

बिहार में शराबबंदी को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। एनसीएईआर की एक अध्ययन रिपोर्ट में शराबबंदी के कारण राज्य को होने वाले राजस्व नुकसान और अवैध शराब के कारोबार जैसे मुद्दों का जिक्र किए जाने के बाद बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने रिपोर्ट के निष्कर्षों पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार के लिए राजस्व महत्वपूर्ण है, लेकिन सिर्फ कमाई बढ़ाने के लिए शराब की बिक्री को बढ़ावा देना सही रास्ता नहीं हो सकता। जायसवाल ने कहा कि विकास का मतलब केवल सड़क, पुल और दूसरी सुविधाओं का निर्माण नहीं है, बल्कि सामाजिक मूल्यों और लोगों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना भी जरूरी है। उन्होंने शराब के दुष्प्रभावों को लेकर सरकार, सामाजिक संगठनों और गैर सरकारी संस्थाओं को मिलकर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत बताई।
बिहार में शराबबंदी को लेकर एनसीएईआर की रिपोर्ट के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। रिपोर्ट में शराबबंदी से राज्य को होने वाले राजस्व नुकसान और अवैध शराब के कारोबार समेत कई पहलुओं का जिक्र किया गया है। इसके बाद बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने रिपोर्ट के कुछ निष्कर्षों पर सवाल उठाते हुए शराबबंदी को सिर्फ आर्थिक नजरिए से देखने पर आपत्ति जताई।
दिलीप जायसवाल ने कहा कि राज्य के लिए राजस्व जरूरी है, लेकिन विकास के नाम पर शराब की बिक्री को बढ़ावा देना समाज के हित में नहीं हो सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए लोगों को शराब की ओर बढ़ाना सही तरीका माना जा सकता है।
शराबबंदी पर अपनी बात रखते हुए दिलीप जायसवाल ने कहा कि विकास केवल आर्थिक आंकड़ों और सरकारी राजस्व तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक समाज के संस्कार और सामाजिक मूल्यों की कीमत पर होने वाले विकास पर भी सवाल उठना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सड़क, पुल और दूसरी आधारभूत सुविधाएं जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ समाज में इंसानियत और सामाजिक मूल्यों को मजबूत बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि शराब की बिक्री से मिलने वाले राजस्व की तुलना समाज पर पड़ने वाले इसके प्रभाव से भी की जानी चाहिए।
दिलीप जायसवाल ने झारखंड में चल रहे जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़े कथित पेपर लीक मामलों को लेकर छात्रों के आंदोलन पर भी विपक्षी गठबंधन को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन हुआ था, तब उसे बदनाम करने की कोशिश की गई। राजनीतिक लोगों के शामिल होने से छात्रों के मुद्दे को अलग दिशा देने का प्रयास किया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर झारखंड के साथ-साथ कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में भी परीक्षा और पेपर लीक से जुड़े मामले सामने आते हैं, तो विपक्ष उन मुद्दों पर समान रूप से आवाज क्यों नहीं उठाता। उनका कहना है कि झारखंड में छात्रों की समस्याओं को लेकर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठाए जाने चाहिए।
15 अगस्त को लेकर 'हर घर तिरंगा' अभियान पर दिलीप जायसवाल ने कहा कि तिरंगा सिर्फ देश का झंडा नहीं बल्कि हर भारतीय के लिए गौरव, सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बचपन से ही लोग 'विजयी विश्व तिरंगा प्यारा' जैसे गीतों के जरिए तिरंगे के प्रति सम्मान की भावना महसूस करते आए हैं।