तेजस्वी के वादों को मात दे रहा नीतीश मॉडल, महिलाओं का वोट बना निर्णायक फैक्टर

Bihar Election Result: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना शुरू होते ही सियासी पारा चढ़ गया है। काउंटिंग सेंटर्स से मिल रहे ताजा आंकड़ों में एनडीए ने शुरुआती बढ़त हासिल की है। विश्लेषकों का मानना...
Nitish's model is outperforming Tejashwi's promises, women's votes become the decisive factor
तेजस्वी के वादों को मात दे रहा नीतीश मॉडल, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Bihar Women Voting Impact: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना जारी है और ताजा रुझानों ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। काउंटिंग सेंटर्स से मिल रहे प्रारंभिक आंकड़े बताते हैं कि एनडीए 140 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।

चुनाव आयोग के आधिकारिक रुझानों में मामूली अंतर जरूर है, लेकिन वहां भी एनडीए को बढ़त मिलती हुई दिखाई दे रही है। 243 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 122 सीटें चाहिए और मौजूदा रुझान एनडीए के पक्ष में मजबूत संकेत दे रहे हैं।

नीतीश कुमार पर एक बार फिर भरोसा

विश्लेषकों का कहना है कि ये रुझान साफ तौर पर बताते हैं कि तेजस्वी यादव के वादों की तुलना में नीतीश कुमार की ज़मीनी उपलब्धियों पर लोगों ने अधिक भरोसा जताया है। खासतौर पर महिला मतदाताओं की इस बार निर्णायक भूमिका देखने को मिल रही है। पिछली बार की तरह इस बार भी मुकाबला बेहद नजदीकी माना जा रहा था, क्योंकि 2020 के चुनाव में एनडीए ने 125 और महागठबंधन ने 110 सीटें जीती थीं। दोनों गठबंधनों के वोट शेयर में सिर्फ 0.03% का अंतर था।

महिलाओं का क्या रहा वोटिंग पैटर्न?

इस चुनाव में भी महिलाओं का वोटिंग पैटर्न गेम चेंजर साबित होता दिख रहा है। इस बार महिला मतदाताओं की भागीदारी पुरुषों से पूरे 9 प्रतिशत ज्यादा रही, जिसने चुनावी समीकरणों को नई दिशा दी है। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं का रुझान पहले समझना मुश्किल होता है, लेकिन इस बार मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत दी गई 10,000 रुपये की सहायता कई महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा साबित होती दिखी।

नीतीश कुमार के शासनकाल में महिलाओं की स्थिति में आए बदलाव ने भी उनका समर्थन बढ़ाया है। 2006 में शुरू की गई साइकिल योजना ने न सिर्फ लड़कियों की पढ़ाई का रास्ता खोला, बल्कि ग्रामीण समाज में महिलाओं के लिए नई पहचान बनाई। आज भी गांवों में स्कूली ड्रेस में साइकिल से जाती लड़कियों की कतारें इस बदलाव की गवाही देती हैं। किताबों, पोशाक और छात्रवृत्ति से जुड़ी योजनाओं ने महिलाओं की अगली पीढ़ी को भी सशक्त बनाया।

एनडीए पर एक बार फिर भरोसा

इसके विपरीत, लालू-राबड़ी शासन में महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं आ सका था। राबड़ी देवी ने पीरियड लीव जैसी पहल जरूर की थी, लेकिन कानून-व्यवस्था की स्थिति ने महिलाओं के लिए असुरक्षा बढ़ाई। वहीं, नीतीश सरकार के शासन में हालात बदले और एनडीए अब भी इस उपलब्धि को जोरदार तरीके से जनता के सामने रख रहा है।

अगर रुझान यही दिशा बनाए रखते हैं तो साफ है कि बिहार की महिलाओं ने इस बार बड़े पैमाने पर एनडीए पर भरोसा जताया है। दलित और EBC महिलाओं में भी योजनाओं का असर दिखाई दे रहा है। अब मतगणना के अंतिम परिणाम का इंतज़ार है, लेकिन शुरुआती तस्वीर एनडीए के लिए काफी उत्साहजनक है।

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