कैसे बदला बजट पेश करने का समय, ब्रिटिश एम्पायर की निकाली गयी हेकड़ी
भारत का बजट हर साल शाम के 5 बजे पेश किया जाता था। ये समय इसीलिए जरूरी था, क्योंकि उस समय पर लंदन में सुबह के 11.30 बजते थे। साल 2001 में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने बजट को भारतीय समयानुसार पेश करने का फैसला लिया था।
- Written By: अपूर्वा नायक
यशवंत सिन्हा (सौ. सोशल मीडिया )
नई दिल्ली : किसी भी देश की आर्थिक दिशा और विकास की रफ्तार को तय करने में बजट अहम भूमिका निभाता है। बजट से ना सिर्फ फाइनेंशियल स्टेट्स का पता चलता है, बल्कि इससे ये भी निर्धारित किया जाता है कि किसी भी देश के अलग-अलग सेक्टरों में किस सेक्टर को कितनी प्रायोरिटी दी जा सकती है।
बजट के एक प्रकार से एक इकोनॉमिक ब्लूप्रिंट माना जा सकता है, जो सरकार के द्वारा तय योजनाओं और पॉलिसीज के अनुसार इकोनॉमिक रिसोर्सेज का वितरण करता है। हर देश का बजट ना सिर्फ उस वित्त वर्ष की इकोनॉमिक कंडीशन पर असर करता है, बल्कि भविष्य के विकास और ग्रोथ के लिए भी रास्ता दिखाया है।
2001 का वो ट्रांसफॉर्मेशनल बजट
भारत में बजट के साथ कई ऐतिहासिक परंपराएं जुड़ी थी, लेकिन इनमें से एक अहम बदलाव साल 2001 में किया गया था, जिसकी चर्चा आज भी की जाती है। इस ट्रांसफॉर्मेशन से ना सिर्फ भारत के बजट पेश करने की प्रोसेस को नया आकार दिया गया बल्कि ये ट्रांसफॉर्मेशन भारत की बढ़ती इकोनॉमिक पावर और आत्मनिर्भरता की पहचान भी बना था। भारत में सदियों से बजट पेश करने से जुड़ी कई परंपराएं रही है, जो साल 1927 से लेकर साल 2000 तक जारी रही है। इन परंपराओं में से एक परंपरा के अनुसार, भारत का बजट हर साल शाम के 5 बजे पेश किया जाता था। ये समय इसीलिए जरूरी था, क्योंकि उस समय पर लंदन में सुबह के 11.30 बजते थे।
सम्बंधित ख़बरें
21 नवंबर का इतिहास: स्वतंत्र भारत का पहला डाक टिकट ‘जय हिंद’ जारी
दे सलामी इस तिरंगे को जिससे हमारी शान है…स्वतंत्रता दिवस पर दें अपनों को शुभकामनाएं
‘स्वतंत्रता दिवस’ के मौके को बनाएं स्पेशल, देशभक्ति के साथ ‘ऐसी’ मिठाइयों की मिठास का लें आनंद, यहां
Independence Day Special: जब देश को मिला ‘पिन कोड’, चिट्ठियों की दुनिया में आई थी बड़ी क्रांति
ब्रिटेन के हाउस में सुना जाता था भारतीय बजट
5 बजे पेश किए जाने वाले बजट के समय ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स और हाउस ऑफ कॉमन्स में बैठे सांसद बड़ी गौर से भारतीय बजट सुना करते थे। इसका प्रमुख कारण ये था कि भारत के बिजनेस इंटरेस्ट लंदन के स्टॉक एक्सचेंज से जुड़े होते थे और भारतीय बजट का सीधा असर उन स्टॉक एक्सचेंज पर भी पड़ता था। ये परंपरा भारत को आजादी मिलने के बाद भी कई सालों तक जारी रही थी, लेकिन 50 सालों के बाद इसे बदलने का फैसला लिया गया था। साल 2001 में उस समय के वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने बजट को भारतीय समयानुसार पेश करने का क्रांतिकारी फैसला लिया था। उन्होंने दिन के समय बजट पेश करने का निर्णय लिया था, जो भारत की लोकल परंपराओं और जरूरतों के अनुसार हुआ करता था।
बिजनेस की अन्य खबरें पढ़ने के लिए यहां पर क्लिक करें
ये मामला सिर्फ समय को बदलने का नहीं था, बल्कि ये भारत की इकोनॉमिकल और पॉलिटिकल इंडीपेंडेंस की दिशा में एक अहम कदम था। भारत के फाइनेंस से जुड़े फैसले अब पूरी तरह से देश के अनुसार लिए जा रहे थे, न कि ब्रिटेन या किसी और विदेशी ताकत तके अनुसार। इस ऐतिहासिक कदम से ये संदेश दिया गया था कि अब भारत एक स्वतंत्र देश है, जो अपने फैसले लेने के आत्मनिर्भर है और किसी भी विदेशी प्रभाव से फ्री है। साल 2001 में ये बदलाव सिर्फ समय के बदलने तक लिमिटेड नहीं था, बल्कि ये भारत की बढ़ती ताकत और संप्रभुता की निशानी था। ये कदम दिखाता है कि भारत ने अपनी इकोनॉमिक कंडीशन को मजबूत किया है और अब वो पूरी दुनिया में एक मजबूत शक्ति के रूप में खड़ा है।
