ट्रंप प्रशासन की नई चाल, आउटसोर्सिंग पर 25% टैक्स; भारतीय IT कंपनियां के लिए बड़ा खतरा
American Outsourcing Tax: हायर अधिनियम ऐसे समय में लाने का प्रस्ताव रखा गया है, जब भारतीय आईटी सेक्टर अपने मुख्य बाजार अमेरिका में कमजोर राजस्व वृद्धि से जूझ रहा है।
- Written By: मनोज आर्या
डोनाल्ड ट्रंप, (अमेरिकी राष्ट्रपति)
American Outsourcing Tax: पिछले कुछ समय से अनिश्चितता का मार झेल रहे भारतीय आईटी सेक्टर के लिए बुरी खबर आ रही है। दरअसल, अमेरिका का 25 प्रतिशत का प्रस्तावित आउटसोर्सिंग टैक्स बड़ा खतरा बन सकता है। यह वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) की इकोनॉमी को भी बड़ा झटका दे सकता है। अगर ये प्रस्ताव नियम में बदलता है तो अमेरिकी कंपनियों को अपनी वैश्विक आउटसोर्सिंग रणनीतियों का काफी सावधानी के साथ फिर से आकलन करना होगा, क्योंकि उत्पाद शुल्क, राज्य और स्थानीय टैक्स के संयुक्त प्रभाव से विदेशी श्रम एवं सेवाों को शामिल करने की लागत में बड़ी वृद्धि हो सकती है।
टैक्स एवं इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस प्रस्ताव से आउटसोर्सिंग करने वाली अमेरिकी कंपनियों पर लगभग 60 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स का दबाव बढ़ सकता है। इस फैसले से दुनिया के सबसे बड़े आउटसोर्सिंग बाजार में दिग्गज कंपनियां आईटी सेवाओं को खरीदने के तरीकों में बदलाव ला सकती है। जिसका असर 283 अरब डॉलर के भारतीय आईटी सेक्टर पर पड़ सकता है। भारतीय आईटी कंपनियां तीन दशक से भी ज्यादा समय से बड़ी अमेरिकी इकाइयों को सॉफ्टवेयर सेवाओं का एक्सपोर्ट कर रही हैं।
अमेरिकी सीनेट में हायर अधिनियम पेश
अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर बर्नी मोरेनो ने पिछले सप्ताह हल्टिंग इंटरनेशनल रीलोकेशन ऑफ इम्पलॉयमेंट (हायर) अधिनियम पेश किया। इसमें विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने वाली कंपनियों पर 25 फीसदी टैक्स लगाने का प्रस्ताव है, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी वर्क फोर्स के विकास में होगा। प्रस्ताव कंपनियों को आउटसोर्सिंग पेमेंट को टैक्स कटौती योग्य खर्च के रूप में दावा करने से रोकता है।
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भारतीय कंपनियों की चिंता क्यों बढ़ी?
हायर अधिनियम ऐसे समय में लाने का प्रस्ताव रखा गया है, जब भारतीय आईटी सेक्टर अपने मुख्य बाजार अमेरिका में कमजोर राजस्व वृद्धि से जूझ रहा है। यह इसलिए, क्योंकि उपभोक्ता महंगाई और टैरिफ अनिश्चितता के बीच गैर-जरूरी तकनीकी खर्च टाल रहे हैं। भारतीय आईटी कंपनियां एपल, अमेरिकी एक्सप्रेस, सिस्को, होम डिपो, सिटीग्रुप और फेडेक्स को अपनी सेवाएं निर्यात करती हैं।
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अमेरिकीयों कंपनियों पर भी बढ़ेगा बोझ
ईवाई इंडिया के जिग्नेश ठक्कर का कहना है कि अमेरिकी सीनेटर के इस प्रस्ताव के तहत विदेश से प्राप्त आईटी सेवाओं के लिए 100 डॉलर का भुगतान करने वाली एक अमेरिकी कंपनी को इस लेनदेन पर 25 फीसदी उत्पाद शुल्क देना होगा। यह भुगतान और उससे जुड़ा उत्पाद शुल्क, दोनों ही कॉरपोरेट कर उद्देश्यों के लिए कटौती योग्य नहीं होंगे। इससे आउटसोर्सिंग भुगतान पर कर कटौती का नुकसान 31 फीसदी बढ़ सकता है। यह अमेरिकी कंपनियों के लिए दोहरी मार है।
