मेन्यू कार्ड के लिए हुई धक्का-मुक्की...तो जल गई दिमाग की बत्ती, दीपिंदर गोयल ने कैसे रखी थी Zomato की नींव?

Zomato: 2026 में सीईओ पद छोड़ते समय दीपिंदर गोयल एक ऐसी विरासत (Eternal) छोड़ रहे हैं, जिसने भारतीयों के खाना खाने और मंगाने के तरीके को हमेशा के लिए बदल दिया। आइए जानते हैं कैसे हुई थी इसकी शुरआत?
How Deepinder Goyal Started Zomato
जोमैटो के सीईओ दीपिंदर गोयल, (डिजाइन फोटो/नवभारत लाइव)
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How Deepinder Goyal Started Zomato: जोमैटो के फाउंडर दीपिंदर गोयल का सीईओ पद से इस्तीफा देना स्टार्टअप जगत की सबसे बड़ी खबरों में से एक है। जौमैटो के शुरुआत की कहानी किसी फिल्म से कम रोमांचक नहीं है। एक मामूली 'फूड मेन्यू' के साथ शुरू हुआ यह सफर आज कैसे अरबों डॉलर की कंपनी बन गया। आईए सबकुछ विस्तार से जानते हैं।

बता दें कि जोमैटो की शुरुआत किसी बड़े बिजनेस प्लान के साथ नहीं, बल्कि एक छोटी सी समस्या के समाधान के रूप में हुई थी। साल 2008 में दीपिंदर गोयल दिल्ली में 'बैन एंड कंपनी' (Bain & Company) में बतौर मैनेजमेंट कंसल्टेंट काम करते थे। ऑफिस के लंच ब्रेक में उन्होंने देखा कि लोग कैफेटेरिया में खाना ऑर्डर करने के लिए मेन्यू कार्ड देखने की खातिर लंबी कतारों में खड़े रहते हैं।

फुडीबे से जोमौटो तक का सफर

दीपिंदर को लगा कि अगर इन मेन्यू कार्ड्स को डिजिटल कर दिया जाए, तो लोगों का समय बच सकता है। उन्होंने अपने साथी पंकज चड्ढा के साथ मिलकर ऑफिस के उन मेन्यू कार्ड्स को स्कैन किया और कंपनी के इंट्रानेट पर डाल दिया। देखते ही देखते उनकी कंपनी के सभी लोग उस पेज का इस्तेमाल करने लगे। यहीं से 'Foodiebay' (फुडीबे) का जन्म हुआ, जो आगे चलकर 'Zomato' बना।

दिल्ली-मुंबई से कोलकाता तक विस्तार

9 महीनों के भीतर ही 'Foodiebay' दिल्ली-NCR की सबसे बड़ी रेस्टोरेंट डायरेक्टरी बन गई। इसमें दिल्ली के लगभग सभी मशहूर रेस्टोरेंट्स के मेन्यू और जानकारी उपलब्ध थी। इसके बाद 2010 में उन्होंने इसका विस्तार मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में किया।

Zomato नाम के पीछे की कहानी

इसी दौरान दीपिंदर को महसूस हुआ कि कंपनी का नाम 'eBay' से मिलता-जुलता है और वे इसे सिर्फ फूड तक सीमित नहीं रखना चाहते थे। वे एक ऐसा नाम चाहते थे जो छोटा हो, याद रखने में आसान हो और जिसमें 'टोमैटो' (टमाटर) जैसा अहसास हो। तब उन्होंने अपनी कंपनी का नाम बदलकर Zomato कर दिया।

चुनौतियां और ग्लोबल विस्तार

जोमैटो की नींव रखने के बाद दीपिंदर को सबसे बड़ी चुनौती फंड जुटाने में आई। 2010 में 'इन्फो एज' (Naukri.com के मालिक) के संजीव बिखचंदानी ने इसमें पहला निवेश किया। इसके बाद जोमैटो ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2011 में जोमैटो ने अपना मोबाइल ऐप लॉन्च किया, जिसने इसकी लोकप्रियता को घर-घर तक पहुंचा दिया।

भारत के अलावा अन्य देशों में पहचान

भारत में सफलता के बाद, दीपिंदर ने जोमैटो को दुबई, श्रीलंका, और न्यूजीलैंड जैसे देशों में भी लॉन्च किया। 2015 तक जोमैटो सिर्फ एक सर्च और रेटिंग प्लेटफॉर्म था, लेकिन दीपिंदर ने जोखिम उठाया और फूड डिलीवरी सेगमेंट में कदम रखा, जहां उनका मुकाबला स्विगी (Swiggy) जैसे दिग्गजों से था।

IPO और ब्लिंकिट का अधिग्रहण

2021 में जोमैटो का शेयर बाजार में आना (IPO) भारतीय स्टार्टअप्स के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ। दीपिंदर गोयल ने न केवल जोमैटो को मुनाफे में लाया, बल्कि ब्लिंकिट (Blinkit) का अधिग्रहण कर 'क्विक कॉमर्स' की दुनिया में भी झंडे गाड़ दिए। 2026 में सीईओ पद छोड़ते समय दीपिंदर गोयल एक ऐसी विरासत (Eternal) छोड़ रहे हैं, जिसने भारतीयों के खाना खाने और मंगाने के तरीके को हमेशा के लिए बदल दिया।

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