अडानी ने चीनी कंपनी को कहा बाय-बाय, एयरपोर्ट पर सुविधा देने वाली ड्रैगनपास से तोड़ा करार
पहलगाम हमले के बाद से भारत में चीन, पाकिस्तान, तुर्किये और अजरबैजान का विरोध किया जा रहा है। जिसके चलते अब गौतम अडानी की कंपनी अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स ने चीन की कंपनी ड्रैगनपास के साथ कॉन्ट्रेक्ट तोड़ दिया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (सौ. सोशल मीडिया )
गौतम अडानी ने अपनी एयरपोर्ट संभालने वाली कंपनी के लिए एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड ने ग्लोबल एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस सेवा देने वाली कंपनी ड्रैगनपास के साथ अपनी पार्टनरशिप को खत्म कर दिया है। इस फैसले के कारण अब ड्रैगनपास के सदस्य मुंबई, मंगलुरू, जयपुर, अहमदाबाद, लखनऊ, तिरुवनंतपुरम और गुवाहाटी समेत अडानी द्वारा मैनेज्ड एयरपोर्ट्स पर लाउंज एक्सेस का फायदा नहीं उठा पाएगे।
कंपनी ने बयान में दी सफाई
अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड ने बयान में कहा है कि ड्रैगनपास के साथ हमारी पार्टनरशिप तुरंत खत्म कर दी गई है। अब इसके ग्राहक अडानी एयरपोर्ट पर लाउंज एक्सेस के पात्र नहीं रहेंगे। हालांकि कंपनी ने ये साफ किया है कि इस बदलाव का असर बाकी लाउंज सर्विसेज या बैंक और क्रेडिट कार्ड के माध्यम से मिलने वाली सर्विसेज पर नहीं पड़ेगा। बाकी पार्टनर्स के माध्यम से लाउंज सर्विस पहले जैसी ही बनी रहेगी।
गौरतलब है कि इसी हफ्ते की शुरूआत में अडानी डिजिटल लैब्स यानी एडीएल ने ड्रैगनपास के साथ एक स्ट्रेटिजिकल पार्टनरशिप का ऐलान किया था, जिसका मकसद एयरपोर्ट्स पर बेहतर लाउंज एक्सपीरियंस देना था, लेकिन कुछ ही दिनों में ये पार्टनरशिप खत्म कर दी गई है।
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बीसीएएस ने तुर्किये की कंपनी के साथ करार खत्म किया
इसी बीच, दिल्ली एयरपोर्ट ने भी एक बड़ा फैसला लेते हुए तुर्किये की ग्राउंड हैडलिंग कंपनी सेलेबी एविएशन के साथ अपना कॉन्ट्रेक्ट खत्म कर दिया है। ये कदम सिविल एविएशन सिक्योरिटी ब्यूरो यानी बीसीएएस के द्वारा सिक्योरिटी परमिशन कैंसिल किए जाने के बाद उठाया गया है। भारत ने ये फैसला तुर्किये द्वारा पाकिस्तान के प्रति सपोर्ट और नेशनल सिक्योरिटी चिंताओं के चलते लिया है।
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आपको बता दें कि इससे पहले शिवसेना के नेतृत्व में एक प्रतिनिधित्व ने भी मुंबई एयरपोर्ट पर सेलेबी के कॉन्ट्रेक्ट को खत्म करने की डिमांड की थी। उन्होंने 10 दिनों की टाइमलिमिट तय करते हुए वार्निंग दी थी कि कार्रवाई नहीं होने पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इन दोनों घटनाओं से ये साफ है कि एयरपोर्ट संचालन से जुड़ी कंपनियों के साथ स्ट्रेटेजिकल पार्टनरशिप पर अब सिक्योरिटी और राष्ट्रहित को सबसे ऊपर रखा जा रहा है।
