8th Pay Commission: 11 महीने बीते पर न ऑफिस, न स्टाफ; क्या अधर में लटकेगी कर्मचारियों की सैलरी हाइक?

8th Pay Commission: परंपरा के मुताबिक, जब भी कोई वेतन आयोग बनता है, तो सबसे पहले उसे एक कार्यालय दिया जाता है। वहीं कर्मचारी संगठन जाकर अपनी मांगें रखते हैं, ज्ञापन सौंपते हैं।
8th Pay Commission Latest Update
आठवां वेतन आयोग, (डिजाइन फोटो-AI)
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 8th Pay Commission Latest Update: आठवें वेतन आयोग को लेकर देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स में उत्सुकता बढ़ती जा रही है, लेकिन इसके साथ ही एक चौंकाने वाली हकीकत भी सामने आई है। आठवें सेंट्रल पे कमीशन का गठन तो हो गया है, टर्म ऑफ रेफरेंस (ToR) भी जारी हो चुका है। लेकिन अब तक आयोग को अपना ऑफिस ही नहीं मिला है। यह दावा ऑल इंडिया एनपीएस इम्प्लॉई फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत पटेल ने किया है।

सरकारी टाइमलाइन पर नजर डालें तो तस्वीर साफ दिखती है। जनवरी 2025 में केंद्रीय कैबिनेट ने आठवें वेतन आयोग को मंजूरी दी। इसके बाद 28 अक्टूबर 2025 को आयोग के गठन का आधिकारिक ऐलान हुआ और 3 नवंबर 2025 को टर्म ऑफ रेफरेंस जारी किया गया।

 31 दिसंबर को 7वां वेतन आयोग खत्म

मौजूदा सातवां वेतन आयोग बीते दिन यानी 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो गया है, ऐसे में आठवें वेतन आयोग के 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना जताई जा रही है। लेकिन मंजीत पटेल के मुताबिक, जमीनी हकीकत यह है कि आयोग के पास अभी तक कोई तय कार्यालय ही नहीं है। उनका कहना है कि जब ऑफिस ही नहीं है, तो बातचीत किससे और कहां होगी?

'नए वेतन आयोग को कोई ऑफिस नहीं'

डॉ. पटेल ने बताया कि परंपरा के मुताबिक, जब भी कोई वेतन आयोग बनता है, तो सबसे पहले उसे एक कार्यालय दिया जाता है। वहीं कर्मचारी संगठन जाकर अपनी मांगें रखते हैं, ज्ञापन सौंपते हैं और आयोग के चेयरपर्सन व सदस्यों से मुलाकात करते हैं। अभी न तो चेयरपर्सन रंजना प्रकाश देसाई से इस मुद्दे पर कोई बातचीत हुई है और न ही घोषित सदस्यों से। वजह साफ है- आयोग के पास ऑफिस न होना। ऐसे में कोई घर जाकर तो बात करेगा नहीं।

उनका सवाल है कि जब कर्मचारियों को अपने मुद्दे रखने हों, तो वे आखिर किस दरवाजे पर जाएं? सामान्य प्रक्रिया यही होती है कि आयोग एक समय तय करता है, कर्मचारी संगठनों को बुलाता है, और औपचारिक बैठक में उनकी बात सुनी जाती है। इस दौरान डॉ. पटेल ने सवाल भी उठाया और कहा कि, "जब बैठने की जगह ही तय नहीं, तो यह प्रक्रिया कैसे शुरू होगी?"

यूपी विधानसभा चुनाव तक हो सकता है ऐलान

पटेल के मुताबिक, सरकार द्वारा नए वेतन आयोग को जानबूझकर खींचा जा रहा है। उनका दावा है कि इस देरी के पीछे राजनीतिक वजहें भी हो सकती हैं और इसे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों तक लटकाया जा सकता है। यानी यह साफ है कि आठवें वेतन आयोग को लेकर जहां एक ओर कर्मचारियों को नई सैलरी और फिटमेंट फैक्टर की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर ऑफिस तक न मिल पाना इस पूरी प्रक्रिया पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। अब देखना यह है कि सरकार कब इस आयोग को जमीनी तौर पर काम शुरू करने लायक ढांचा देती है।

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