सुधा मूर्ति ने माता पिता को दी ये एडवाइज, मां को बताया सबसे अच्छा एडवाइजर

बिजनेसवुमन और समाजसेविका सुधा मूर्ति एक पेरेंट कोच के तौर पर भी जानी जाती है। उन्होंने एक इवेंट में बच्चों और माता पिता दोनों को कुछ ऐसी सलाह दी है जो रिश्तों को सुचारू रुप से चलाने में काफी काम आ सकती है।
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सुधा मूर्ति (सौजन्य : सोशल मीडिया)
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नई दिल्ली : इंफोसिस के को फाउंडर एन नारायणमूर्ति की पत्नी, बिजनेसवुमन और समाजसेविका के रुप में जाने जानी वाली सुधा मूर्ति एक सबसे अच्छी पेरेंट कोच भी है। उन्होंने कई शोज में बच्चों की परवरिश कैसी की जानी चाहिए, इससे संबंधित टिप्स माता पिता को दी है। हाल ही में हुए एक इवेंट के दौरान एक छात्रा ने सुधाजी से एक प्रश्न में ये पूछ लिया कि बच्चे किस तरह बिना किसी हिचकिचाहट के अपने पेरेंट्स से खुलकर बात कर सकते हैं या बिना डरे अपने माता पिता तक अपना मैसेज किस तरीके से पहुंचा सकते हैं?

इस सवाल का जवाब देते हुए सुधा जी ने कहा कि बच्चों को कभी भी अपने पेरेंट्स से कोई भी बात छुपाना नहीं चाहिए। इतना ही नहीं उन्होंने ये भी जानकारी दी है कि उन्होंने अपनी बेटी से यही कहा था कि उन्हें उनके बारे में किसी और से कुछ नहीं पता चलना चाहिए। अगर कोई बात है, तो खुलकर उनसे शेयर करना चाहिए।

पेरेंट्स को भी दी एडवाइज

इतना ही नहीं सुधा मूर्ति ने पेरेंट्स को भी ये सलाह दी है कि उन्हें अपने को इतनी आजादी तो देनी ही चाहिए कि वे उनसे बिना डरे कोई भी बात शेयर कर सके। अगर आपका बच्चा आपसे बात करने से डरता है या उसे आपसे बात करने से पहले सोचना पड़ता है, तो मां बाप के रुप में ये सबसे खराब चीज है। माता पिता को को अपने बच्चों को खुलकर बात करने का मौका देना चाहिए। बिजनेस से जुड़ी अन्य खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें :- UPSC परीक्षा को लेकर Infosys के को फाउंडर ने पीएम मोदी को दी कौन सी सलाह, जानें विस्तार से 

मां से बेहतर एडवाइजर कोई नहीं

एक छात्रा के सवाल के जवाब में सुधाजी ने कहा कि बच्चों को सबसे अच्छी सलाह उनके माता पिता ही दे सकते हैं। अगर आप अपने माता पिता के अलावा किसी और से सलाह लेते हो, तो हो सकता है कि वो आपको गलत मार्गदर्शन करें। इसीलिए ऐसे मौके पर अपनी मां से सलाह लेना सबसे अच्छा साबित हो सकता है, क्योंकि मां से अच्छा एडवाइजर कोई और नहीं हो सकता है। साथ ही उन्होंने पेरेंट्स को भी यही टिप्स दी है कि अपने बच्चों को इतना अवसर दें कि वो आपसे खुलकर बात कर सकें। इससे बच्चे को भी ऐसा लगेगा कि आप उसके साथ हो और उसे खुलकर सपोर्ट करते हो।

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