बिहार में पुलों पर सियासत तेज, जेडीयू 18 महीने तो आरजेडी अठारह साल की दिला रहे याद

बिहार में धड़ाधड़ गिरते पुलों को लेकर सियासत तेज है। सरकार और विपक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप का भी सिलसिला काफी तेज है। सत्ता में बैठी एनडीए की सरकार इसके लिए विपक्ष को जिम्मेदार बता रही है। वहीं विपक्ष में बैठी आरजेडी पार्टी ने सरकार से 18 सालों का हिसाब-किताब मांगा है।
bihar bridges collapse
बिहार में 18 दिन में गिरे 12 पुल (डिज़ाइन फोटो)
Published on: 
Updated on: 

पटना: बिहार में पहले मानसून के एंट्री होते ही पुलों के गिरने का सिलसिला भी शुरू हो गया। पिछले 20 दिन में 12 पुल गिर गए। जिसके बाद बिहार सरकार ने एक्शन लेते हुए 11 इंजिनयर को संस्पेंड कर दिया। हालांकि पुलों के गिरने का आरोप कोई भी अपने उपर लेने को तैयार नहीं है। एक ओर एनडीए सरकार का कहना है कि आरजेडी (राष्ट्रीय जनता दल) के कार्यकाल में पुलों के निर्माण में भ्रष्टाचार हुए थे। जिसका नतीजा आज देखने को मिल रहा है। वहीं विपक्षी पार्टी ने आरोप लगाया कि पिछले 17 सालों से सुशासन बाबू बिहार की सत्ता सीट पर बैठे हैं इसलिए इसकी सारी जवाबदेही उनपर ही है।

केंद्रीय मंत्री और जदयू नेता ललन सिंह ने पुलों के गिरने का जिम्मेदार आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को बताया है। उन्होंने कहा कि पिछले 18 महीने तक ग्रामीण कार्य विभाग का मंत्री कौन था? इसलिए अब इसकी इसका जिम्मेवार कौन होगा? उन्होने आरजेडी नेता पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें इस बात का जवाब देना चाहिए कि वो इस दौरान पुल का निर्माण देख रहे थे या भी मजा कर रहे थें।

18 सालों से सत्ता में

वहीं इस मामले पर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव का कहना है कि मैं केवल 18 महीने तक इस पद पर रहा। अगर इस समय को छोड़ दिया जाए तो पिछले 18 सालों से कोई साशन में बैठा है। इतने सालों तक ग्रामिण विभाग जेडीयू के हाथों में रहा है। इसकी जिम्मेदारी उन्हें लेना चाहिए। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि राज्य में पुलों की गिरने की घटना को गंभीरता से लेनी चाहिए। सरकार भी इस विषय पह गंभीरता से काम कर रही है। जिस किसी ने भी निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार की वजह से गुणवत्ता के साथ समझौता किया उसे बिलकुल स्वीकारा नहीं जाएगा। साथ ही अब यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में ऐसी कोई घटना ना घटे।

सुप्रीम कोर्ट में मामला

बता दें कि ये मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। इस मामले में एडवोकेट ब्रजेश सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दाखिल की है। जिसमें राज्य सरकार द्वारा पुलों के सरकारी निर्माण का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने का अनुरोध किया गया है।

Navbharat Live
navbharatlive.com