कॉन्सेप्ट फोटो, (सोर्स- सोशल मीडिया)
FPI Outflow In Share Market: भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला कुछ समय काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। एक तरफ जहां घरेलू निवेशक बाजार को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं विदेशी निवेशक (FPI) के रुख ने सबकी चिंता बढ़ा दी है। दुनिया भर में मचे भू-राजनीतिक घमासान और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से अपना हाथ खींचना शुरू कर दिया है। आइए जानते हैं कि आखिर विदेशी निवेशक भारत से अपना पैसा क्यों निकाल रहे हैं और इसके पीछे के कारण क्या हैं।
एनएसडीएल के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 88,180 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। डॉलर में देखें तो यह रकम करीब 9.6 अरब डॉलर बैठती है। खास बात यह है कि मार्च में 20 तारीख तक एफपीआई हर कारोबारी सत्र में शुद्ध बिकवाल रहे। यानी उन्होंने लगातार शेयर बेचे और बाजार से पैसा बाहर निकाला।
हालांकि, यह निकासी बहुत बड़ी जरूर है, लेकिन अक्टूबर 2024 में हुई 94,017 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड निकासी से अभी भी थोड़ी कम है। फिर भी मार्च का यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि बाजार में इसकी चर्चा तेज है। मार्च की इस भारी बिकवाली को समझने के लिए फरवरी का आंकड़ा भी देखना जरूरी है। फरवरी में यही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय शेयरों में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश करके खरीदार बने थे। यह 17 महीनों का सबसे ऊंचा निवेश आंकड़ा था।
यानी एक महीने पहले तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में खरीदारी कर रहे थे, लेकिन मार्च आते-आते उनका रुख पूरी तरह बदल गया। हालिया निकासी को जोड़ दें तो साल 2026 में अब तक एफपीआई भारतीय शेयर बाजार से 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल चुके हैं।
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इस समय एफपीआई की यह बिकवाली सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बाजार के मूड का इशारा भी है। विदेशी निवेशक फिलहाल सतर्क हैं और पश्चिम एशिया के हालात, तेल की कीमत, रुपये की चाल और वैश्विक संकेतों को बहुत ध्यान से देख रहे हैं।