Budget 2026: टैरिफ जंग के बीच यूरोपीय बाजारों में MSMEs विस्तार पर भारत का रहेगा मुख्य जोर

MSMEs Global Market: बजट 2026 में MSMEs क्षेत्र को वैश्विक बनाने के लिए यूरोपीय बाजारों पर जोर दिया जाएगा। ट्रेड रेजिलिएंस फंड और GST सुधारों के जरिए छोटे उद्यमियों को बड़ी राहत मिलने की संभावना है।
Budget 2026 for MSMEs: Focus on European Expansion, Trade Resilience, and GST Reforms
बजट 2026 में MSME (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Globalizing MSMEs European market expansion: वित्त मंत्री द्वारा पेश किए जाने वाले आगामी आम बजट में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं। वैश्विक टैरिफ जंग के बीच सरकार का मुख्य उद्देश्य भारतीय उत्पादों को यूरोपीय संघ के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ दिलाकर निर्यात को बढ़ावा देना है। बजट में छोटे निर्यातकों को वैश्विक जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक विशेष 'ट्रेड रेजिलिएंस फंड' की घोषणा किए जाने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा, सरकार श्रम-प्रधान उद्योगों और पारंपरिक विनिर्माण इकाइयों को आधुनिक बनाने के लिए ऋण सहायता और तकनीकी सब्सिडी जैसे विशेष प्रावधान भी लागू कर सकती है।

यूरोपीय बाजारों में अवसर

बजट में यूरोपीय संघ के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते की स्पष्ट झलक दिखाई देगी जिससे भारतीय MSMEs क्षेत्र को नए वैश्विक बाजारों तक पहुंच मिलेगी। टैरिफ जंग के इस दौर में सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर रहेगा कि निर्यातकों को चरणबद्ध तरीके से कम होने वाले टैरिफ का सीधा फायदा मिल सके। इसके लिए निर्यातकों को वैश्विक अनिश्चितताओं से बचाने हेतु 'ट्रेड रेजिलिएंस फंड' का गठन किया जा सकता है जो छोटे उद्यमियों के लिए सुरक्षा कवच बनेगा।

GST और पूंजीगत राहत

MSMEs क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही पूंजी की लागत घटाने की मांग को इस बजट में गंभीरता से संबोधित किए जाने की उम्मीद है। छोटे कारोबारियों को निरंतर पूंजी प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित कोष का प्रावधान किया जा सकता है जिससे विनिर्माण इकाइयों को विस्तार में मदद मिलेगी। इसके अलावा, GST के इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को सुलझाने और रिफंड प्रक्रिया को तेज करने पर भी वित्त मंत्री का विशेष ध्यान रहने वाला है।

छोटे उद्यमों को विशेष छूट

नियमों के अनुपालन के भारी बोझ को कम करने के लिए 1.5 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले सूक्ष्म उद्यमों को कुछ विशेष कानूनी छूट दी जा सकती है। क्रेडिट गारंटी योजनाओं को अधिक सुलभ और लाभकारी बनाकर छोटे उद्यमियों के लिए बिना किसी बाधा के ऋण प्राप्त करना अब काफी आसान बनाया जाएगा। सरकार का यह भी लक्ष्य है कि छोटे कारोबारियों को ऑनलाइन बाजार या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बड़े खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के समान अवसर मिलें।

श्रम-प्रधान उद्योगों का विकास

वस्त्र, चमड़ा, हस्तशिल्प और खाद्य प्रसंस्करण जैसे अधिक रोजगार देने वाले क्षेत्रों को बजट में बड़ी आर्थिक राहत मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। सरकार 'आत्मनिर्भर भारत' और 'वोकल फॉर लोकल' के विजन को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए इन क्षेत्रों में नई अप्रेंटिसशिप योजनाएं शुरू करेगी। नए स्टार्टअप्स के विकास के लिए सुगम रास्ते बनाने के साथ-साथ फिनटेक और डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म को भी बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित किया जा सकता है।

तकनीक और पर्यावरण पर जोर

यूरोपीय देशों में निर्यात के लिए अब पर्यावरण-अनुकूल और कम कार्बन उत्सर्जन वाली तकनीकों को अपनाना एक अनिवार्य शर्त बन चुकी है जिसे बजट में प्राथमिकता मिलेगी। ग्रीन और स्मार्ट तकनीक को अपनाने वाली निर्यात इकाइयों के लिए सरकार विशेष पूंजी सब्सिडी का एलान कर सकती है ताकि वैश्विक मानक पूरे हो सकें। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने और बाजार की मांग का सटीक पूर्वानुमान लगाने के लिए करने हेतु नई योजनाएं बनाई जाएंगी।

क्लस्टर आधारित बुनियादी ढांचा

विभिन्न औद्योगिक क्लस्टरों के समग्र विकास के लिए साझा डिजाइन और परीक्षण केंद्र स्थापित करने हेतु बजट में एक बड़ी राशि आवंटित की जा सकती है। पारंपरिक उद्योगों के आधुनिकीकरण के लिए कम ब्याज दरों पर ऋण सहायता प्रदान करने से स्थानीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी धाक जमाने में सक्षम होंगे। सरकार का यह एकीकृत दृष्टिकोण न केवल निर्यात बढ़ाएगा बल्कि देश के भीतर बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसरों का सृजन भी करेगा।

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