रुपये में ऐतिहासिक उछाल, 12 साल की सबसे बड़ी तेजी के साथ 2% चढ़ा रुपया; RBI के इस फैसले ने बदला खेल

Indian Rupee: भारतीय रुपये में इस तरह की तेज बढ़त आखिरी बार एक दशक से अधिक पहले सितंबर 2013 में देखने को मिली थी। तब RBI के आपातकालीन कदमों ने मुद्रा को स्थिर किया था।
indian rupee surge 2 percent against dollar
डॉलर vs रुपये, (सोर्स- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस)
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Indian Rupee Surge against US Dollar: मीडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में गुरुवार, (2 अप्रैल) को जोरदार तेजी देखी गई। जहां रुपया खुलते ही 1.4 प्रतिशत मजबूत होकर डॉलर के मुकाबले 93.53 पर पहुंच गया। इसी के साथ रुपये ने 2013 के बाद एक दिन की अपनी सबसे बड़ी बढ़त दर्ज की। तब आरबीआई ने रुपये को स्थिरता देने के लिए असाधारण कदम उठाए थे। दोपहर के दौरान भारतीय करेंसी 2 फीसदी से अधिक की उछाल के साथ डॉलर के मुकाबले 92.8350 पर पहुंच गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सेशन में यह 95.21 के रिकॉर्ड लो लेवल तक चला गया था।

रुपये में इस तरह की तेज बढ़त आखिरी बार एक दशक से अधिक पहले सितंबर 2013 में देखने को मिली थी। तब RBI के आपातकालीन कदमों ने मुद्रा को स्थिर किया था और फेडरल रिजर्व के टेपरिंग कार्यक्रम में अप्रत्याशित राहत मिलने से रुपये को सहारा मिला था। आखिर में भारतीय रुपया 1.8% उछलकर 93.10 पर बंद हुआ।

डॉलर के मुकाबले रुपये में तेजी की वजह?

आरबीआई ने बैंकों को रुपये के ऑफशोर कारोबार के सबसे लोकप्रिय साधन की पेशकश करने से रोक दिया है। इससे 149 अरब डॉलर प्रतिदिन के बाजार पर दबाव पड़ सकता है। यह कदम गिरती मुद्रा को संभालने के लिए उठाया गया एक कड़ा उपाय माना जा रहा है। RBI ने सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने और रुपये को सहारा देने के लिए एक दशक में सबसे सख्त कदमों में से कुछ लागू किए हैं। इस साल रुपये लगातार रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच रहा है और ईरान युद्ध के बाद इस पर दबाव और बढ़ गया है।

पहला कदम शुक्रवार देर रात उठाया गया, जब नियामकों ने बैंकों की दैनिक ऑनशोर मुद्रा पोजीशन को 10 करोड़ डॉलर तक सीमित कर दिया। इस फैसले के बाद बैंकों को कम से कम 30 अरब डॉलर के आर्बिट्राज सौदों को समेटने के लिए मजबूर होना पड़ा।

RBI की इस चाल से Indian Rupee में तेजी

जब इससे भी रुपये की गिरावट नहीं थमी और यह नए निचले स्तर पर पहुंच गया, तो बैंकों को कुछ नॉन-डिलीवेरेबल डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की पेशकश करने से रोक दिया गया। यह बाजार ऑफशोर में औसतन 149 अरब डॉलर प्रतिदिन का है, जो ऑनशोर बाजार के मुकाबले लगभग दोगुना है।

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