तुर्की और अजरबैजान का पर्यटन ध्वस्त! बुकिंग में 60% गिरावट तो रद्दीकरण 250% बढ़ा
ऑपरेशन सिंदूर के समय तुर्की और अजरबैजान ने खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया। अब इसका खामियाजा दोनों देशों के पर्यटन को भुगतना पड़ रहा है। मेक माई ट्रिप ने बताया कि तुर्की की बुकिंग में 60 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.
- Written By: Saurabh Pal
तुर्की और अजरबैजान (फोटो-सोशल मीडिया)
नई दिल्लीः तुर्की और अजरबैजान को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान का साथ देना भारी पड़ रहा है। दोनों देशों की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा पर्यटन से आता है। अंकारा और बाकू के टिकट में भारी गिरावट दर्ज की गई है। देश में सोशल मीडिया पर तुर्किये और अजरबैजान की यात्रा के बहिष्कार के आह्वान के बीच मेकमाईट्रिप ने बुधवार को कहा कि पिछले एक सप्ताह में दोनों देशों के लिए बुकिंग में 60 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि रद्दीकरण में 250 प्रतिशत यानी ढाई गुना की वृद्धि हुई है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान को ‘समर्थन’ देने के कारण पूरे देश में तुर्किये और अजरबैजान की यात्रा का बहिष्कार करने का आह्वान किया जा रहा है। भारत ने 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए छह और सात मई की दरमियानी रात को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था।
तुर्की और अजरबैजान की बुंकिग में 60% की गिरावट
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इसके बाद पाकिस्तान द्वारा किए गए आक्रमण का जवाब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत दिया गया। तुर्किये और अजरबैजान, दोनों देशों ने पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर भारत के हमले की आलोचना की थी। मेकमाईट्रिप के प्रवक्ता ने कहा, “पिछले एक सप्ताह में भारतीय यात्रियों ने मजबूत भावनाएं व्यक्त की हैं। अजरबैजान और तुर्किये के लिए बुकिंग में 60 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि रद्दीकरण में 250 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि अपने देश के साथ एकजुटता और अपने सशस्त्र बलों के प्रति गहरे सम्मान के कारण, हम इस भावना का दृढ़ता से समर्थन करते हैं और सभी को अजरबैजान और तुर्किये की अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह देते हैं।
तुर्की की जब भारत ने की मदद
भारत और पाकिस्तान जब एक दूसरे पर मिसाइल और ड्रोन से हमला कर रहे थे तो उस समय तुर्की ने गद्दारी की, जबकि संकट के समय भारत ने तुर्की का साथ दिया था। पिछले साल तुर्की भूंकप ने भीषण तबाही मचाई थी। बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए थे। खाने और पानी के संकट से जूझ रही थी। उस समय भारत ने तुर्की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया था।
