

GST Reform 3.0: जीएसटी सिस्टम लागू होने के लगभग 9 साल बाद देश के टैक्स ढांचे में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार वस्तु और सेवा कर (GST) अधिकारियों के पास मौजूद सीधे गिरफ्तारी के अधिकारों को खत्म करने पर गंभीर विचार कर रही है। इस संबंध में आगामी 7 अक्टूबर को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में एक अहम प्रस्ताव पर चर्चा होने की पूरी उम्मीद है।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य व्यापारियों और निवेशकों के मन से कर अधिकारियों के कथित 'दुरुपयोग' या प्रशासनिक ओवररीच के डर को दूर करना और कारोबार के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना है।
मौजूदा सीजीएसटी अधिनियम (CGST Act) की धारा 69 के तहत, कमिश्नर को गंभीर टैक्स अपराधों जैसे फर्जी बिल तैयार करना, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम करना और जानबूझकर टैक्स चोरी करने के मामलों में बिना कोर्ट के वारंट के सीधे गिरफ्तारी की शक्ति मिली हुई है।
केंद्रीय जीएसटी फॉर्मेशन के आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच कर उल्लंघन के कुल 72,393 मामले दर्ज किए गए, जिनमें केंद्रीय अधिकारियों द्वारा 887 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
हालांकि इसमें राज्य के जीएसटी प्रवर्तन अधिकारियों के आंकड़े शामिल नहीं हैं। उद्योग जगत के नेताओं और व्यापारियों लंबे समय से इन प्रावधानों के सख्त और मनमाने इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है।
प्रस्तावित बदलाव के तहत, यदि जीएसटी अधिकारी सीधे तौर पर गिरफ्तारी की शक्ति का इस्तेमाल नहीं करेंगे, तो इसका मतलब यह नहीं है कि धोखाधड़ी करने वालों को छूट मिल जाएगी। गंभीर और जानबूझकर किए गए वित्तीय फ्रॉड से निपटने के लिए आपराधिक कानूनों का सहारा लिया जाएगा।
इसके तहत ऐसे मामलों में औपचारिक मुकदमे और कानूनी कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रावधानों के माध्यम से आगे बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा, प्रॉसिक्यूशन की सीमा को भी बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये तक किए जाने पर विचार चल रहा है, जिससे छोटे स्तर के मामलों में अनावश्यक उत्पीड़न से बचा जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जीएसटी काउंसिल इस प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगाती है, तो इसके बाद कानून में संशोधन की प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार आगामी संसद के शीतकालीन सत्र में इससे जुड़े संशोधन विधेयक को पेश कर सकती है।
इससे पहले प्रत्यक्ष कर के क्षेत्र में भी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) द्वारा टैक्स वसूली नियमों से गिरफ्तारी और हिरासत के प्रावधानों में राहत दी जा चुकी है।
यह संभावित सुधार भारतीय कर प्रणाली में पारदर्शिता लाने, व्यापार करने में सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने और निवेशकों का विश्वास मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।
फिलहाल सभी कारोबारियों और निवेशकों की निगाहें 7 अक्टूबर को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक पर टिकी हैं, जहां इस बड़े नीतिगत बदलाव पर अंतिम चर्चा होगी।