक टाटा ग्रुप 95 उद्यमों का एक विशाल समूह बन चुका था। उन्होंने कई दशकों तक स्टील, इंजीनियरिंग, ऊर्जा, रसायन के क्षेत्र में टाटा समूह की कंपनियों का निर्देशन किया। बिजनेस सेक्टर में सफलता के साथ-साथ उन्हें उच्च नैतिक मानकों के लिए और कर्मचारियों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से सम्बंधित नीतियों को लागू करने के लिए जाना जाता है। इनमें से कई कार्यक्रमों को भारत सरकार ने बाद में कानून के तौर पर लागू किया।
जब दिलीप कुमार को सिखाया सादगी का सबक
बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर दिलीप कुमार ने अपने जीवन में जेआरडी टाटा से जुड़ा एक किस्सा साझा किया था। उन्होंने बताया कि वे एक बार एयर इंडिया से यात्रा कर रहे थे। उस समय उनके बाजू में एक बुजुर्ग पैसेंजर बैठे हुए थे, जो काफी सादी सिंपल पैंट-शर्ट पहने हुए थे।
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दिलीप कुमार बताते हैं कि वो देखने में काफी मिडिल क्लास व्यक्ति लग रहे थे। वे अखबार देखते हुए खिड़की के बाहर देख रहे थे। मैंने जब उनसे बात करने के इरादे से स्माइल दीं, तो वे भी मुझे देखकर स्माइल कर रहे थे और हैलो बोलकर मेरा अभिवादन किया। बातचीत के दौरान मैंने उनसे पूछ लिया कि क्या वे फिल्में देखते हैं, जिसपर उन्होंने जवाब दिया बेहद कम। जिसके बाद मैंने उन्हें बताया मैं एक अभिनेता हूं। जब फ्लाइट लैंड हुई तो मैंने उनसे हाथ मिलाते हुए कहा मैं दिलीप कुमार हूं। जिसके बाद उन्होंने थैंक्यू कहा और बोले मेरा नाम जेआरडी टाटा है। इस घटना के बाद मुझे ये सबक मिली कि आप चाहे कितने ही बड़े क्यों ना हो जाए, कोई आपसे भी बड़ा आदमी हो सकती है। इसीलिए विनम्र रहें, इसमें किसी का कुछ खर्च नहीं होता।
