

Bharat Tiwari Encounter Case: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में भोजपुर जिले के शाहपुर थाने में एक नई एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले में जगदीशपुर के एसडीपीओ राजेश शर्मा, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार को नामजद किया गया है। इसके अलावा मुठभेड़ के दौरान मौजूद रहे अन्य पुलिसकर्मियों को भी आरोपी बनाया गया है। एनकाउंटर को लेकर परिजन, स्थानीय लोग और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता लगातार सवाल उठा रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहले ही हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच कराने का आदेश दे चुके हैं। इसी बीच भरत तिवारी की मां आशा देवी के आवेदन पर सोमवार को शाहपुर थाने में नई एफआईआर दर्ज की गई।
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि 17 जून की सुबह डीएसपी और थानेदार के नेतृत्व में पुलिस टीम उनके घर पहुंची थी। इसके बाद भरत तिवारी को जवइनिया बाढ़ विस्थापितों के लिए आवंटित जमीन की ओर ले जाया गया। परिजनों का कहना है कि भरत तिवारी इस जमीन से जुड़े मुद्दों को लगातार फेसबुक लाइव के माध्यम से उठाता रहा था।
आशा देवी का आरोप है कि मौके पर पहुंचने के बाद भरत तिवारी ने पुलिस के सामने अपना हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उसे धक्का देकर एक गड्ढे में गिरा दिया। उन्होंने दावा किया कि वहां मौजूद डीएसपी ने गोली चलाने का आदेश दिया, जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने भरत को कई गोलियां मार दीं और उसे वाहन में लेकर चले गए। बाद में शाम को पुलिस ने उसकी मौत की सूचना दी। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि भरत के पिता काशीनाथ तिवारी को शाहपुर पुलिस ने दो दिनों तक थाने में बैठाए रखा था। पुलिस ने आवेदन के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जांच इंस्पेक्टर संजीव कुमार को सौंपी गई है।
17 जून की रात शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार सहित पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। भोजपुर के एसपी राज ने बताया था कि भरत तिवारी द्वारा पुलिस पर पिस्टल तानने से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद भी समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई। साथ ही स्थिति को नियंत्रित करने में भी लापरवाही बरती गई।
पुलिस के अनुसार भरत तिवारी लंबे समय से सोशल मीडिया के जरिए प्रशासन और पुलिस पर सवाल उठाता था। 16 जून को जब पुलिस टीम उसके घर पहुंची थी, तब उसने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर पिस्टल तान दी थी, जिसका वीडियो वायरल हुआ था। अगले दिन पुलिस और भरत के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें उसकी मौत हो गई।
घटना के दौरान भरत तिवारी फेसबुक पर लाइव था। उसके आखिरी लाइव वीडियो में वह पुलिस के सामने हथियार फेंकते हुए दिखाई देता है। परिजनों का दावा है कि उसने आत्मसमर्पण कर दिया था।वहीं पुलिस का कहना है कि यह सरेंडर नहीं बल्कि एक रणनीति थी। पुलिस के मुताबिक भरत ने पिस्टल फेंकने के बाद दोबारा उसे उठाने की कोशिश की और पुलिस पर फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी। बाद में इलाज के दौरान पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में उसकी मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि भरत को पांच गोलियां मारी गई थीं, जबकि पुलिस की ओर से दर्ज प्रारंभिक एफआईआर में केवल एक गोली लगने का उल्लेख किया गया था।