Commercial Fuel Rules: 1 जुलाई से लागू होंगे नए पेट्रोल-डीजल नियम, खरीदारों को मिलेगी भारी राहत

Commercial Fuel Rules: भारत सरकार ने 1 जुलाई 2026 से कमर्शियल ग्राहकों के लिए पेट्रोल और डीजल खरीद पर लगी पाबंदी हटा दी है। सभी व्यावसायिक खरीदार अब बिना लिमिट ईंधन ले सकेंगे।
Fuel Rules: India Deregulates Commercial Petrol and Diesel Sales Effective From July 1st
कमर्शियल ग्राहकों के लिए पेट्रोल-डीजल खरीद पर पाबंदी हटी (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Commercial Fuel Rules India Update: कमर्शियल ईंधन के नियम के तहत भारत में ईंधन बिक्री से जुड़ा बड़ा बदलाव हुआ है। केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2026 से पेट्रोल और डीजल खरीद पर लगे अस्थायी प्रतिबंध हटा दिए हैं। अब कमर्शियल खरीदार रिटेल पेट्रोल पंप से बिना मात्रा सीमा के अपना ईंधन खरीद सकेंगे। पश्चिम एशिया संकट के दौरान तेल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए यह रोक लगाई गई थी।

पहले ट्रांसपोर्ट कंपनियों, फैक्ट्रियों और उद्योगों को रिटेल पंपों से पेट्रोल-डीजल लेने में परेशानी होती थी। अब यह कमर्शियल उपभोक्ता बिना रोक-टोक पेट्रोल पंपों से आसानी से ईंधन ले सकेंगे। यह फैसला वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिति सामान्य होने के बाद भारत सरकार द्वारा लिया गया है। इस नियम से देश भर के ट्रांसपोर्टरों और व्यावसायिक संस्थानों को काफी बड़ी राहत मिलेगी।

पाबंदी लगाने का मुख्य कारण

जून 2026 में पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के कारण कच्चे तेल और ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। सरकार को आशंका थी कि देश में पेट्रोल और डीजल की भारी कमी न पैदा हो जाए। इसलिए आपातकालीन कदम उठाते हुए व्यावसायिक खरीदारों के बड़ी मात्रा में ईंधन खरीदने पर रोक लगा दी गई थी। इसका उद्देश्य आम लोगों के लिए पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता बनाए रखना और जमाखोरी को रोकना था।

डीजल की कीमतों में बड़ा अंतर

इस फैसले के पीछे एक और बड़ी वजह डीजल की कीमतों में भारी अंतर का होना भी था। औद्योगिक ग्राहकों को मिलने वाला डीजल खुदरा कीमत की तुलना में 40 रुपये प्रति लीटर महंगा था। ऐसे में कई कंपनियां महंगे औद्योगिक डीजल की बजाय सीधे पेट्रोल पंपों से सस्ता डीजल खरीदने लगी थीं। इसका असर यह हुआ कि सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर डीजल की डिमांड बहुत ज्यादा बढ़ गई।

1 लाख सरकारी पंपों पर भारी दबाव

इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम देश के लगभग 90 प्रतिशत तेल बाजार को चलाती हैं। ये तीनों सरकारी तेल कंपनियां देश भर में एक लाख से अधिक पेट्रोल पंप संचालित करती हैं। सस्ता डीजल होने के कारण इन पंपों पर डिमांड बढ़ने से फ्यूल सप्लाई पर भारी दबाव देखा गया। वहीं दूसरी तरफ बाजार आधारित कीमतों पर ईंधन बेचने वाली निजी कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर बिक्री काफी कम रही।

हालात सामान्य होने से राहत

भारत अपनी जरूरत के लिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय संकट का असर होता है। अब पश्चिम एशिया में हालात सामान्य हो चुके हैं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति भी काफी स्थिर होने लगी है। 1 जुलाई से प्रतिबंध हटने पर व्यापारिक गतिविधियों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को फ्यूल खरीदने में पहले जैसी सुविधा मिलेगी। आपूर्ति सामान्य होने से आने वाले समय में देश का फ्यूल डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम और अधिक सुचारु हो जाएगा।

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