हर महीने 4 लाख सैलरी, Z+ सिक्योरिटी और... अब धनखड़ को नहीं मिलेंगी ये सुविधाएं

Jagdeep Dhankhar: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को औपचारिक रूप से पत्र लिखकर जगदीप धनखड़ ने तत्काल प्रभाव से पद त्यागने की जानकारी दी। धनखड़ अपने निजी जीवन के अलावा समाजिक जीवन में भी काफी एक्टिव रहते थे।
Jagdeep Dhankhar Salary As Vice President
जगदीप धनखड़, (फाइल फोटो)
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Jagdeep Dhankar Net Worth: देश के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा में उपसभापति जगदीप धनखड़ ने सोमवार रात अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। साल 2022 में उपराष्ट्रपति बने धनखड़ का कार्यकाल 2027 तक था, ऐसे में वो कार्यकाल पूरा न करने वाले देश के तीसरे उपराष्ट्रपति बन गए हैं। उनसे पहले कृष्णकांत तथा वीवी गिरी भी उपराष्ट्रपति के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को औपचारिक रूप से पत्र लिखकर जगदीप धनखड़ ने तत्काल प्रभाव से पद त्यागने की जानकारी दी। धनखड़ अपने निजी जीवन के अलावा समाजिक जीवन में भी काफी एक्टिव रहते थे। वह अपने बयानों को लेकर भी सुर्खियों में रहते थे। हाल के दिनों में न्‍यायपालिका पर उनका कमेंट काफी चर्चाओं में रहा। अब उनके इस्तीफे के बाद कई लोगों के मन में सवाल है कि भारत के उपराष्‍ट्रपति रहते हुए उन्हें कितनी सैलरी मिलती थी।

उपराष्ट्रपति के लिए कोई निर्धारित वेतन नहीं

हालांकि, आपकी जानकारी को और दूरुस्त करने के लिए बताते चलें कि भारत में उपराष्ट्रपति पद के लिए अधिकारिक तौर पर कोई वेतन निर्धारित नहीं होता, बल्कि उन्हें राज्यसभा के पदेन सभापति (Ex-officio Chairman) के रूप में सैलरी देने की व्यवस्था होती है। इसका मतलब यह हुआ की उपराष्‍ट्रपति का पद अनपेड होता है। क्‍योंकि उपराष्‍ट्रपति ही राज्‍यसभा का सभापति होता है तो इस पद की जिम्‍मेदारियों का निर्वहन करने के लिए उन्हें भारत सरकार की ओर से वेतन मिलता है।

जगदीप धनखड़ को कितनी सैलरी मिलती थी?

जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति रहते हुए हर महीने 4 लाख रुपये की सैलरी मिलती थी। यह वेतन ‘संसद अधिकारी के वेतन और भत्ते अधिनियम, 1953’ के तहत तय होता है। साल 2018 में एनडीए की सरकार ने इस अधिनियम में संशोधन किया गया था, जिसके बाद उपराष्ट्रपति का वेतन 1.25 लाख से बढ़ाकर 4 लाख प्रति माह कर दिया गया था। हालांकि, इस सैलरी के अलावा उपराष्ट्रपति को कई अन्य सरकारी सुविधाएं और भत्ते भी मिलते हैं।

  • सरकारी आवास: दिल्ली में उपराष्ट्रपति भवन नाम की सरकारी आवास की सुविधा।
  • मेडिकल सुविधा: उपराष्‍ट्रपति और उनके परिवार के लिए मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधा।
  • ट्रेवलिंग: देशभर में ट्रेन और हवाई यात्रा की मुफ्त सुविधा।
  • टेलीकॉम सेवा: लैंडलाइन और मोबाइल फोन की मुफ्त सुविधा।
  • दैनिक भत्ता: आधिकारिक कार्यों के लिए दैनिक भत्ते।
  • सिक्योरिटी: Z+ कैटेगरी की सिक्योरिटी और कामकाज के लिए स्टाफ की सुविधा।
  • सरकारी ट्रांसपोर्टेशन: सरकारी वाहन, चालक और फ्यूल की सुविधा।
  • ऑफिस खर्च: दफ्तर के रखरखाव और संचालन के लिए अलग से भत्ते की सुविधा।

आजीवन पेंशन की व्यवस्था

उपराष्ट्रपति पेंशन एक्ट, 1997 के अनुसार, जो व्यक्ति उपराष्ट्रपति के रूप में कार्य कर चुका है, उसे आजीवन पेंशन मिलती है। यदि उपराष्ट्रपति ने कम से कम 2 साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है, तो उसे पूरी पेंशन मिलती है। अगर कार्यकाल 2 साल से कम रहा है, तो अनुपातिक (pro-rata) आधार पर पेंशन देने की व्यवस्था है।

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