बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी संजीव हंस ( फाइल फोटो)
नई दिल्ली : प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को बिहार के एक आईएएस अधिकारी पर रिश्वत व पद का दुरुपयोग करके अकूत संपत्ति कमाने का आरोप लगाया है। साथ ही मामले में शामिल पूर्व राजद एमएलसी गुलाब यादव को उनके कालेधन को सफेद करने का गुनहगार माना है।
प्रवर्तन निदेशालय की ओर से जारी जानकारी में आरोप लगाया कि बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी संजीव हंस ने राज्य सरकार और केंद्र में अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्ट आचरण के माध्यम से आय से अधिक संपत्ति अर्जित की और इस गलत तरीके से अर्जित धन को सफेद करने में पूर्व राजद एमएलसी गुलाब यादव ने उनकी भरपूर मदद की है।
संघीय एजेंसी ने एक बयान में कहा कि उसने दोनों के खिलाफ धन शोधन मामले की जांच में नए सिरे से तलाशी ली और मंगलवार को दिल्ली, गुरुग्राम, कोलकाता, जयपुर और नागपुर में 13 स्थानों पर छापे मारे।
बयान में कहा गया कि हंस के कुछ करीबी सहयोगियों और रियल एस्टेट तथा सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों के परिसरों की तलाशी ली गई। इस दौरान एजेंसी ने आरोप लगाया कि ईडी की जांच से पता चला है कि संजीव हंस ने बिहार सरकार में विभिन्न प्रमुख पदों पर रहते हुए और अपनी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान भी भ्रष्ट आचरण में लिप्त होकर अपराध की आय अर्जित की है।
ईडी ने आरोप लगाते हुए कहा-
‘‘गुलाब यादव और अन्य सहयोगियों ने भ्रष्ट आचरण से अर्जित अवैध धन के शोधन में संजीव हंस की सहायता की है।”
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 1997 बैच के अधिकारी हंस ने बिहार ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव के रूप में कार्य किया है, जबकि यादव राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पूर्व विधान परिषद सदस्य हैं। यादव ने 2015 से 2020 तक मधुबनी जिले की झंझारपुर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया।
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ईडी द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर हंस और यादव की टिप्पणियों के लिए उनसे कई बार संपर्क करने की कोशिश की गयी लेकिन उनसे तत्काल कोई संपर्क नहीं हो सका है। अब दोनों की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
–एजेंसी इनपुट के साथ