बिहार में ये कैसी शराबबंदी? सचिवालय में ही मिली शराब की बोतलें, तेजस्वी यादव ने ‘सम्राट’ सरकार को घेरा
Tejashwi Yadav: तेजस्वी यादव ने कहा कि राज्य में जहरीली शराब से कई लोगों की जान जा चुकी है। यह इस नीति की विफलता को दर्शाता है। युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बदल रही है।
- Written By: मनोज आर्या
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Tejashwi Yadav On Bihar Liquor Ban: बिहार की राजधानी पटना स्थित सचिवालय में सोमवार को कूड़ेदान से शराब की बोतलें मिलने से हड़कंप मच गया। इस घटना पर बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में शराबबंदी पूरी तरह से विफल है। इसके साथ ही इस पूरे मामले में जांच की मांग की है।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। एक तरफ सरकार दावा करती है कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है, वहीं दूसरी ओर सचिवालय जैसे संवेदनशील परिसर में शराब की बोतलें मिलना कई सवाल खड़े करता है। यह जांच का विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
‘शराबबंदी से सत्ता में बैठे लोगों का फायदा’
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि शराबबंदी का फायदा आम जनता को नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि गरीब लोग जेल जा रहे हैं, उन पर मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। खासकर दलित और अतिपिछड़े समाज के लोगों पर अधिक कार्रवाई हो रही है, उनकी गिरफ्तारी हो रही है।
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‘बिहार में लागू शराबबंदी पूरी तरह से फ्लॉप’
राजद नेता ने आगे कहा कि राज्य में जहरीली शराब से कई लोगों की जान जा चुकी है। यह इस नीति की विफलता को दर्शाता है। युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बदल रही है और वे अन्य तरह के नशे के आदी हो रहे हैं, लेकिन सरकार के पास इसे रोकने के लिए कोई ठोस नीति या नियंत्रण नहीं है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए बिहार में लागू शराबबंदी पूरी तरह से फ्लॉप साबित हो रही है।
रोहिणी आचार्य ने बिहार सरकार को घेरा
लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि बिहार में शराब की पहुंच सत्ता के गलियारों तक है। बिहार में शराबबंदी के सफल होने के तमाम दावों की हवा एक दफा फिर से निकल गयी है, मंत्रियों-बड़े सरकारी अधिकारियों के बैठने वाली सरकारी बिल्डिंग ‘विकास भवन’ में शराब की खाली बोतल का पाया जाना शराबबंदी के कानून का पूरी तरह से फेल होना ही दर्शाता है। कहीं ऐसा तो नहीं कि उच्च सुरक्षा वाली बिल्डिंगस में बैठ कर मंत्री या सरकारी अधिकारी ही शराब का सेवन कर रहे हैं?
(रोहिणी आचार्य का सोशल मीडिया पोस्ट)
‘सरकार तक शराब कारोबारियों की पहुंच’
रोहिणी आचार्य ने आगे कहा कि सरकार की नाक तले शराब की बोतल पाए जाने से ही ये साबित होता है कि अवैध शराब के कारोबारियों की पहुंच सरकारी तंत्र से ज्यादा है और अवैध शराब के कारोबार की जड़ें सरकार से भी ज्यादा मजबूत हैं। पूर्व में भी अतिसुरक्षित कहे जाने वाले विधानसभा परिसर में भी शराब की बोतलें बरामद हो चुकी हैं।
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एक नहीं, सैंकड़ों दफा कई अस्पतालों, पुलिस थानों और सरकारी कार्यालयों में शराब की बोतलें पाई गई हैं, शराबबंदी का आलम तो कुछ ऐसा है कि राजधानी पटना के साथ-साथ प्रदेश के लगभग हरेक गली-मोहल्ले-कस्बे-गांव एवं शहरों की सडकों पर खाली शराब की बोतलें मिलना आम बात है।
